*सन्त दया राम त्यागी ब्रह्मलीन हो गए। वह कुछ दिनों से अस्वस्थ थे।। रतनपुर, बेलगहना मार्ग पर लाल पुर के आगे भयहरण हनुमान मंदिर और श्री सीता राम मंदिर के स्थापना कर लगभग 15 वर्षों से भगवान के श्री चरणों में अपना जीवन अर्पित किया*
आज सन्त दया राम त्यागी ब्रह्मलीन हो गए। वह कुछ दिनों से अस्वस्थ थे।। रतनपुर, बेलगहना मार्ग पर लाल पुर के आगे भयहरण हनुमान मंदिर और श्री सीता राम मंदिर के स्थापना कर लगभग 15 वर्षों से भगवान के श्री चरणों में अपना जीवन अर्पित किया।
सन्त दया राम त्यागी जी मूलतः मध्य प्रदेश के थे।। उनका मूल नाम दशरथ तिवारी थे और शिक्षा विभाग में प्रधान पाठक थे। सेवा निवृत्ति के बाद उनके मन में वैराग्य हुआ। अपने गुरु के आदेश पर रामानंदी सम्प्रदाय में त्यागी सन्यासी बन गए।
प्राचीन नगरी रतनपुर में कुछ दिन रहवास के बाद उसे लालपुर के आगे एक पुल के समीप स्थित हनुमान जी ने उसे वहीं रोक लिया। वह स्थान बीहड़, सुनसान, पांच किलोमीटर तक कोई बस्ती नही ऐसे निर्जन स्थान में दृढ़ संकल्प से अपनी कुटिया बनाकर अकेले रहने लगे। क्षेत्रीय लोगों से संपर्क और अपनी भावनाओं से हनुमान मंदिर के स्थापना के लिए जुट गए। इस कार्य में जन मानस ने सहयोग, समर्थन और सम्मान दिया। वह क्षेत्र अब आश्रम हो गया था।। भयहरण हनुमान मंदिर में श्री सीता राम मंदिर और यज्ञ शाला भी निर्मित है। लगभग 4 से 5 एकड़ क्षेत्र में निर्मित इस आश्रम को सनातन धर्म के प्रचार के लिए रतनपुर क्षेत्र की जनता के लिए छोड़ दिए हैं।
आश्रम में रतनपुर, लालपुर, पोड़ी, शिवपुर, खैरा, चपोरा, फुलवारी पारा सहित दर्जनों गांवों के भक्त और श्रद्धालु जुड़े हैं।
सन्त त्यागी के ब्रह्मलीन होने पर इस क्षेत्र में सन्नाटा फैला हुआ है। उन्होंने इस क्षेत्र में एक आदर्श स्थापित कर सदा के लिए अमर हो गए हैं।।
उनके ब्रह्मलीन होने पर श्री मंगलागौरी मन्दिर धाम , शंकराचार्य आश्रम पोड़ी रतनपुर छत्तीसगढ़ गोवर्धन मठ पुरी पीठ कोटि कोटि प्रणाम करता है।
दैवज्ञ पंडित रमेश शर्मा
आचार्य एवम श्री मंहत श्री मंगलागौरी मन्दिर धाम


