*राजधानी के दक्षिण काली माता मंदिर, यहां आने वाले खाली हाथ नहीं लौटते, सेवा भावना से पहचानी जा रही है, सैकड़ों लोगों को मंदिर में मिलता है प्रसादी भोजन*

*राजधानी के दक्षिण काली माता मंदिर, यहां आने वाले खाली हाथ नहीं लौटते, सेवा भावना से पहचानी जा रही है, सैकड़ों लोगों को मंदिर में मिलता है प्रसादी भोजन*

रायपुर। राजधानी में मां काली जी का प्रसिद्ध मंदिर है माँ काली मंदिर में जनसेवा का काम किया जा रहा हैं। बहुत ही कम समय में इस मंदिर की ख्याति बढ़ गई हैं।इस मंदिर को हिंदू संगठन के लोगो ने बनाया हैं इसके साथ ही इस मंदिर में आम व्यक्ति भी जुड़ा हुआ हैं।इस मंदिर की सबसे खास बात यह है की यह मंदिर बनने के बाद से ही सप्ताह के तीन से चार दिन भंडारे का आयोजन करता हैं जिसमे करीब ४०० से ५०० लोगो को प्रसाद के रूप में भोजन मिल जाता हैं।साथ ही आम जन को साफ़ व ठंडा पानी मिल सके इसकी भी व्यवस्था की गई जो की काबिलेतरीफ़ हैं।मेनरोड में स्थित इस मंदिर को लेकर कुछ राहगीरो का कहना है की इस जगह काफ़ी सुनसान हुआ करता था आयेदिन नशा करते हुए लड़के लड़कियों का जमावड़ा लगा रहता था। मंदिर बनने के बाद से इन सभी समस्याओं से लोगो को मुक्ति मिल गई।आये दिन इस मार्ग में नशेड़ची लड़के लड़कियों से लोग त्रस्त हो चुके थे यहाँ के रहवासियों ने प्रशासन से कई बार शिकायते भी की पर कभी भी इस ओर ध्यान नहीं दिया गया।एक अद्भुत मंदिर बनाया गया हैं.जिसकी तारीफ आज हर कोई कर रहा है.

लोगो का कहना है की जिसने भी इस मंदिर की स्थापना की हैं उसने बहुत पुण्य का काम किया हैं।आज बड़ी संख्या में भक्तों का आना जाना हैं।लोग अपने धर्म के प्रति जागरूक हो साथ ही मानवसेवा करे इसी सोच को आगे बढ़ाने का काम इस मंदिर में किया जा रहा हैं ।वही कुछ हिंदू धर्म के विरोधी लोगो ने सोशल मीडिया में इस मंदिर को चंदा बटोरने व सरकारी जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगाकर अपनी कुंठित मानसिकता जाहिर कर दी।इनको हिंदुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ करने में बहुत ज़्यादा मजा आता हैं बाक़ी धर्मो के अवैध कब्जे इनको नजर ही नहीं आते हैं उनके समय ये ज्ञानी अंध मुख बधिर हो जाते हैं।एक बड़े अखबार के निम्न स्तर से जुड़े व्यक्ति ने सोशल मीडिया में अपनी क्षुद्र बुद्धि का परिचय देते हुए मंदिर वालो को तोमर बंधु के चंदा आयोजन से जोड़ दिया।अब इस मूर्ख व्यक्ति को शहर की सरकारी जमीनों में बने मजार और चर्च कभी दिखे ही नहीं।इस बात को लेकर जब हमने अपनी पड़ताल की तो पता चला की इस मंदिर का संचालन केवल व्यक्ति सेवा के साथ किया जा रहा हैं इस मंदिर में अकसर भंडारा किया जाता हैं जिसमे ४०० से 500 लोगो को भोजन मिलता हैं साथ ही मंदिर समिति ने पीने के पानी की व्यवस्था की हैं एक वॉटर कूलर भी लगवाया हैं जिससे आज १००० से ज़्यादा लोगो को साफ़ और ठंडा पानी मिलता हैं।इस मंदिर समिति की एक ख़ास बात और भी बड़ी दिलचस्प लगी इस मंदिर में अभी तक ५०० लोगो को साड़ी भी बांटी जा चुकी हैं आप कभी भी इस मंदिर में अपनी किसी भी समस्या को लेकर अगर जाओगे तो यहाँ उसका समाधान भी किया जाता हैं।इस मंदिर में अक्सर रिक्शा ऑटो चलाने वालो को प्रसादी करते देख सकते हो। इस मंदिर में कई धर्म के लोगो का भी आना होता हैं। सर्वधर्म की बात भी इस मंदिर में नजर आई।इस मंदिर में सारे कार्य मंदिर समिति अपने पास से ही करती हैं।कुल मिलाकर माँ दक्षिण काली मंदिर सरकारी जमीन में कब्जा करने व चंदा इकट्ठे करने के उद्देश से नहीं किया गया हैं।हिन्दुत्व से जुड़े लोगो ने इस मंदिर का निर्माण केवल मानवसेवा के उद्देश्य को लेकर की हैं।मंदिर समिति का कहना है कि हर भूखे को खाना और हर प्यासे पानी दे सके.जीवन का सबसे बड़ा कार्य तो यही हैं. समाज के लिए कुछ कर सके बस यही सोच लेकर हम अपना कर्तव्य निभाने में लगे हैं