*टैगोर इंस्टीट्यूट के संचालक ने की धोखाधडी, जमीन का अनुबंध कर दूसरे को बेचने की कोशिश, पीड़ित ने एसएसपी से की शिकायत*

*टैगोर इंस्टीट्यूट के संचालक ने की धोखाधडी, जमीन का अनुबंध कर दूसरे को बेचने की कोशिश, पीड़ित ने एसएसपी से की शिकायत*

बिलासपुर। बिलासपुर में जमीन का सौदा कर दूसरे से बेचने का मामला सामने आया है सकरी स्थित 52 डिसमिल जमीन का सौदा कर जमीन की सम्पूर्ण राशि प्राप्त कर,रजिस्ट्री करने से इंकार करने वाले टैगौर इंस्टिट्यूट के संचालक सुकांत विश्वकर्मा के खिलाफ पीड़ित मनोज ठाकुर ने एसएसपी रजनेश सिंह से मिलकर लिखित शिकायत की है। उस्लापुर निवासी प्रार्थी मनोज सिंह ठाकुर ने अपनी शिकायत में बताया की 24 जनवरी 2025 को सुकांत विश्वकर्मा से खसरा नम्बर 290/40 और 290/41 रकबा 52 डिसमिल का इकरारनामा निष्पदित कर 55 लाख रुपये मे पक्का सौदा किया.भूमिस्वामी सुकांत विश्वकर्मा ने पैसे की जरुरत बताकर खरीदार मनोज ठाकुर और उसके पार्टनर से जमीन की लगभग सम्पूर्ण राशि 53लाख 40 हजार रूपये पक्के मे ले लिया और 52 डिसमिल भूमि मे से सर्फ 28 डिसमिल जमीन को ही मुझे रजिस्ट्री और पॉवर ऑफ़ अटॉर्नी से दिए है अब बची शेष 24 डिसमिल भूमि को सुकांत विश्वकर्मा रजिस्ट्री करने से इंकार कर रहा है। दरअसल सुकांत विश्वकर्मा ने अनुबंध मे ये लिखवा दिया की तीन माह के भीतर जमीन की बिक्री कर ली जाएगी। 24जनवरी मे हुए अनुबंध के बाद उनके द्वारा कुछ जमीनों की रजिस्ट्री की गई बाकी जमीनों के लिए बाद में रजिस्ट्री देने की बात कहते रहे और तभी मनोज को सूचना मिली कि भूमिस्वामी सुकांत विश्वकर्मा बीमार पड़ गया और ज्यादा तबियत ख़राब होने के कारण अस्पताल मे भर्ती था, इस कारण खरीदार मनोज सिंह को उसने विश्वास दिलाया की तबियत ठिक होने पर वह जल्द शेष जमीन की रजिस्ट्री कर देगा. 3 माह के एग्रीमेंट खत्म होने के बाद भी भूमिस्वामी ने मई महीने मे एक रजिस्ट्री की और उसके बाद शेष बची 24 डिसमिल भूमि को नहीं बेचने षड़यंत्र रचने लगा।

 भूमि का सम्पूर्ण राशि प्राप्त कर, दूसरे से किया अनुबंध
 टैगौर इंस्टिट्यूट के संचालक सुकांत विश्वकर्मा ने ज्यादा पैसे कमाने के लालच में,अनुबंध भूमि का एग्रीमेंट कैंसिल कराए बगैर दूसरे से अनुबंध कर दिया. वहीं अब उसे भूमि को बेचने की तैयारी कर रहा है, मामले में पीड़ित मनोज ठाकुर ने अपने वकील के माध्यम से भूमि स्वामी सुकांत विश्वकर्मा का नोटिस भिजवाया है।
1963 लिमिटेशन एक्ट के अनुसार कोई भी अनुबंध 3 साल के लिए वैध 1963 लिमिटेशन एक्ट में साफ तौर पर इस बात का उल्लेख है कि कोई भी अनुबंध 3 साल के लिए वैध होता है,और उसको समाप्त करने की विधिक प्रक्रिया होती है, लेकिन भूमि स्वामी सुकांत विश्वकर्मा ने जनवरी 2025 में किए गए अनुबंध को समाप्त करने किसी भी प्रकार की विधिको समाप्त करने किसी भी प्रकार की विधिक प्रक्रिया नहीं प्रक्रिया नहीं अपनाई, और अनुबंध भूमि को दूसरे को विक्रय करने अनुबंध कर दिया।

एसएसपी से हुई शिकायत, जाँच के निर्देश
मामले मे पीड़ित मनोज ठाकुर ने एसएसपी रजनेश सिंह से मिलकर लिखित शिकायत की है,0जमीन की सम्पूर्ण राशि प्राप्त कर शेष बची 24 डिसमिल भूमि की रजिस्ट्री नहीं करने के मामले मे आरोप सही पाए जाने पर जाँच के बाद FIR दर्ज करने के निर्देश दिये गए है।

ब्यूरो रिपोर्ट