*हरितालिका तीज को लेकर इस वर्ष सबसे बड़ा प्रश्न यही है व्रत 13 सितंबर को रखा जाए या 14 सितंबर 2026 को?, जानिए*

*हरितालिका तीज को लेकर इस वर्ष सबसे बड़ा प्रश्न यही है व्रत 13 सितंबर को रखा जाए या 14 सितंबर 2026 को?, जानिए*

हरितालिका तीज 2026 13 सितंबर या 14 सितंबर ?
धर्मसिन्धु और निर्णय-सिन्धु के तिथि-निर्णय से जानिए शास्त्रसम्मत निर्णय:
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हरितालिका तीज को लेकर इस वर्ष सबसे बड़ा प्रश्न यही है
व्रत 13 सितंबर को रखा जाए या 14 सितंबर 2026 को?

आइए, भावनाओं या सोशल मीडिया की सूचनाओं से नहीं, बल्कि शास्त्रीय तिथि-निर्णय से इसका विवेचन करें।

#पहला_पक्ष - 13 #सितंबर:
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13 सितंबर को तृतीया का आरम्भ हो जाता है। इसलिए कुछ पंचांगों में तृतीया के आरम्भ को आधार बनाकर 13 सितंबर को हरितालिका तीज मानने की बात कही जा सकती है,लेकिन केवल तृतीया के आरम्भ को देख लेना हरितालिका व्रत के विशेष तिथि-निर्णय के लिए पर्याप्त नहीं है।

#दूसरा_पक्ष - 14 #सितंबर:
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धर्मसिन्धु में हरितालिका के लिए विशेष रूप से परवर्ती तृतीया को ग्रहण करने का सिद्धान्त मिलता है-

भाद्रशुक्लतृतीयायां हरितालिकाव्रतम्। तत्र मुहूर्तमात्रा ततो न्यूना अपि परा ग्राह्या।

अर्थात् यदि अगले दिन तृतीया अल्प समय के लिए भी विद्यमान हो, तो परवर्ती दिन की तृतीया ग्रहण की जाती है ।
 
निर्णय सिन्धु (पृष्ठ संख्या-१९७ ) के अनुसार:
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" भाद्रपदशुक्लतृतीयायां हरितालिकाव्रतम् । तत्र परा ग्राह्या-"सुहूर्तमात्रसत्त्वेपि दिने गौरी व्रतं परे। शुद्धाधिकायामप्येवं गणयोगप्रशंसनात् " इति माधवोक्तेः । चतुर्थीयुक्तायां फलाधिक्यं माधवीये आपस्तम्बः- " चतुर्थी-संहिता या तु सा तृतीया फलप्रदा । अवैधव्यंकरा स्त्रीणां पुत्रपौत्रप्रवर्धिनी" द्वितीयायोगे प्रत्यवायमाह स एव" द्वितीयारोपसंयुक्तां या करोति विमो हिता । सा वैधव्यमवाप्नोति प्रवदन्ति मनीपिणः " इति ॥ " 

#अर्थात् :भाद्रपदशुक्ला ३ को हरतालिका व्रत होता है, उसमें अगली तृतीया ग्रहण करनी चाहिए। माधव ने कहा है कि, मुहूर्तमात्र होनेपर भी गौरीका व्रत परदिनमें करना चाहिये । माघवीयमें आपस्तम्बने चतुर्थी-युक्तका विशेष फल कहा है कि, चतुर्थीसहित तीज अधिक फल देती है यह स्त्रियोंको सौमाग्य करने और पुत्र पौत्रकी बढानेवाली है और जो मोहित होकर द्वितीयासे संयुक्त करती है वह वैधव्यको प्राप्त होती है ऐसा विद्वान् कहते हैं।

"यदा शुद्धाधिका तदा पूर्वदिने षष्टिघटीमितामपि त्यक्त्वा परदिने स्वल्पापि चतुर्थीयुतैव ग्राह्या, गणयोगप्राशस्त्यात् ॥"

#अर्थात्:पूर्व दिन तृतीया अधिक समय तक होने पर भी, यदि अगले दिन थोड़ी-सी तृतीया चतुर्थी के संयोग में मिलती है, तो परवर्ती तृतीया को ग्रहण करने का विधान है।
ऋषिकेश पंचांग के अनुसार :
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13 सितंबर 2026(रविवार) तृतीया आरम्भ: प्रातः 7:16 बजे से

14 सितंबर 2026(सोमवार)  तृतीया तिथि समाप्त: प्रातः 7:18 बजे ।

14 सितंबर को  प्रातः  7:18  बजे तक तृतीया तिथि  इसके पश्चात् चतुर्थी का आरम्भ।

अर्थात् 14 सितंबर को सूर्योदय के समय तृतीया का स्पष्ट अस्तित्व है।

#शास्त्रीय_कसौटी_पर_निर्णय :यदि कोई केवल यह कहे  कि 
"13 सितंबर को तृतीया शुरू हो रही है, इसलिए तीज 13 सितंबर को ही होगी।" तो यह हरितालिका के विशेष तिथि-निर्णय को पूरा नहीं दर्शाता।

धर्मसिन्धु  और निर्णय-सिन्धु का विशेष नियम परवर्ती तृतीया की उपलब्धता और चतुर्थी-संयोग को महत्व देता है। इसलिए 2026 की परिस्थिति में  हरितालिका तीज का व्रत सोमवार, 14 सितंबर 2026 रखना शास्त्रीय तिथि-निर्णय के अनुरूप है।
भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा से सभी माताओं-बहनों को अखंड सौभाग्य, सुखी दांपत्य, आरोग्य, समृद्धि और पारिवारिक मंगल की प्राप्ति हो। ॐ नमः शिवाय। ॐ उमायै नमः। दैवज्ञ पण्डित रमेश शर्मा