*अचूक अवसर सावन मास के चार मंगलवार को ।। वैधव्य दोष नाश के लिए सर्वोत्तम व्रत ■ भगवान शंकर जी ने स्वयं सनक कुमार को बताया था *।
मंगला गौरी व्रत■
अचूक अवसर सावन मास के चार मंगलवार को ।।
वैधव्य दोष नाश के लिए सर्वोत्तम व्रत
■ भगवान शंकर जी ने स्वयं सनक कुमार को बताया था ।
■ यदि किसी कन्या के जन्म पत्रिका में प्रबल मंगल दोष हो अथवा वैधव्य कारक ग्रह संस्थित हो तो इस व्रत को निश्चित करना चाहिए ।
■ इस व्रत को 5 वर्ष तक करने पर वृद्धावस्था में भी वैधव्य नहीं प्राप्त होता है ।
क्या है मंगला गौरी व्रत■
सावन मास के सभी मंगल वार को किए जाने वाले व्रत मंगला गौरी व्रत कहलाता है । इस दिन गौरी जी का पूजन किया जाता है । यह मुख्यतः महिलाओं का व्रत है ।
विधि ■
व्रत के दिन प्रातः काल स्नान कर धुले हुए वस्त्र धारण कर पूजा करना चाहिए । लकडी के पट्टे पर सफेद और लाल रंग के दो कपडे बिछाएं।
सफेद रंग के कपडे पर चावल की छोटी-छोटी नौ ढेरी बनाएं।यह नवग्रह है ।
लाल कपडे में गेहूं की छोटी छोटी 16 ढेरियां बनाएं ।यह षोडश मातृका है ।
उसी कपडे मे सामने में चावल रखकर गणेश जी को बिठा दे । तत्पश्चात पट्टे के एक कोने में गेहूं रखकर उसमें कलश रख दें।आटे का एक चौमुखा दीपक जलाया जाए।
संकल्प ■ इसके बाद अपना नाम, गोत्र का नाम, कामना का उल्लेख करते हुए दाहिने हाथ में जल, फूल, अक्षत रखकर जमीन में डालें।
सर्वप्रथम श्री गणेश जी की पूजन करना चाहिए । उन पर पंचामृत, जनेऊ, चन्दन, सिंदूर, रोली , सुपारी, लौंग, इलायची, पान, अक्षत, पुष्प, इलायची, बिल्व पत्र, फल, मेवा दक्षिणा एवं प्रसाद चढाना चाहिए । तत्पश्चात गणेश जी की आरती कर पुनः कलश की पूजा करना चाहिए ।
कलश को जल से भरकर आम की पत्ते डाल दें।कलश की भी गणेश जी की तरह ही पूजा करें ।
● कलश के ऊपर बेल पत्र और सिंदूर न चढाया जाए।
चावल की नौ ग्रह मानकर उसी विधि से पूजा करें । गेहूँ की 16 ढेरियां को सोलह मातृका मानकर उसी प्रकार पूजा करें ।
● इसमें जनेऊ न चढाएं।
■ मंगला गौरी पूजा
एक थाली में मिट्टी के पांच ढेरी रखकर उन्हें गौरी मान लें।आटे की एक लोई बनाकर रख लें।
सर्वप्रथम मंगला गौरी के ढेरी को जल, दूध, दही, घी, चीनी, शहद इत्यादि का पंचामृत बनाकर स्नान कराएं।पुनः जल से स्नान कराएं। उन्हें वस्त्र या धागा दे । इसके बाद रोली, चन्दन, सिंदूर, हल्दी, अक्षत, मेंहदी तथा काजल अर्पित करें ।16 पुष्प अर्पित करें । 16 मालाएं, 16 पत्ते, 16 आटे के लड्डू, 16 फल, 16 सुपारी अन्य पूजा सामग्री को 16 के मात्राओं में चढाएं।सुहाग की सामग्री रखें । 16 चूडिय़ां रखे।उन पर दक्षिणा रखकर मंगला गौरी व्रत की कहानी सुनी जाए।
कपूर से आरती करें । सोलह लडडओ का बयाना अपनी सास और कुँवारी हो तो माँ को देकर चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेना चाहिए ।
एक ही अनाज की रोटी खाएं ,बिना नमक।
दूसरे दिन गौरी जी का तालाब या कुएं, नदी में विसर्जन कर दे ।
इसके उपरांत 16 या 20 मंगलवार का व्रत करने का संकल्प करें तथा उधापन विधि जाकर उधापन करें।
दैवज्ञ पंडित रमेश शर्मा रतनपुर छत्तीसगढ।


