*मैं इंसान नही-एच पी जोशी की कलम से*

*मैं इंसान नही-एच पी जोशी की कलम से*

आपके नजर में इंसान नही तो क्या हुआ; आपके शहर/गांव का भगवान तो हूँ??
धूप, बरसात और ठंड में भी मुस्तैद रहने वाला; एक अदना सा पुलिस का जवान तो हूँ??
तुम चाहे मुझे नफरत से देखते रहो, दोस्तों...
मैं फिर भी आपके सुरक्षा के लिए 24x7 तैनात तो हूँ।।1।।
आपके नजर में…... तो हूँ??

झूठे कहानी बनाकर चाहे, लाखों इल्जाम मुझपर लगाओ
भद्दे भद्दे गालियां बड़बड़ाकर, नजरें चाहे सदा चुराओ
एक घंटे मेरे ड्यूटी में आ, बड्डी बनकर तो देख साथियों....
कुछ चोर, उचक्के, गुंडे - बदमाश को कभी तुम भी तो डराओ।।2।।
आपके नजर में…... तो हूँ?? 

एचपी जोशी की कलम से


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