बात बेबाक

बात बेबाक

  

चंद्र शेखर शर्मा (पत्रकार) 9425522015
           कश्मीर में घर से बेघर किये गए पंडितों के दर्द , अपने हक की बाट जोहती कश्मीर से बाहर ब्याही गई बेटी, उच्च शिक्षा और स्थायी निवासी का हक पाने पीढ़ियों से तरसता दबा कुचला समाज को आखिरकार 5 अगस्त को आजादी मिल गई । कश्मीर मांगे आजादी  के नारे लगाने वाले जेएनयू की नाजायज संतानो , पाकिस्तान परस्त देशद्रोहियों देखो मोटा भाई ने कश्मीर को 35 A और 370 कि बेड़ियो से आजादी दिला दी अब लगाओ नारे मिल गई आजादी , मिल गई आजादी , भारत माता की जय । एक ऐतिहासिक भूल की सात दशकों से पीड़ा झेलती भारत माता को उसका अभिन्न अंग पूर्णतः मिल गया इसके साथ 5 अगस्त 2019 की तारीख और मोदी - शाह की जोड़ी का नाम भी इतिहास के पन्नो में दर्ज हो गया । एक राष्ट्र - एक संविधान , एक झंडे की परिकल्पना साकार हुई पर आज भी भारत के नाम की पहचान झंडे के तीन रंगों भगवा , सफेद और हरा सरीखी भारत , इंडिया और हिदुस्तान बनी हुई है । कश्मीर के माथे पर लगे 370 और 35A के कलंक से कश्मीरियों की मुक्ति के साथ लोगो मे बह रही राष्ट्रभक्ति की भावना अपने चरम पर है । फेसबुकिया और सोशल मीडिया वीर एक से एक नारे , गीत , गजल, वेडिओ , फ़ोटो शेयर कर रहे है । कश्मीर की आजादी का जश्न जितना राष्ट्र भक्त मना रहे है उससे ज्यादा पुरुष वादी सोच और नारी को अपनी पैरों की जूती समझने वाला समाज भी मना रहा है । कश्मीर की आजादी के बहाने हम भारतीयों की घटिया मानसिकता और सोच भी आज आजाद हो समाज के सामने आई है । नारी को देवी के रूप में पूजने वाले देश मे 14 साल के किशोर से लेकर कब्र में पैर लटकाए 80 साल के बूढ़े तक कश्मीर में औरतों को लेकर जिस तरह कमेंट्स कर चुटकुले बनाते बरात ले जाने लालायित है । उससे लगता है कश्मीरयो को तो बरात का स्वागत पान पराग से करने की तैयारी कर लेनी चाहिए। सोशल मीडिया की पोस्ट से मैं सोचने पर मजबूर हूँ कि इनके परिवार की महिलाएँ , बेटियां, बहने, माँये क्या जानती हैं कि उनके घर मे एक बलात्कारी पल रहा है ? कश्मीर की आजादी के साथ ही सोशल मीडिया में लाखों जॉम्बी (हवसी) नजर आने लगे जो अपनी भूख मिटाने अब कश्मीर जाना चाहते हैं। ये भारत माता की जय के साथ कश्मीरी महिलाओं को नोच खाना चाहते हैं । कश्मीर को 35A और 370 से मुक्ति मिली है कोई
युद्ध नही जीता गया है कि अब लूट लो लड़कियाँ । कश्मीर की आजादी के बहाने लोगो को नारी समाज के प्रति अपनी घटिया सोच और  बलात्कारी मानसिकता सामने लाने का मौका जरूर मिला है ।
और अंत मे :- 
मेरी कलम का चरित्र खराब हो गया है ,
इसलिए कुछ लिखूंगा नहीं ।
तुम बस समझ लेना ,
मैं वहीं हूँ अब भी ।।
#जय_हो 6 अगस्त 2019 कवर्धा (छत्तीसगढ़)

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