*आख़िर, पैराशूट से उतरा छत्तीसगढ़ में राज्यसभा का कांग्रेस उम्मीदवार!*

*आख़िर, पैराशूट से उतरा छत्तीसगढ़ में राज्यसभा का कांग्रेस उम्मीदवार!*

प्रेम गुप्ता की कलम से.....
*कई दिनों की जद्दोजहद एवं भारी उठापटक के बाद ज्यों ही कांग्रेस ने राज्यसभा से अपने प्रत्याशियों की घोषणा किया कि, छत्तीसगढ़ से आशान्वित राज्यसभा के स्थानीय दावेदारों के चेहरे मुरझा ही नही गए बल्कि सांप सूंघ गया उनको!*

*खामोशी की चादर ओढ़ अपनों से नज़रें चुराने लगे कि अब वे किससे अपनी पीड़ा व्यक्त करें।*
*अरे भाई, जब बाड़ ही खेत को खाने को आतुर हो चला तो फिर चरवईया का क्या दोष।*

*यहाँ यह बतलाना भी जरूरी है कि आशंका / कु-शंका तो पहले से व्यक्त की जा रही थी कि अगर राज्य के दावेदारों में आपसी सहमति न बन पाने की स्थति में छत्तीसगढ़ से उम्मीदवार बाहर का थोपा जा सकता है, और हुआ भी यही।*

*हमारे राज्य के विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत जी ने भी समय रहते अपनी अंतिम इच्छा जतला दिए थे।*
*अखबारों, चैनलों की ही नही बल्कि सोशल मीडिया में भी खूब सुर्खियाँ बंटोरी, बावजूद आलाकमान तक शायद बात न पहुंची हो !*

*हमें तो याद है कि बीते विधानसभा चुनाव के समय राहुल बाबा ने कहा था कि चुनाव में पैराशूट उम्मीदवार नही होगा।*
*हुआ भी लगभग यही, तब छत्तीसगढ़ की जनता ने भर-भर कर वोट रूपी स्नेह कांग्रेस पार्टी के पक्ष में उड़ेला और कांग्रेस की राज्य में सरकार बन गई, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सक्षम नेतृत्व के चलते विधानसभा में आज आंकड़ा 90 में से 71 तक पहुंच गया है।*
*पर,*

*राहुल बाबा अब काहें पैराशूट उम्मीदवार उतार दिए हो, हम आपको समय रहते बता दे रहे है कि, जैसे ही दिल्ली ने छत्तीसगढ़ से राज्यसभा का बाहरी उम्मीदवार थोपा है न, छत्तीसगढ़ की आम जनता का माथा खिसक गया है, यूं कहें तो भन्ना गया है।*
*चौक - चौराहों पर ही नही गली नुक्कड़ पर एक ही चर्चा चलने लगी कि कांग्रेस पार्टी को छत्तीसगढ़ से कोई काबिल चेहरा नही दिखा क्या?*

*आपने सुना होगा कि "छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया"*
*यह बिल्कुल सही है, तब तक जब तक आम छत्तीसगढ़िया का माथा न भन्नाए।*

*मेरा मानना है कि आम छत्तीसगढ़िया के काबलियत को दरकिनार करे जाने की स्थति में आम छत्तीसगढ़िया का माथा पूरी तरह से भन्ना जाता है।*
*सीधे एवं सपाट शब्दों में कहूँ तो अपमानित सा महसूस करता है।*

*इसमें कोई शक नही कि राज्य में भूपेश सरकार के द्वारा जनहित में लिए गए फैसले एवं सही योजनाओं के चलते महज़ साल भर बाद होने वाले चुनाव में पार्टी की सत्ता में बने रहने की फिर से संभावनाएं बनी हुई थी, किन्तु महज़ दिल्ली की इस "बड़ी गलती" राज्यसभा के दोनों बाहरी उम्मीदवार थोपे जाने के कारण ये संभावनाएं धूल-धूसरित होती नजर आ रही है। अतएव, राहुल गांधी, समय रहते फैसले पर पुनर्विचार कर तत्काल सही निर्णय लेने की आवश्यकता है।

 

 


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