रियल एस्टेट इंडस्ट्रीज की है ये मांग, तब आएंगे आछे दिन।

 रियल एस्टेट इंडस्ट्रीज की है ये मांग, तब आएंगे आछे दिन।



Real Estate: कोरोना की पहली लहर के बावजूद रियल एस्टेट सेक्टर में रिकवरी देखने को मिली. दरअसल कोविड ने ही लोगों को अपना घर खरीदने से लेकर बड़े घर में शिफ्ट होने की जरूरत का अहसास कराया. इसपर होम लोन की ब्याज दरों पर रियायत, स्टैंप ड्यूटी में रियायत और सर्कल रेट में कटोती जैसे फैसलों से लोगों ने घर खरीदने का सही मौका देखा और आशियाने का सपना पूरा करने के लिए कदम बढ़ाए.

बिल्डर्स के संगठन CREDAI-पुणे मेट्रो के प्रेसिडेंट अनिल फरांडे का कहना है कि पिछले दो तिमाहियों से रेजिडेंशियल घरों की डिमांड बढ़ी है. ये डिमांड उम्मीद से भी ज्यादा है. कई लोग पहली बार घर ले रहे हैं तो वहीं कई लोग दूसरा या बड़ा घर ले रहे हैं क्योंकि वर्क फ्रॉम की जरूरत है.

उन्हें उम्मीद है कि दूसरी लहर के बावजूद हाउसिंग सेक्टर में डिमांड बढ़ेगी. उन्हें उम्मीद है कि साल 2021 की तीसरी तिमाही से ही रिकवरी देखने को मिल सकती है – जैसे जैसे वैक्सीन ड्राइव बढ़ेगी और मामलों में आई गिरावट आगे भी जारी रहे.

इस समय घर खरीदारों की नजर रेडी-टू-मूव घरों की ओर है.

बने बनाए घरों की डिमांड

एनारॉक की एक रिपोर्ट के मुताबिक NCR में अफोर्डेबल और मिड-सेगमेंट हाउसिग में, 30 फीसदी घर खरीदारों ने रेडी-टू-मूव घरों को चुना है जबकि 60 फीसदी लोगों ने ऐसी प्रॉपर्टी चुनी हैं जो 2 साल से कम में पूरे होने वाल हैं. बस 10 फीसदी ही ऐसे लोग रहे जिन्होंने कंस्ट्रक्शन में 2 साल से ज्यादा समय लगने वाले प्रोजेक्ट में खरीदारी की है. दरअसल, इन दोनों कैटेगरी में रेडी-टू-मूव घरों की संख्या सीमित होने की वजह से लंबे इंतजार वाले घर बुक कराने पड़े हैं.

CREDAI-NCR के प्रेसिडेंट पंकज बजाज का कहना है कि अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट की ओर शिफ्ट दिखने लगा है क्योंकि पहले की इन्वेंट्री बिक चुकी है. दिग्गज डेवलपर्स के पास तैयार प्रोजेक्ट्स नहीं है.



फरांडे के मुताबिक, डेवलपर्स अब सतर्क हो गए हैं और नए लॉन्च को आगे टाल रहे हैं. जिनके पास फाइनेंशियल क्षमता है वो कंस्ट्रक्शन साइट पर काम जारी रख रहे हैं. क्योंकि डिमांड रेडी-टू-मूव घरों की ज्यादा है, हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को पूरा करना बनता है.

वहीं इस दौर में कंस्ट्रक्शन की लागत बढ़ी है – सीमेंट, स्टील जैसी ग्लोबल कमोडिटी की कीमतों में 30 से 70 फीसदी तक की बढ़त आई है. कई बिल्डर्स के मुताबिक, श्रमिकों के पलायन का भी असर देखने को मिला है. ऐसे में सेक्टर को राहत के लिए क्या है इंडस्ट्री की मांग?

इंडस्ट्री की डिमांड

पंकज बजाज कहते हैं कि इंडस्ट्री चाहती है सरकार कंस्ट्रक्शन मेटिरियल पर दिए GST पर इनपुट क्रेडिट की सुविधा बहाल करे. इनपुट क्रेडिट ना देने से कंस्ट्रक्शन पर लागत बढ़ी है जिससे अंततः ग्राहकों पर ही बोझ बनता है.

रियल एस्टेट इंडस्ट्री संगठन NAREDCO के नेशनल प्रेसिडेंट निरंजन हीरानंदानी कहते हैं कि पहली लहर के दौरान अधिकारियों से मदद मिली थी जिनकी फिर से जरूरत है.

उनके मुताबिक रेगुलेटरी डेडलाइन, क्लियरेंस के लिए अधिक समय, ज्यादा से ज्यादा प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए क्रेडिट सपोर्ट और फंडिंग की मदद और अटके प्रोजेक्ट्स की रिकवरी में मदद की जाए ताकि वे NPA ना बन जाएं. वे IBC कानून में भी कुछ ढील की मांग करते हैं.

हीरानंदानी कहते हैं कि इस समय ऐसे राहत के कदम उठाने चाहिए जिससे कोविड-19 की दूसरी लहर से आए निगेटिव असर का मुकाबला किया जा सके. इससे ना सिर्फ इंडस्ट्री बचेगी बल्कि भारत की GDP में भी बढ़त दिखेगी.


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