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संपादकीय

*आज का प्रेरक प्रसंग*

आज का प्रेरक प्रसंग

*पिता का आशीर्वाद!*
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कर्नाटक मै बेंगलुरु के एक व्यापारी की यह सत्य घटना है। जब मृत्यु का समय सन्निकट आया तो पिता ने अपने एकमात्र पुत्र धनपाल को बुलाकर कहा कि..
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बेटा मेरे पास धनसंपत्ति नहीं है कि मैं तुम्हें विरासत में दूं। पर मैंने जीवनभर सच्चाई और प्रामाणिकता से काम किया है।
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तो मैं तुम्हें आशीर्वाद देता हूं कि, तुम जीवन में बहुत सुखी रहोगे और धूल को भी हाथ लगाओगे तो वह सोना बन जायेगी।
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बेटे ने सिर झुकाकर पिताजी के पैर छुए। पिता ने सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया और संतोष से अपने प्राण त्याग कर दिए।
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अब घर का खर्च बेटे धनपाल को संभालना था। उसने एक छोटी सी ठेला गाड़ी पर अपना व्यापार शुरू किया।
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धीरे धीरे व्यापार बढ़ने लगा। एक छोटी सी दुकान ले ली। व्यापार और बढ़ा।
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अब नगर के संपन्न लोगों में उसकी गिनती होने लगी। उसको विश्वास था कि यह सब मेरे पिता के आशीर्वाद का ही फल है।
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क्योंकि, उन्होंने जीवन में दु:ख उठाया, पर कभी धैर्य नहीं छोड़ा, श्रद्धा नहीं छोड़ी, प्रामाणिकता नहीं छोड़ी इसलिए उनकी वाणी में बल था।
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और उनके आशीर्वाद फलीभूत हुए। और मैं सुखी हुआ। उसके मुंह से बारबार यह बात निकलती थी।
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एक दिन एक मित्र ने पूछा: तुम्हारे पिता में इतना बल था, तो वह स्वयं संपन्न क्यों नहीं हुए? सुखी क्यों नहीं हुए?
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धर्मपाल ने कहा: मैं पिता की ताकत की बात नहीं कर रहा हूं। मैं उनके आशीर्वाद की ताकत की बात कर रहा हूं।
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इस प्रकार वह बारबार अपने पिता के आशीर्वाद की बात करता, तो लोगों ने उसका नाम ही रख दिया बाप का आशीर्वाद!
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धर्मपाल को इससे बुरा नहीं लगता, वह कहता कि मैं अपने पिता के आशीर्वाद के काबिल निकलूं, यही चाहता हूं।
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ऐसा करते हुए कई साल बीत गए। वह विदेशों में व्यापार करने लगा। जहां भी व्यापार करता, उससे बहुत लाभ होता।
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एक बार उसके मन में आया, कि मुझे लाभ ही लाभ होता है !! तो मैं एक बार नुकसान का अनुभव करूं।
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तो उसने अपने एक मित्र से पूछा, कि ऐसा व्यापार बताओ कि जिसमें मुझे नुकसान हो।
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मित्र को लगा कि इसको अपनी सफलता का और पैसों का घमंड आ गया है। इसका घमंड दूर करने के लिए इसको ऐसा धंधा बताऊं कि इसको नुकसान ही नुकसान हो।
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तो उसने उसको बताया कि तुम भारत में लौंग खरीदो और जहाज में भरकर अफ्रीका के जंजीबार में जाकर बेचो। धर्मपाल को यह बात ठीक लगी।
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जंजीबार तो लौंग का देश है। वहां से लौंग भारत में लाते हैं और यहां 10-12 गुना भाव पर बेचते हैं।
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भारत में खरीद करके जंजीबार में बेचें, तो साफ नुकसान सामने दिख रहा है।
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परंतु धर्मपाल ने तय किया कि मैं भारत में लौंग खरीद कर, जंजीबार खुद लेकर जाऊंगा। देखूं कि पिता के आशीर्वाद कितना साथ देते हैं।
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नुकसान का अनुभव लेने के लिए उसने भारत में लौंग खरीदे और जहाज में भरकर खुद उनके साथ जंजीबार द्वीप पहुंचा।
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जंजीबार में सुल्तान का राज्य था। धर्मपाल जहाज से उतरकर के और लंबे रेतीले रास्ते पर जा रहा था ! वहां के व्यापारियों से मिलने को।
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उसे सामने से सुल्तान जैसा व्यक्ति पैदल सिपाहियों के साथ आता हुआ दिखाई दिया।
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उसने किसी से पूछा कि, यह कौन है?
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उन्होंने कहा: यह सुल्तान हैं।
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सुल्तान ने उसको सामने देखकर उसका परिचय पूछा। उसने कहा: मैं भारत के गुजरात के खंभात का व्यापारी हूं। और यहां पर व्यापार करने आया हूं।
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सुल्तान ने उसको व्यापारी समझ कर उसका आदर किया और उससे बात करने लगा।
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धर्मपाल ने देखा कि सुल्तान के साथ सैकड़ों सिपाही हैं। परंतु उनके हाथ में तलवार, बंदूक आदि कुछ भी न होकर बड़ी-बड़ी छलनियां है।
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उसको आश्चर्य हुआ। उसने विनम्रता पूर्वक सुल्तान से पूछा: आपके सैनिक इतनी छलनी लेकर के क्यों जा रहे हैं।
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सुल्तान ने हंसकर कहा: बात यह है, कि आज सवेरे मैं समुद्र तट पर घूमने आया था। तब मेरी उंगली में से एक अंगूठी यहां कहीं निकल कर गिर गई।
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अब रेत में अंगूठी कहां गिरी, पता नहीं। तो इसलिए मैं इन सैनिकों को साथ लेकर आया हूं। यह रेत छानकर मेरी अंगूठी उसमें से तलाश करेंगे।
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धर्मपाल ने कहा: अंगूठी बहुत महंगी होगी।
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सुल्तान ने कहा: नहीं! उससे बहुत अधिक कीमत वाली अनगिनत अंगूठी मेरे पास हैं। पर वह अंगूठी एक फकीर का आशीर्वाद है।
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मैं मानता हूं कि मेरी सल्तनत इतनी मजबूत और सुखी उस फकीर के आशीर्वाद से है। इसलिए मेरे मन में उस अंगूठी का मूल्य सल्तनत से भी ज्यादा है।
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इतना कह कर के सुल्तान ने फिर पूछा: बोलो सेठ, इस बार आप क्या माल ले कर आये हो।
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धर्मपाल ने कहा कि: लौंग!
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सुल्तान के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा। यह तो लौंग का ही देश है सेठ। यहां लौंग बेचने आये हो? किसने आपको ऐसी सलाह दी।
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जरूर वह कोई आपका दुश्मन होगा। यहां तो एक पैसे में मुट्ठी भर लोंग मिलते हैं। यहां लोंग को कौन खरीदेगा? और तुम क्या कमाओगे?
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धर्मपाल ने कहा: मुझे यही देखना है, कि यहां भी मुनाफा होता है या नहीं।
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मेरे पिता के आशीर्वाद से आज तक मैंने जो धंधा किया, उसमें मुनाफा ही मुनाफा हुआ। तो अब मैं देखना चाहता हूं कि उनके आशीर्वाद यहां भी फलते हैं या नहीं।
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सुल्तान ने पूछा: पिता के आशीर्वाद? इसका क्या मतलब?
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धर्मपाल ने कहा: मेरे पिता सारे जीवन ईमानदारी और प्रामाणिकता से काम करते रहे। परंतु धन नहीं कमा सकें।
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उन्होंने मरते समय मुझे भगवान का नाम लेकर मेरे सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिए थे, कि तेरे हाथ में धूल भी सोना बन जाएगी।
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ऐसा बोलते-बोलते धर्मपाल नीचे झुका और जमीन की रेत से एक मुट्ठी भरी और सम्राट सुल्तान के सामने मुट्ठी खोलकर उंगलियों के बीच में से रेत नीचे गिराई तो..
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धर्मपाल और सुल्तान दोनों का आश्चर्य का पार नहीं रहा। उसके हाथ में एक हीरेजड़ित अंगूठी थी। यह वही सुल्तान की गुमी हुई अंगूठी थी।
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अंगूठी देखकर सुल्तान बहुत प्रसन्न हो गया। बोला: वाह खुदा आप की करामात का पार नहीं। आप पिता के आशीर्वाद को सच्चा करते हो।
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धर्मपाल ने कहा: फकीर के आशीर्वाद को भी वही परमात्मा सच्चा करता है।
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सुल्तान और खुश हुआ। धर्मपाल को गले लगाया और कहा: मांग सेठ। आज तू जो मांगेगा मैं दूंगा।
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धर्मपाल ने कहा: आप 100 वर्ष तक जीवित रहो और प्रजा का अच्छी तरह से पालन करो। प्रजा सुखी रहे। इसके अलावा मुझे कुछ नहीं चाहिए।
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सुल्तान और अधिक प्रसन्न हो गया। उसने कहा: सेठ तुम्हारा सारा माल में आज खरीदता हूं और तुम्हारी मुंह मांगी कीमत दूंगा।
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इस कहानी से शिक्षा मिलती है, कि पिता के आशीर्वाद हों, तो दुनिया की कोई ताकत कहीं भी तुम्हें पराजित नहीं होने देगी।
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पिता और माता की सेवा का फल निश्चित रूप से मिलता है। आशीर्वाद जैसी और कोई संपत्ति नहीं।
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बालक के मन को जानने वाली मां और भविष्य को संवारने वाले पिता यही दुनिया के दो महान ज्योतिषी है।
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अपने बुजुर्गों का सम्मान करें! यही भगवान की सबसे बड़ी सेवा है।
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*आज का प्रेरक प्रसंग*

कर्मों का फल

एक बार कृष्ण और अर्जुन ब्रह्माण  के भ्रमण पर निकले और ब्रह्माण  के लोगो के कार्यकलापों को देख रहे थे | तभी उनकी नज़र एक हलवाई की दुकान पर पड़ी हलवाई ने पुराना बासा खाना दुकान के पास में इक्कट्ठा कर रखा था | उस खाने के ढेर को देख एक कुत्ता बार- बार उसे खाने आता लेकिन हलवाई उसे पत्थर मार के भगा देता कुत्ता जोर-जोर से रोता और फिर खाने आता उसे फिर हलवाई भगा देता|
यह देख कर अर्जुन को दुःख हो रहा था लेकिन कृष्ण हँस रहे थे | तब अर्जुन ने आश्चर्य से उनके हँसने का कारण पूछा | तब कृष्ण ने कहा – अर्जुन ! यह दूकान एक नामी हलवाई की थी | उसने अपने इस काम से बहुत धन कमाया था पर उसका नौकर चाकर और नाते रिश्तेदारों से बहुत गंदा बर्ताव था | वो सभी की बहुत बेज्जती करता था | ये कुत्ता वही नामी हलवाई हैं और इस दुकान का वर्तमान मालिक उसी का बेटा हैं जो अपने ही पिता को पत्थर मार रहा हैं | ये जो भी इस कुत्ते के साथ हो रहा हैं ये उसके पिछले जन्मों का फल हैं |

 

शिक्षा :-

इन्सान को अपने कर्मों पर विशेष ध्यान देना चाहिए वो हर जन्म में अपने कर्मों का भोग करता ही हैं | कहावत हैं “जो जैसा बोता हैं वैसा ही काटता हैं” इंसान अपने कर्म से बड़ा नहीं होता जब तक उसकी खुद पर विजय नहीं होती वो कभी बड़ा नहीं बन सकता | पूजा धर्मिक आडम्बर व्यर्थ हैं इंसानी धर्म, सात्विक कर्म और मीठे वचन ही जीवन का आधार हैं |
 


मोदी कैबिनेट का विस्तार, कैबिनेट में महिलाओं का दबदबा ,जानें इन महिला मंत्रियों के बारे में

नई दिल्ली। कैबिनेट में फेरबदल और विस्तार में खास बात ये है कि इस बार महिलाओं को खासा प्रतिनिधित्व दिया गया है। बीजेपी आलाकमान ने इस बात का भी ख्याल रखा है कि महिलाओं में भी सभी वर्गों, क्षेत्रों और शैक्षणिक योग्यता के लोगों को मौका दिया जाए। इस कैबिनेट में लाखों की कमाई वाली महिलाएं भी हैं।

अनुप्रिया पटेल-

अनुप्रिया पटेल सोने लाल पटेल की बेटी हैं, जिन्होंने उत्तर प्रदेश में ‘अपना दल’ राजनीतिक पार्टी की स्थापना की थी। उन्होंने मनोविज्ञान में मास्टर्स की डिग्री हासिल की और एमबीए भी किया है। ये मिर्जापुर निर्वाचन क्षेत्र से साल 2014 में लोकसभा के लिए चुनी गई। अनुप्रिया इससे पहले 2012 में वाराणसी संसदीय क्षेत्र के तहत आने वाली विधानसभा सीट रोहनिया से विधायक चुनी गई थीं। 2014 के आम चुनाव में, इनकी पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी के साथ चुनाव प्रचार किया था। इन्होंने भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री का पद भी संभाला। अब मोदी कैबिनेट में इन्हें दुबारा जगह मिली है।

मीनाक्षी लेखी-

नई दिल्ली की मीनाक्षी लेखी ने दिल्ली के हिंदू कॉलेज से बॉटनी में बीएससी करने के बाद डीयू के लॉ सेंटर से एलएलबी की। 1990 से लेखी दिल्ली हाईकोर्ट, कई ट्रिब्यूनल और सुप्रीम कोर्ट में बतौर वकील अपनी प्रतिभा दिखा रही हैं। लेखी के पति अमन लेखी खुद भी सुप्रीम कोर्ट के वकील हैं और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया भी हैं।

डॉ भारती प्रवीण पवार-

डॉ भारती प्रवीण पवार डिंडोरी से बीजपी सांसद हैं। 1978 में जन्मी भारती पेशे से डॉक्टर हैं। इन्होंने पहली बार 2019 में लोकसभा का चुनाव जीता। वैसे नासिक जिला परिषद की सदस्य के रुप में कुपोषण और स्वच्छ पेयजल को लेकर भी इन्होंने काफी काम किया। इन्होंने सर्जरी में MBBS किया है, और जनसेवा में आने से पहले स्थापित डॉक्टर थीं।

शोभा करांदलाजे-

कर्नाटक के उडुप्पी-चिकमंगलुरु से सांसद शोभा करांदलाजे दूसरी बार सांसद चुनी गई हैं। ये कर्नाटक भाजपा की महासचिव भी हैं। इससे पहले कर्नाटक सरकार में बतौर मंत्री पावर, ग्रामीण विकास, पंचायती राज, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति जैसे विभाग संभाल चुकी हैं। इन्होंने सोशियोलॉजी में एमए किया है और ये तीन दशकों से राजनीति में हैं।

दर्शना विक्रम जरदोश-

दर्शना सूरत से सांसद हैं और तीसरी बार लोकसभा के लिए चुनी गईं है। इन्होंने सूरत नगर निगम की पार्षद के तौर पर भी काम किया है। ये आर्ट एंड कल्चर से जुड़े संगठन ‘संस्कृति’ की डायरेक्टर भी हैं। ये 4 दशकों से जनसेवा में हैं और जनता में इनकी काफी अच्छी छवि है।

अन्नपूर्णा देवी-

अन्नपूर्णा देवी कोडरमा से सांसद हैं और पिछले लोकसभा चुनाव में पहली बार सांसद चुनी गईं। इन्होंने इतिहास में मास्टर्स की डिग्री हासिल की और महज 30 साल की उम्र में बिहार सरकार में खनन विभाग का मंत्रालय संभाला। झारखंड सरकार में बतौर मंत्री इन्होंने सिंचाई, महिला एवं बाल विकास जैसे कई विभाग संभाले।

प्रतिमा भौमिक-

प्रतिमा अगरतला की रहनेवाली हैं और त्रिपुरा वेस्ट से पहली बार सांसद चुनी गई हैं। ये बायो-साइंस में ग्रेजुएट हैं। प्रतिमा एक बहुत ही सामान्य परिवार से आती हैं, और खेती-बारी से इनके परिवार का गुजारा चलता है। 


*पूर्णिमा एक नारी शक्ति - आज की प्रेरक प्रसंग*

* आज का प्रेरक प्रसंग *

*!! पूर्णिमा एक नारी शक्ति !!*
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अहिल्याबाई होल्कर सीरियल देखने से पढ़ी-लिखी हो या अशिक्षित, हर महिलाओ के मन में उथल-पुथल मच जाती है! जब मेरे पिता ने मुझे, अपने पहले बच्चे को, एक अच्छे अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में भर्ती कराया, तब उनके दिमाग में अच्छी शिक्षा के माध्यम से ज्ञान के लिए प्यार सबसे प्रमुख था। एक निजी मिशनरी स्कूल की ऊंची फीस ने उन्हें रोका नहीं। जब मैं १०वीं कक्षा में थी और उन्हें इस बात की चिंता थी कि मुझे अपनी उच्च शिक्षा कहाँ से प्राप्त करनी चाहिए, तो मेरी चाची ने लापरवाही से पूछा "श्यामल, जिस तरह का पैसा तुम उस पर खर्च कर रहे हो, क्या उसका कोई मतलब है? क्या यह बेहतर नहीं होता अगर तुम वह पैसा अपने बेटों के लिए सुरक्षित रखते?" मेरे पिता का जवाब था, "मैं अपनी बेटियों और बेटों में कोई अंतर नहीं देखता।"
बंगाल में अपने पैतृक गाँव, सूरमानगर को याद करते हुए, जहाँ कोई स्कूल या बिजली नहीं थी, जब पाँच दशक पहले हम नियमित रूप से वहाँ जाते थे, तो हमने खेती, मछली पकड़ने, गाँव के त्योहारों और औपचारिक शिक्षा से दूर हर तरह की गतिविधियों को देखकर छुट्टियों का भरपूर आनंद लिया। लेकिन एक लड़की थी, हमारी पिशी (बुआ) जिनका नाम पूर्णिमा है और अभी वो छत्तीसगढ़ के रायपुर शहर में रहती हैं, सड़क के उस पार रहती थी, उनका घर हमारे सामने था, जिसे मेरे पिता ने दादा-दादी का खयाल रखने के लिए कहा था। क्योंकि, वहा वही बस थी जो एक कक्षा से दूसरी कक्षा में जा रही थी, अपनी कक्षा में प्रथम स्थान पर थी, प्रतिदिन लगभग 10 मील पैदल चलकर अपने विद्यालय आती-जाती थी। वह एक विधवा मां और एक छोटी बहन के साथ रहती थी, उसके भाइयों ने आजीविका कमाने के लिए घर छोड़ दिया था। वह स्नातक हो गई, अगले शहर बिष्णुपुर में कॉलेज में भाग लेने के लिए, उस स्थान तक पहुंचने के लिए रोजाना बस पकड़ने के लिए मीलों पैदल चलकर जाती थी। हमने उसे एक बार भी क्रोधित, उदास या धैर्य खोये नहीं देखा। गर्मियों में हमने उसे विशाल तालाब में गोता लगाते हुए देखा और सुंदर ढंग से तैरते हुए देखा। मुझे आज तक आश्चर्य है कि उन्होंने यह हुनर ​​किसे सिखा? हालांकि उनका रंग सांवला था, वो अपने नाम पूर्णिमा जैसा चंद की तरह चमकते हुए पढ़ाई की और उस सुदूर गांव में पहली महिला स्नातक बनकर अपना नाम रोशन किया, उनके जीवन में परिस्थिति बहुत विपरित रही पर उन्हों ने कभी हार न मानते हुए लगातार आगे बढ़ते हुए हर परिस्थिति का सामना किया जो की एक नारी शक्ति की प्रेरणा देता है।

*शिक्षा:-*
उपर्युक्त प्रसंग से हमें यह शिक्षा मिलती हैं कि हमें हर परिस्तिथि का सामना करना चाहिए और शुरुआत से ही एक लक्ष्य बनाकर उसी के अनुरूप मेहनत करना चाहिए। इधर-उधर भटकने की बजाय एक ही जगह, एक ही लक्ष्य पर डटे रहने से ही सफलता व उन्नति प्राप्त की जा सकती हैं।

*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।* 

काकोली जी के कलाम से.......


*आज का प्रेरक प्रसंग *

*आज का प्रेरक प्रसंग *

*जीभ का रस *

एक बूढ़ा राहगीर थक कर कहीं टिकने का स्थान खोजने लगा। एक महिला ने उसे अपने बाड़े में ठहरने का स्थान बता दिया। बूढ़ा वहीं चैन से सो गया। सुबह उठने पर उसने आगे चलने से पूर्व सोचा कि यह अच्छी जगह है, यहीं पर खिचड़ी पका ली जाए और फिर उसे खाकर आगे का सफर किया जाए। बूढ़े ने वहीं पड़ी सूखी लकड़ियां इकठ्ठा कीं और ईंटों का चूल्हा बनाकर खिचड़ी पकाने लगा। बटलोई उसने उसी महिला से मांग ली।

बूढ़े राहगीर ने महिला का ध्यान बंटाते हुए कहा, 'एक बात कहूं.? बाड़े का दरवाजा कम चौड़ा है। अगर सामने वाली मोटी भैंस मर जाए तो फिर उसे उठाकर बाहर कैसे ले जाया जाएगा.?' महिला को इस व्यर्थ की कड़वी बात का बुरा तो लगा, पर वह यह सोचकर चुप रह गई कि बुजुर्ग है और फिर कुछ देर बाद जाने ही वाला है, इसके मुंह क्यों लगा जाए।

उधर चूल्हे पर चढ़ी खिचड़ी आधी ही पक पाई थी कि वह महिला किसी काम से बाड़े से होकर गुजरी। इस बार बूढ़ा फिर उससे बोला: 'तुम्हारे हाथों का चूड़ा बहुत कीमती लगता है। यदि तुम विधवा हो गईं तो इसे तोड़ना पड़ेगा। ऐसे तो बहुत नुकसान हो जाएगा.?'

इस बार महिला से सहा न गया। वह भागती हुई आई और उसने बुड्ढे के गमछे में अधपकी खिचड़ी उलट दी। चूल्हे की आग पर पानी डाल दिया। अपनी बटलोई छीन ली और बुड्ढे को धक्के देकर निकाल दिया।

तब बुड्ढे को अपनी भूल का एहसास हुआ। उसने माफी मांगी और आगे बढ़ गया। उसके गमछे से अधपकी खिचड़ी का पानी टपकता रहा और सारे कपड़े उससे खराब होते रहे। रास्ते में लोगों ने पूछा, 'यह सब क्या है.?' बूढ़े ने कहा, 'यह मेरी जीभ का रस टपका है, जिसने पहले तिरस्कार कराया और अब हंसी उड़वा रहा है।'

*शिक्षा:-*
तात्पर्य यह है के पहले तोलें फिर बोलें। चाहे कम बोलें मगर जितना भी बोलें, मधुर बोलें और सोच समझ कर बोलें।

*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।* 


*आज का प्रेरक प्रसंग *

* आज का प्रेरक प्रसंग *

*!! लक्ष्य !!*


एक बार स्वामी विवेकानंद रेल से कहीं जा रहे थे। वह जिस डिब्बे में सफर कर रहे थे, उसी डिब्बे में कुछ अंग्रेज यात्री भी थे। उन अंग्रेजों को साधुओं से बहुत चिढ़ थी। वे साधुओं की भर-पेट निंदा कर रहे थे। साथ वाले साधु यात्री को भी गाली दे रहे थे। उनकी सोच थी कि चूँकि साधू अंग्रेजी नहीं जानते, इसलिए उन अंग्रेजों की बातों को नहीं समझ रहे होंगे। इसलिए उन अंग्रेजो ने आपसी बातचीत में साधुओं को कई बार भला-बुरा कहा। हालांकि उन दिनों की हकीकत भी थी कि अंग्रेजी जानने वाले साधु होते भी नहीं थे।

रास्ते में एक बड़ा स्टेशन आया। उस स्टेशन पर विवेकानंद के स्वागत में हजारों लोग उपस्थित थे, जिनमें विद्वान् एवं अधिकारी भी थे। यहाँ उपस्थित लोगों को सम्बोधित करने के बाद अंग्रेजी में पूछे गए प्रश्नों के उत्तर स्वामीजी अंग्रेजी में ही दे रहे थे। इतनी अच्छी अंग्रेजी बोलते देखकर उन अंग्रेज यात्रियों को सांप सूंघ गया, जो रेल में उनकी बुराई कर रहे थे। अवसर मिलने पर वे विवेकानंद के पास आये और उनसे नम्रतापूर्वक पूछा– आपने हम लोगों की बात सुनी। आपने बुरा माना होगा ?

स्वामीजी ने सहज शालीनता से कहा– “मेरा मस्तिष्क अपने ही कार्यों में इतना अधिक व्यस्त था कि आप लोगों की बात सुनी भी पर उन पर ध्यान देने और उनका बुरा मानने का अवसर ही नहीं मिला।” स्वामीजी की यह जवाब सुनकर अंग्रेजों का सिर शर्म से झुक गया और उन्होंने चरणों में झुककर उनकी शिष्यता स्वीकार कर ली।

*शिक्षा:-*
हमें अपने आसपास कुछ नकारात्मक लोग जरूर मिलेंगे। वे हमें हमारे लक्ष्य से भटकाने की कोशिश करेंगे। लेकिन हमें ऐसे लोगों की बातों पर ध्यान न देकर सदैव अपने लक्ष्य पर ध्यान देना चाहिए।

*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।। 


बात बेबाक

  

चंद्र शेखर शर्मा (पत्रकार) 9425522015
           कश्मीर में घर से बेघर किये गए पंडितों के दर्द , अपने हक की बाट जोहती कश्मीर से बाहर ब्याही गई बेटी, उच्च शिक्षा और स्थायी निवासी का हक पाने पीढ़ियों से तरसता दबा कुचला समाज को आखिरकार 5 अगस्त को आजादी मिल गई । कश्मीर मांगे आजादी  के नारे लगाने वाले जेएनयू की नाजायज संतानो , पाकिस्तान परस्त देशद्रोहियों देखो मोटा भाई ने कश्मीर को 35 A और 370 कि बेड़ियो से आजादी दिला दी अब लगाओ नारे मिल गई आजादी , मिल गई आजादी , भारत माता की जय । एक ऐतिहासिक भूल की सात दशकों से पीड़ा झेलती भारत माता को उसका अभिन्न अंग पूर्णतः मिल गया इसके साथ 5 अगस्त 2019 की तारीख और मोदी - शाह की जोड़ी का नाम भी इतिहास के पन्नो में दर्ज हो गया । एक राष्ट्र - एक संविधान , एक झंडे की परिकल्पना साकार हुई पर आज भी भारत के नाम की पहचान झंडे के तीन रंगों भगवा , सफेद और हरा सरीखी भारत , इंडिया और हिदुस्तान बनी हुई है । कश्मीर के माथे पर लगे 370 और 35A के कलंक से कश्मीरियों की मुक्ति के साथ लोगो मे बह रही राष्ट्रभक्ति की भावना अपने चरम पर है । फेसबुकिया और सोशल मीडिया वीर एक से एक नारे , गीत , गजल, वेडिओ , फ़ोटो शेयर कर रहे है । कश्मीर की आजादी का जश्न जितना राष्ट्र भक्त मना रहे है उससे ज्यादा पुरुष वादी सोच और नारी को अपनी पैरों की जूती समझने वाला समाज भी मना रहा है । कश्मीर की आजादी के बहाने हम भारतीयों की घटिया मानसिकता और सोच भी आज आजाद हो समाज के सामने आई है । नारी को देवी के रूप में पूजने वाले देश मे 14 साल के किशोर से लेकर कब्र में पैर लटकाए 80 साल के बूढ़े तक कश्मीर में औरतों को लेकर जिस तरह कमेंट्स कर चुटकुले बनाते बरात ले जाने लालायित है । उससे लगता है कश्मीरयो को तो बरात का स्वागत पान पराग से करने की तैयारी कर लेनी चाहिए। सोशल मीडिया की पोस्ट से मैं सोचने पर मजबूर हूँ कि इनके परिवार की महिलाएँ , बेटियां, बहने, माँये क्या जानती हैं कि उनके घर मे एक बलात्कारी पल रहा है ? कश्मीर की आजादी के साथ ही सोशल मीडिया में लाखों जॉम्बी (हवसी) नजर आने लगे जो अपनी भूख मिटाने अब कश्मीर जाना चाहते हैं। ये भारत माता की जय के साथ कश्मीरी महिलाओं को नोच खाना चाहते हैं । कश्मीर को 35A और 370 से मुक्ति मिली है कोई
युद्ध नही जीता गया है कि अब लूट लो लड़कियाँ । कश्मीर की आजादी के बहाने लोगो को नारी समाज के प्रति अपनी घटिया सोच और  बलात्कारी मानसिकता सामने लाने का मौका जरूर मिला है ।
और अंत मे :- 
मेरी कलम का चरित्र खराब हो गया है ,
इसलिए कुछ लिखूंगा नहीं ।
तुम बस समझ लेना ,
मैं वहीं हूँ अब भी ।।
#जय_हो 6 अगस्त 2019 कवर्धा (छत्तीसगढ़)

पानी के अंदर रूबिक क्यूब सॉल्व कर बनाया गिनीज बुक रिकॉर्ड

 मुंबई के रहने वाले 20 साल के तैराक चिन्मय प्रभु ने पानी के भीतर 9 खंडों वाले रूबिक क्यूब की गुत्थी सुलझाकर अपना नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराया है. रूबि‍क क्यूब को एक आकार में लाकर सेट करना आसान नहीं है. वो भी पानी के भीतर इसे करना तो और भी कठिन हो जाता है. लेकिन चिन्मय के रूबिक के शौक ने उन्हें अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिला दी है. पिरामिड के आकार के रूबिक क्यूब को पूल के भीतर पानी में एक मिनट 48 सेकेंड रहकर चिन्मय ने सेट कर दिया. इस पूरी प्रक्रिया को रिकॉर्ड करके गिनीज बुक के लिए बीते साल दिसंबर में भेजा गया था, जिसके बाद उन्हें इसी साल मार्च में इसके लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड मिला है.


जामिया की पहली महिला कुलपति नजमा अख्तर होंगी सम्मानित

 जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी की पहली महिला वाइस-चांसलर (कुलपति) प्रोफेसर नजमा अख्तर को 26 मई को यूनिवर्सिटी में सम्मानित किया जाएगा. अप्रैल 2019 में प्रो. नजमा ने यूनिवर्सिटी के कुलपति पद का पद्भार संभाला था. उनसे पहले तलत अहमद जामिया के कुलपति थे. बता दें कि प्रो. नजमा जामिया की पहली महिला कुलपति हैं. उनसे पहले मणिपुर की राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला जामिया की कुलाधिपति नियुक्त की जा चुकी हैं.


गर्मियों में इस रंग के कपड़े पहनने से मिलेगी राहत, चिलचिलाती धूप में रहेंगे कूल

 चिलचिलाती धूप में घर से बाहर निकलना काफी मुश्किल हो जाता है. टेंपरेचर 40 डिग्री के पार जाते ही लोग सड़कों पर तिलमालाने लगते हैं. दिल्ली-एनसीआर जैसी जगहों पर तो खुद को गर्मी से बचाए रखना और भी ज्यादा मुश्किल हो जाता है. ऐसे में आपको न सिर्फ कपड़ों की क्वालिटी ध्यान में रखकर उन्हें पहनना चाहिए, बल्कि रंगों का भी विशेष ख्याल रखना चाहिए.