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ज्ञान विज्ञान

*जानिए क्या है पथरी स्टोन होने के कारण, कैसे ऐसे बचा जाए*

stone पथरी की बीमारी आज कल कॉमन होती जा रही है, बहुत से लोग इस बीमारी का सामना कर रहें है, हर उम्र के लोगों में पथरी की बीमारी आम है। चाहे बच्चों की बात करे या बूढ़ो की गलत खान-पान की वजह से पथरी किसी को भी हो सकती है।



जानिये क्या है पथरी stone होने के कारण-

शरीर में पानी की कमी होना- पानी की कमी,गुर्दे की पथरी(kidney stone)का प्रमुख कारण है।यदि आप ज़रुरत से कम पानी पीते है तो आपको किडनी की पथरी की समस्या हो सकती है, शरीर में पानी की कमी से कीडनी की पथरी बनती है जो की बहुत दर्दनाक हो सकती है, इसलिए ध्यान रखें की आप दिन में 6-8 गिलास पानी पिए।
गलत खान-पान का होना – अगर आप खाने में नमक और चीनी की मात्रा अधिक लेते है तो आप को (kidney stone) का खतरा हो सकता है, इस से बचने के लिए आपको खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए और आहर संतुलित मात्रा में लेना चाहिए।
मोटापा- अगर आपका BMI (Body Mass Index) ज़्यादा है तो आप को पथरी का खतर हो सकता है, ऐसे में आपके आपना मोटापा कम करना चाहिए।
विटामिन ‘सी’ या कैल्शियम वाली दवाओं का अधिक सेवन करना- यदि आप ने विटामिन ‘सी’(vitamin C) या कैल्शियम ( Calcium) की दवाईयों का अधिक सेवन किया है तो आपको कीडनी की पथरी हो सकती है। ज़्यादा समय तक विटामिन की खुराक या दवाई खाने से खून और यूरिन में कैल्शियम की मात्रा बढ़ जाती है, जिसे पथरी होने का खतरा बढ़ जाता है।

क्या है लक्षण –

दर्द बहुत ज़्यादा होना , चलने और बैठने में मुश्किल होना।
दर्द का साथ-साथ उल्टी ( vomiting)होना।
दर्द के साथ ठंड लगना और बुखार आना।
यूरिन में खून आना।
यूरिन सही से ना आना।


क्या ना खाएं –

पथरी की बीमारी में विटामिन – सी को खाने से बचें ,जैसे पालक , टमाटर, चॉकलेट, बैगंन, आदि ना खाये ।
कोल्ड ड्रिंक और कैफीन का सेवन ना करें,
ज़्यादा नमक का सवेन ना करें।
बाहर का तला हुआ (fried) ना खाएं।
क्या खाएं–

पथरी की बीमारी में तरल पदार्थ का ज़्यादा से ज़्यादा सेवन करे।
विटामीन –डी की मात्रा भोजन मे ज़्यादा रखें।
तुलसी का भी सेवन करें। 


*किडनी कैंसर से बचना है तो इन आदतों को छोड़ना पड़ेंगे।*

kidney cancer- किडनी शरीर का वह अंग जिसके बिना एक सुखमय जीवन व्यापन करना बहुत मुश्किल है| मानव शरीर में दो किडनियां होती हैं, अगर उन में से एक किडनी खराब भी हो जाए तो इंसान जिन्दा रह सकता है लेकिन आपकी कुछ गलत आदतों के चलते दोनों ही किडनियां खराब हो जाती हैं व जानलेवा कैंसर kidney cancer जैसी बीमारी को भी जन्म देती हैं| आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आपकी इन आदतों से किडनी का कैंसर बढ़ जाता है:-


धूम्रपान

धूम्रपान की अधिक लत के कारण लोगों में किडनी के कैंसर kidney cancer का खतरा बढ़ जाता है| धूम्रपान का सीधा प्रभाव मनुष्य की किडनी पर पड़ता है| किडनी कैंसर के अधिकतर रोगी वह पाये जाते हैं जिन लोगों ने धूम्रपान को अपनी जीवनशैली का एक मुख्य हिस्सा बना लिया है| धूम्रपान जो कर रहा है और साथ में जिसके ऊपर उस जानलेवा धुएँ का असर पढ़ रहा है भविष्य में धूम्रपान उन दोनों के लिए हानिकारक साबित होता है|

 

शराब का सेवन

किडनी के कैंसर का एक और मुख्य कारण है अधिक शराब का सेवन करना| शराब की लत से किडनी की सेहत पर विपरीत असर पड़ने लगता है जिससे किडनी पर कैंसर का प्रभाव दिखने लगता है और मरीज को कैंसर की बीमारी झेलनी पड़ती है|

 

दूषित खान पिन

किडनी में समस्या का एक और कारण है गलत भोजन का सेवन करना| आज के समय में लोग घर के भोजन की अपेक्षा बाहर होटलों, ढाबों का खाना ज्यादा पसंद करते हैं व उसे अपनी आदत बना लेते हैं| जिससे कुछ समय के बाद किडनी पर बुरा प्रभाव दिखना शुरू हो जाता है और मनुष्य की यह आदत कैंसर की बीमारी को जन्म देती है|

 

गलत जीवनशैली

गलत तरीके से जीवन व्यापन करने की आदत से भी किडनी में कैंसर kidney cancer होने की समस्या उत्पन्न होती है| गलत जीवन शैली के चलते इंसान का वजन बढ़ने लगता है और मोटापा बढ़ जाता है| एक अध्ययन के अनुसार पाया गया है कि गलत जीवमशैली की वजह से अधिकतर लोगों को किडनी का कैंसर होता है|

 

बेवजह दवाइयों का सेवन

कई लोगों में छोटी मोटी बीमारी में दवाइयों का सेवन करने की आदत होती है| जिसके परिणाम कुछ समय के लिए तो लाभकारी लगते हैं परन्तु भविष्य में वह कैंसर जैसी बीमारियां पैदा कर देती हैं| क्योंकि दवाइयों का सीधा प्रभाव मानव शरीर की किडनी पर पड़ता है व कुछ दवाइयां एलर्जी कर देती हैं और अंत में रोगी कैंसर का शिकार हो जाता है| 


*जानिए अंक ज्योतिष के बारे में*

*अंक ज्योतिष*

Numerology या अंक शास्त्र से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अंग है. अंग्रजी में इसे न्यूमरॉलजी कहा जाता है. गणितीय गणना द्वारा अंको के माध्यम से व्यक्ति या जातक के गुण, इच्छा, स्वास्थ्य, दर्शन करियर इत्यादि रूप में आकलन किया जा सकता है.
ज्योतिष में मुख्य रूप से ९ ग्रह प्रमुख माने जाते है, इसी प्रकार से १ से ९ ही अंकशास्त्र में महत्वपूर्ण अंक होते है. संसार की सारी गणना अंको में ही गिनी जाती है. साल, महीना, दिन, घंटे, मिनट, आकार, वजन, आयु, समय, इत्यादि संसार की सभी प्रकार की गणना अंको के माध्यम से की जाती है, इसलिए संसार पर अंक राज करते है, ऐसा कहा गया, तो यह गलत नहीं होगा.

 

*अंक ज्योतिष का इतिहास*

आज से लगभग दस हजार पूर्व मिस्र के लोग इसका का प्रयोग करते थे. मिस्र के प्रसिद्द गणित तज्ञ पायथागोरस ने इसकी उपलब्धी बताई थी. सबसे प्राचीन अंक शास्त्र का प्रयोग भारत, चीन, मिस्र, ग्रीक, और हिब्रू में किया जाता था. हिब्रू में अधिक रूप से अंकशास्त्र का विकास हुआ.

 

*अंक ज्योतिषीय गणित*
१ से लेकर ९ तक के अंको पर अलग अलग ग्रहों का प्रभाव होता है. वैदिक ज्योतिष में जातक पर जैसे लग्न कुंडली, और चंद्र कुंडली का प्रभाव देखने को मिलता है, वैसे ही अंक ज्योतिष में मूलांक, भाग्यांक इनका प्रभाव व्यक्ति पर दिखाई देता है.

 

*अंक ज्योतिष में ज्योतिष मूलांक :*

अगर जातक के जन्म तिथि के अंकों को मिलाया जाए तो उसमे जो आखरी अंक आता है, उसे मूलांक कहा जाता है. जैसे किसी जातक की जन्म तारीख २९ है, तो उस जातक का मूलांक २+९= ११, १+१=२ मतलब २ मूलांक होगा.

 

*अंक ज्योतिष में भाग्यांक :*

अगर जातक के जन्म तिथि सहित महीना और साल के अंकों को मिलाया जाए तो उसमे जो आखरी अंक आएगा, उसे भाग्यांक कहा जाता है. जैसे किसी जातक की जन्म तारीख २९ मई १९८५ है, तो उस जातक का भाग्यांक २+९+०+५+१+९+८+५=३९ यानि ३+९=१२ मतलब ३ मूलांक होगा.

 

*अंक ज्योतिष का उपयोग*
आज दुनियामे कई बड़ी हस्तिया अंक ज्योतिष का उपयोग कर अपना नाम, व्यापार, यश पाने में बढ़त हासिल कर रहे है. एकता कपूर से लेकर कारण जोहर तक अंक शास्त्र का उपयोग करते नजर आते है. अपने नामो में बदलाव, वास्तु की रचना लोग अपने भाग्यांक अनुसार करते नजर आते है. 


*कोरोना वायरस-:आइए जाने डेल्टा प्लस वैरिएंट के बारे में कितना खतरनाक है ये।*

कोरोना वायरस संक्रमण के लिए जिम्मेदार डेल्टा प्लस वैरिएंट को वैरिएंट ऑफ कर्सन नामित किए जाने के बाद इस पर चर्चा काफी तेज हो गई है। वैरिएंट ऑफ कर्सन वायरस के ऐसे रूप को कहा जाता है जो तेजी से फैल रहा हो और आने वाले समय में चिंता खड़ी कर सकता हो। हालांकि, कई एक्सपर्ट का कहना है कि डेल्टा प्लस की वजह से अभी पैनिक होने की जरूरत नहीं है। पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट और महामारी एक्सपर्ट के. श्रीकांत रेड्डी ने कोरोना वायरस के डेल्टा प्लस वैरिएंट की मौजूदा स्थिति, उस पर वैक्सीनेशन का प्रभाव, संक्रमण बढ़ने और उससे बचाव को लेकर विस्तार से बताया है।



भारत समेत दुनिया भर में डेल्टा के कुछ ही केस--


भारत में दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार माना जा रहा डेल्टा वैरिएंट दुनिया के 85 देशों में पहुंच चुका है और 11 इलाकों में तो इसके मामले बीते दो हफ्तों में ही सामने आए हैं। यह बात विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कोविड पर 22 जून को जारी अपने अपडेट में कही है। ऐसे में बाकी वैरिएंट के मुकाबले डेल्टा के हावी होने की आशंका जताई है। वहीं, डेल्टा प्लस के भारत समेत अन्य देशों में कुछ ही मामले सामने आए हैं।



डेल्टा प्लस वैरिएंट पर वैक्सीन कितनी प्रभावी--


डेल्टा प्लस वैरिएंट पर वैक्सीन कितनी प्रभावी है इसको लेकर भारत में आईसीएमआर अभी स्टडी कर रहा है। हालांकि, डेल्टा प्लस वैरिएंट पर वैक्सीन का असर जानने के लिए अधिक डाटा की जरूरत होगी। चूंकि, दुनियाभर में अभी डेल्टा प्लस संक्रमण के मामले अभी काफी कम हैं ऐसे में इस पर वैक्सीन के प्रभाव का पता लगाने में अभी समय लगेगा। अभी इस बात के कोई सबूत नहीं है कि इसका संक्रमण बढ़ रहा है।

इस तरह से होगा संक्रमण से बचाव--


महामारी एक्सपर्ट रेड्डी का कहना है कि कोरोना वायरस के किसी वैरिएंट के संक्रमण से बचाव के लिए मास्क का प्रयोग करना, भीड़भाड़ वाली जगहों में जाने से बचना और वैक्सीनेशन के जरिए इम्यूनिटी हासिल करना जरूरी है। इससे वायरस के संक्रमण की आशंका बहुत कम हो जाएगी। वायरस मुख्य रूप से नाक, मुंह और आंखों के जरिये हमारे शरीर में प्रवेश करते हैं। यदि वायरस के संक्रमण के लिए जगह नहीं मिलेगी तो वह धीरे-धीरे निष्क्रिय हो जाएगा। ऐसे में अधिक से अधिक वैक्सीनेशन और कोविड गाइडलाइन्स के अनुरूप व्यवहार से ही संक्रमण से बचा जा सकता है।



वैक्सीनेशन तेज करना होगा, गंभीर बीमारी से सुरक्षाषा--

डॉ. रेड्डी के अनुसार हमे वर्तमान में वैक्सीन से सुरक्षा का फायदा उठाने के लिए वैक्सीनेशन को तेज करना होगा। भले ही अल्फा वैरिएंट के मुकाबले डेल्टा वैरिएंट पर वैक्सीन का प्रभाव कम है लेकिन मौजूदा वैक्सीन गंभीर बीमारी और मौत से बचाव कर रही हैं। वैक्सीन का असर उसी सूरत में कम होता है जब एंटीबॉडी को मात देकर प्रोटीन सतह पर विकसित होता हुआ अपने स्वरूप में बदलाव करने में सक्षम होता है। 


नाखून में दिखने वाले आधे चांद को हल्के में न लें, तुरंत चेक करें अपनी उंगलियां और पता लगाएं कि आपके शरीर में क्या दिक्कतें हैं

आपने कई बार देखा होगा कि डॉक्टर या वैद्य हमारे शरीर को बाहर से देखकर की कई समस्याओं के बारे में बता देते हैं. फिर हमें लगता है कि आखिरी डॉक्टर या वैद्य को कैसे मालूम कि हमें ये दिक्कत है, जबकि उन्होंने तो हमारी समस्याओं का पता लगाने के लिए कोई टेस्ट भी नहीं किया होता. दरअसल, हमारा शरीर किसी भी प्रकार की दिक्कत होने पर अलग-अलग तरह से रिएक्ट करता है. इस वजह से हमारे शरीर में तरह-तरह के बदलाव होते रहते हैं. इन बदलावों को देखकर ही डॉक्टर या वैद्य हमारी कई दिक्कतों को बिना टेस्ट किए ही पकड़ लेते हैं. इसी सिलसिले में आज हम आपको हमारे शरीर में होने वाले एक ऐसे बदलाव के बारे में बताने जा रहे हैं, जो काफी महत्वपूर्ण है. यह बदलाव हमारे शरीर में होने वाली कई दिक्कतों के बारे में संकेत देते हैं, जिन्हें नजरअंदाज न करते हुए तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. उंगलियों की नाजुक त्वचा की सुरक्षा करता है नाखून हमारे नाखून हमारी उंगलियों को जबरदस्त सुरक्षा प्रदान करते हैं. नाखून के नीचे होने वाली त्वचा काफी नाजुक होती है और इसकी सुरक्षा बहुत जरूरी है. ऐसे में नाखून ही हमारी उंगलियों की नाजुक त्वचा की सुरक्षा करता है. अलग-अलग इंसान के नाखून भी अलग-अलग तरह के होते हैं. किसी के नाखून बहुत सख्त होते हैं तो किसी के नाखुन बिल्कुल साफ और मुलायम होते हैं. कई लोगों के नाखून तो हमेशा टूटते भी रहते हैं. इसके अलावा कोई लोगों के नाखून पर आधा चांद भी बना होता है. आज हम आपको नाखून के नीचे बनने वाले इसी आधे चांद के बारे में बताने जा रहे हैं कि ये हमारे स्वास्थ्य के लिए कितना अहम है? नाखून पर बना आधा चांद बताते हैं हमारा स्वास्थ्य पहले तो आप अपने हाथ के नाखूनों को चेक कीजिए और देखिए कि आपके नाखून के नीचे भी आधा चांद बना हुआ है. नाखून में बना होने वाला ये चांद हमारे स्वास्थ्य को लेकर कई तरह के संकेत देता है. अगर नाखून में बना आधा चांद सफेद और साफ है तो समझिए आप बिल्कुल ठीक और स्वस्थ हैं. आमतौर पर अंगूठे पर बना चांद बिल्कुल साफ दिखाई देता है जबकि अन्य उंगलियों पर ये हल्का, बहुत हल्का या फिर न के बराबर दिखाई देता है. ये चांद आपके हाथों की जितनी ज्यादा उंगलियों पर दिखाई देगा मतलब समझिए वह उतना स्वस्थ है. नाखून पर दिखाई देने वाले ऐसे आधे चांद को लुनुला (Lunula) कहा जाता है. लुनुला न होना मतलब खराब स्वास्थ्य जिन लोगों के नाखून में ये लुनुला बिल्कुल नहीं दिखाई देता तो ये चिंता का विषय हो सकता है. दरअसल, शरीर में खून की कमी की वजह से लुनुला नहीं दिखाई देता. इसके अलावा यदि किसी व्यक्ति के नाखून में दिखने वाला लुनुला सफेद के बजाए पीला या नीला दिखे तो मतलब वह डायबिटीज का भी शिकार हो सकता है. इतना ही नहीं, कई लोगों में लुनुला का रंग लाल पाया जाता है. ऐसे लोगों को हृदय से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं. लुनुला के बारे में आपको इतना समझना होगा कि यदि ये सफेद रंग का है तो ठीक है. इसके अलावा ये आपके नाखून में नहीं है या फिर सफेद के अलावा किसी और रंग का है तो आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए.

*कोरोना संक्रमण से बचाव आवश्यक क्यों,कितना खतरनाक है,उपाय क्या क्या है और लॉकडाउन में क्या क्या करे-एचपी जोशी*

आज महामारी कोरोना के संक्रमण से लगभग पूरी दुनिया प्रभावित है, संसार के सारे देश कोरोना से लड़ाई लड़ने की अथक प्रयास कर रहे हैं। सारे विश्व के वैज्ञानिक, चिकित्सक, फार्मासिस्ट, पैथोलोजिस्ट, सरकार, सेना, सशस्त्रबल और पुलिस पूरी ईमानदारी, निष्ठा और समर्पित भाव से अपनी पूरी ताकत कोरोना से लड़ाई में झोंक रहे हैं। इसमें समाजसेवी संगठन और दानदाताओं का भी अच्छा योगदान है जो जरूरतमंद लोगों के आवश्यता को पूरा करने में बिना व्यक्तिगत स्वार्थ के लगे हुए हैं।

सरकारें आम नागरिकों से उनके और उनके परिवार की सुरक्षा के लिए केवल एक ही सहयोग चाह रहे हैं कि वे अपने घरों में ही रहें, अत्यंत आवश्यक हो तभी आवश्यक सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए घर से निकलें। अर्थात जब घर से निकलें तो मास्क, रुमाल अथवा गमछे से मुह और नाक को ढकें, हाथों में सेनेटाइजर लगाएं, किसी भी शर्त में दूसरे व्यक्ति से प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष फिजिकल संपर्क से बचें। यदि आप अधिक समय के लिए घर से निकल रहे हों तो सेनेटाइजर अपने जेब में ही रख लें और बार बार सेनेटाइजर से हाथ धोएं; व्यर्थ ही किसी भी वस्तु को स्पर्श करने से बचें। क्योंकि यही उपाय आपको और आपके परिवार को कोरोना वायरस के संक्रमण से बचा सकते हैं। हालांकि ऐसा कोई शोध सामने नही आया है जिसमें यह बोला गया हो कि पशु पक्षियों से भी कोरोना संकमण का फैलाव हो सकता है, इसके बावजूद आपको एहतियात के रूप में इनसे भी फिजिकल डिस्टेंस बनाने की जरूरत है; क्या पता आप जिस पशु पक्षियों को छू रहे हैं वह किसी कोरोना संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आया हो।

अभी तक ज्ञात रिसर्च के अनुसार "कोरोना संक्रमण का फैलाव हवा से नहीं होता।" यह मानवता की जीत के लिए अत्यंत सकारात्मक है इसलिए इसके संक्रमण पर आसानी से रोक लगाया जा सकता है। केवल जरूरत है तो सरकारों के दिशा निर्देश का पालन करते हुए फिजिकल डिस्टेंस के सिद्धान्तों का पालन करने की।

एक वेबसाइट में संकलित जानकारी के अनुसार आज 16/4 के 7 बजे तक दुनियाभर के लगभग 20 लाख लोग कोरोना के चपेट में आ चुके हैं, जिसमें से 1.34 लाख लोगों की मृत्यु हो चुकी है; वहीं लगभग 5.10 लाख लोग उपचार के बाद स्वस्थ्य हो चुके हैं। ये आंकड़े हमें गहराई से सोचने और सुरक्षित रहने को मजबूर करती है। इसलिए आपसे अनुरोध है सरकार के दिशा निर्देश का पालन करें और घर मे ही सुरक्षित रहें। यदि सरकार के दिशा निर्देश का पालन नही किया जाता है, यदि फिजिकल डिस्टेंस के सिद्धांत और सरकार द्वारा सुरक्षा मापदंड का उल्लंघन किया जाता है तो वह दिन दूर नही जब सन 1346-1353 की "प्लेग" से भी खतरनाक परिणाम भुगतने के लिए हम मजबूर होंगे; प्राप्त जानकारी के अनुसार महामारी प्लेग, मानवता को 7साल तक समाप्त करने का प्रयास करते हुए दुनियाभर से लगभग 7 से 20 करोड़ लोगों को मौत के मुह में ढकेल दी थी। दूसरी सबसे बड़ी महामारी थी "स्पेनिश फ्लू" जो लगभग 1918-1920 में आई थी, जो 3साल में अपने साथ 5करोड़ लोगों को मार डाली थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बहुत जल्द ही कोरोना का टीका खोज लिया जाएगा, तो भी टेस्टिंग, निर्माण और टीकाकरण करने में साल भर से कम नहीं लगेगा।

आज जरूरत है तो केवल:-
1- शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाए रखने की।
2- लक्षण दिखाई देने पर तत्काल एहतियात बरतने और उपचार के लिए कोरोना अस्पतालों जाने की।
3- न्यूनतम आवश्यक वस्तुओं का उपयोग करते हुए घर में ही रहने की।
4- प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष फिजिकल डिस्टेंस बनाने की।
4- यदि किसी अत्यावश्यक काम से बाहर निकलना पड़े तो मास्क, रुमाल या गमछे से नाक और मुह को ढकें, हाथ में सेनेटाइजर लगाएं। अधिक समय तक यदि आपको घर से बाहर रहने की जरूरत है तो सेनेटाइजर अपने जेब में रखें और समय समय में लगाते रहें।
5- पारिवारिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन पर रोक लगाएं।
6- केवल सरकार के दिशा निर्देश पर ध्यान दें। अन्य स्त्रोत से प्राप्त जानकारी अफ़वाह हो सकती है, इसलिए इससे बचें; क्योंकि अफ़वाह हमेशा घातक होता है।
7- कोरोना के संबंध में सोशल मीडिया अथवा किसी अन्य माध्यम से प्राप्त जानकारी को शेयर करने से बचें; यदि आपके पास पर्याप्त कारण हो कि यह जानकारी सरकार द्वारा दी गई है तभी अन्य व्यक्ति को शेयर करें।
8- आपसे निवेदन है कि यदि आप सक्षम हों तो सरकार के रिलीफ फण्ड में दान करें अथवा अपने आसपास के जरूरत मंदों की सहायता करें; यदि आप मकान मालिक हैं तो किराएदार को किराए के लिए परेशान न करें, यदि आप सक्षम दुकानदार हैं तो आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को पुराने उधारी चुकाने के लिए मजबूर न करें बल्कि जरूरत के आधार पर कम से कम अतिआवश्यक सामग्री उन्हें उधारी भी दें।
9- लॉक डाउन के दौरान समय का सदुपयोग करें, पूरे परिवार मिलकर चर्चा करें, अपने अनुभव शेयर करें, Books पढ़ें, Online माध्यम से कुछ सीखें, शिक्षा ग्रहण करें।
10- शिक्षकों और विशेषज्ञों से अनुरोध है कि वे यूट्यूब चैनल, फेसबुक लाइव इत्यादि के माध्यम से अपने स्टूडेंट्स के लिए काम करते रहें। छत्तीसगढ़ के शिक्षक सरकारी वेबसाइट CGSchool.in में अपना योगदान दें।
11- क्लास 1 से 12 के स्टूडेंट्स यूट्यूब में Bodhaguru चैनल के माध्यम से अपना पढ़ाई जारी रखें, छत्तीसगढ़ के स्टूडेंट्स cgschool में जाकर भी अपना पढ़ाई जारी रख सकते हैं।
12- प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए भी अनेकों यूट्यूब चैनल हैं जिसके माध्यम से आप अपना तैयारी जारी रख सकते हैं।
13- संविधान और केंद्रीय व राज्य सरकार द्वारा लागू अधिनियम और नियमों का अध्ययन करें; आप चाहें तो साहित्य भी पढ़ सकते हैं।
14- स्वस्थ और निरोगी रहने के लिए पूरे परिवार मिकलर घर अथवा आंगन में ही योग और व्यायाम करें; ऐसा न भी करें तो आंगन, छत अथवा बालकनी में जाकर शरीर को धूप जरूर दें।
15- आज इतने बड़े संकट के बावजूद जो आपके सुरक्षा में लगे हैं, अर्थात चिकित्साकर्मी, सेना, अर्धसैनिक बल, पुलिसकर्मी, किसान और वैज्ञानिक यही सही मायने में ईश्वर हैं इनका आजीवन सम्मान करने का संकल्प लें।
16- सरकार सदैव कल्याणकारी होती है इसे स्वीकार करें और हैसियत के अनुसार सरकार का सहयोग करें।
17- मूलभूत आवश्यकताओं के अलावा अतिरिक्त्त चीजों के उपयोग में कमी लाने का संकल्प लें।
18- स्वच्छ वायु, स्वच्छ जल, भोजन, साफ सुथरे कपड़े और आवास, दाल चावल सब्जी रोटी जैसे भोज्य पदार्थ, चिकित्सालय और चिकित्साकर्मी, स्कूल कॉलेज और शिक्षक, वैज्ञानिक, विद्युत और जल आपूर्ति में लगे लोग, वैज्ञानिक, सेना, अर्धसैनिक बल, पुलिस, सरकार और समाजसेवी संगठन, इत्यादि आवश्यक हैं।
19- मानवता सर्वोपरि है। यदि जाति, वर्ण, धर्म, सीमा और धार्मिक स्थल यदि मानवता के खिलाफ हो जाएं तो इसका त्याग करें।
20- घर में रहें, जिंदा रहें। 


*धर्म से जुड़ी कुछ उपयोगी बाते,प्रत्येक मनुष्य को जानना चाहिए-नवीन दर्शन पर आधारित लेख:एच.पी.जोशी*

हमें धर्म से जुडी उपयोगी बातें जानने के पहले धर्म से संबंधित कुछ परिभाषाओं का अध्ययन कर लेना चाहिए, ताकि धर्म को समझने में हमें आसानी हो।

धर्म क्या है ?
मूलतः धर्म जीवन जीने का तरीका मात्र है, धर्म एक मार्गदर्शी सिद्धांत है जो अपने अनुयायियों को अच्छे और उत्कृष्ट जीवन के लिए मार्ग प्रशस्त करता है। धर्म के माध्यम से संस्थापक का संदेश होता है कि धर्म के फलां-फलां लक्ष्य है, जीवन का फलां-फलां उद्देश्य है और अनुयायियों का इस मार्गदर्शी सिद्धांत के अनुरूप जीवन जीना उचित होगा - माता श्यामा देवी

यदि धर्म महान सिद्धांत हैं और अच्छे जीवन जीने का कला है तब दो धर्म के बीच संघर्ष के क्या कारण हैं?
निःसंदेह धर्म जीवन जीने का बेहतर तरीका है परन्तु पिछले सैकडों वर्षों से एक परम्परा बन गई है कि धार्मिक सिद्धांत, धार्मिक पुस्तकों और धर्मग्रंथ के नाम पर कोई भी अदार्शनिक व्यक्ति एक विवादित लेख, विचार अथवा पुस्तक के माध्यम से स्वयं को स्थापित कर लेता है जिसके परिणामस्वरूप धर्म का मार्ग परिवर्तित होकर अपनी मूल भावना से भटक जाती है। यही कुटिलता दो अलग-अलग धर्म के बीच खुनी संघर्ष का कारण बनता जाता है - श्री हुलेश्वर जोशी

अनेकोनेक धर्म बनने के क्या कारण हैं?
मौजूदा धर्म के सिद्धांत से अलग विचारधारा रखने वाले सम्प्रभुत्व संपन्न धार्मिक अथवा दार्शनिक नेताओं द्वारा मौजूदा धर्म से श्रेष्ठ और अच्छे जीवन दर्शन की कल्पना करना ही धर्म के उत्पत्ति का कारण है।

तो क्या मौजूदा धर्म के बाद स्थापित धर्म उससे अधिक अच्छी जीवन दर्शन प्रस्तुत करती होगी?
निःसंदेह, होना तो यही चाहिए। परन्तु यह उनके अनुयायियों के उपर भी निर्भर करता है कि वे कब तक अपने धार्मिक सिद्धांत के अनुरूप चल सकते हैं? कितना जल्दी वे पुरानी अनुपयोगी परम्पराओं को समाप्त कर देते हैं और कितने जल्दी नवीन वैज्ञानिक सोच को स्वीकार कर लेते हैं।

मौजूदा धर्म में सबसे श्रेष्ठ जीवन दर्शन किस धर्म में विद्यमान है?
यह अत्यंत सरल प्रश्न हैं परन्तु इसका उत्तर कहीं उससे अधिक कठीन है। मेरा ही नही वरन् अधिकांश धर्मनिरपेक्ष बुद्धजीवियों का मानना है कि कोई भी धर्म आपस में महान अथवा उंच या निम्न कोटि का नही होता है। यह उनके अनुयायियों का एक कल्पना मात्र है कि उसका धर्म महान है और दिगर धर्म उससे कम अथवा महान नही है। यदि मैं अपना स्पष्ट मत ब्यक्त करना चाहूंगा तो सायद इसका परिणाम अच्छे न आएं इसलिए आपसे अनुरोध करना चाहूंगा कि आप अपने लिए किसी एक मौजूदा धर्म को ही न अपनाएं, बल्कि मानव-मानव एक समान के सिद्धांत के अनुरूप जीवन जीयें। आपके सामने जिस किसी धर्म के अच्छे सिद्धांत आते हों उन्हें अपने आचरण में शामिल करें और अनुपयोगी या मानवता विरोधी सिद्धांत से परे ही रहें।

किसी एक धर्म को मानना या धर्म निरपेक्ष होने में अच्छा क्या होगा?
आपका यह प्रश्न बहुत अच्छा है, मै इसका सटिक जवाब भी दे सकता हूं मगर समस्या यह है कि संभवतः आप मेरे विचार से सहमत न हों, इसलिए अपके सामने कुछ तर्क प्रस्तुत करना चाहूगां-
1- कोई भी मनष्य उंच अथवा नीच नही होता सभी बराबर हैं।
2- किसी भी स्थिति में हिंसा को प्रोत्साहन देने वाले सिद्धांत अच्छे नही हो सकते।
3- वर्ग संघर्ष को बढ़ावा देने वाले विचारधारा को किसी भी स्थिति में उचित नही मानना चाहिए।
4- अनुपयोगी परम्पराओं को त्याग देना ही बुद्धिमत्ता है।
5- क्या आपके धार्मिक सिद्धांत आपको प्रश्न करने का अधिकार देता है? 


लू से बचने के लिए खूब पीएं पानी, डाइट में शामिल करें ये खास सब्जियां

 गर्मियों में अत्यधिक पसीना आने के कारण इस मौसम में वयस्कों के शरीर में पानी की जरूरत 500 मिलीलीटर बढ़ जाती है. इसका ध्यान रखते हुए खूब पानी पीना आपको हीट सट्रोक (लू) से बचाएगा.

 
लंबे समय तक गर्मी में रहने के कारण होने वाली तीन सबसे आम समस्याएं हैं, जिनमें ऐंठन, थकावट और हीट स्ट्रोक शामिल हैं. अत्यधिक पसीना निकलने से,  मूत्र और लार के रूप में तरल पदार्थ तथा इलेक्ट्रोलाइट्स का प्राकृतिक नुकसान होता रहता है, जिससे डिहाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट्स का तीव्र असंतुलन हो सकता है.

Xiaomi का नया Mi Notebook Air लॉन्च, कीमत-खूबियां

 Xiaomi ने अपने नए Mi Notebook Air को चीन में लॉन्च कर दिया है. इस नए Mi Notebook Air में 12.5-इंच की स्क्रीन दी गई है और पिछले मॉडल की तुलना में बेहतर हार्डवेयर भी दिया गया है. इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि ये काफी लाइटवेट है. नया Mi Notebook Air ऐपल MacBook Air से भी हल्का है.


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 नई दिल्ली: सुमित्रानंदन पंत की आज जयंती (Sumitranandan Pant Jayant) है. हिंदी साहित्य में छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक सुमित्रानंदन पंत (Sumitranandan Pant) का जन्म 20 मई, 1900 को उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के कौसानी गांव में हुआ था. उनका नाम गोसाई दत्त था. वह गंगादत्त पंत की आठवीं संतान थे. उन्होंने अपना नाम बदलकर सुमित्रानंदन पंत रख लिया था. झरना, बर्फ, पुष्प, लता, भ्रमर-गुंजन, उषा-किरण, शीतल पवन, तारों की चुनरी ओढ़े गगन से उतरती संध्या ये सब तो सहज रूप से काव्य का उपादान बने


गोसाई दत्त यूं बने सुमित्रानंदन पंत, जानिए उनके बारे में सब कुछ

 नई दिल्ली: सुमित्रानंदन पंत की आज जयंती (Sumitranandan Pant Jayant) है. हिंदी साहित्य में छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक सुमित्रानंदन पंत (Sumitranandan Pant) का जन्म 20 मई, 1900 को उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के कौसानी गांव में हुआ था. उनका नाम गोसाई दत्त था. वह गंगादत्त पंत की आठवीं संतान थे. उन्होंने अपना नाम बदलकर सुमित्रानंदन पंत रख लिया था. झरना, बर्फ, पुष्प, लता, भ्रमर-गुंजन, उषा-किरण, शीतल पवन, तारों की चुनरी ओढ़े गगन से उतरती संध्या ये सब तो सहज रूप से काव्य का उपादान बने