1. Home
  2. ज्ञान विज्ञान

ज्ञान विज्ञान

*कोरोना संक्रमण से बचाव आवश्यक क्यों,कितना खतरनाक है,उपाय क्या क्या है और लॉकडाउन में क्या क्या करे-एचपी जोशी*

आज महामारी कोरोना के संक्रमण से लगभग पूरी दुनिया प्रभावित है, संसार के सारे देश कोरोना से लड़ाई लड़ने की अथक प्रयास कर रहे हैं। सारे विश्व के वैज्ञानिक, चिकित्सक, फार्मासिस्ट, पैथोलोजिस्ट, सरकार, सेना, सशस्त्रबल और पुलिस पूरी ईमानदारी, निष्ठा और समर्पित भाव से अपनी पूरी ताकत कोरोना से लड़ाई में झोंक रहे हैं। इसमें समाजसेवी संगठन और दानदाताओं का भी अच्छा योगदान है जो जरूरतमंद लोगों के आवश्यता को पूरा करने में बिना व्यक्तिगत स्वार्थ के लगे हुए हैं।

सरकारें आम नागरिकों से उनके और उनके परिवार की सुरक्षा के लिए केवल एक ही सहयोग चाह रहे हैं कि वे अपने घरों में ही रहें, अत्यंत आवश्यक हो तभी आवश्यक सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए घर से निकलें। अर्थात जब घर से निकलें तो मास्क, रुमाल अथवा गमछे से मुह और नाक को ढकें, हाथों में सेनेटाइजर लगाएं, किसी भी शर्त में दूसरे व्यक्ति से प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष फिजिकल संपर्क से बचें। यदि आप अधिक समय के लिए घर से निकल रहे हों तो सेनेटाइजर अपने जेब में ही रख लें और बार बार सेनेटाइजर से हाथ धोएं; व्यर्थ ही किसी भी वस्तु को स्पर्श करने से बचें। क्योंकि यही उपाय आपको और आपके परिवार को कोरोना वायरस के संक्रमण से बचा सकते हैं। हालांकि ऐसा कोई शोध सामने नही आया है जिसमें यह बोला गया हो कि पशु पक्षियों से भी कोरोना संकमण का फैलाव हो सकता है, इसके बावजूद आपको एहतियात के रूप में इनसे भी फिजिकल डिस्टेंस बनाने की जरूरत है; क्या पता आप जिस पशु पक्षियों को छू रहे हैं वह किसी कोरोना संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आया हो।

अभी तक ज्ञात रिसर्च के अनुसार "कोरोना संक्रमण का फैलाव हवा से नहीं होता।" यह मानवता की जीत के लिए अत्यंत सकारात्मक है इसलिए इसके संक्रमण पर आसानी से रोक लगाया जा सकता है। केवल जरूरत है तो सरकारों के दिशा निर्देश का पालन करते हुए फिजिकल डिस्टेंस के सिद्धान्तों का पालन करने की।

एक वेबसाइट में संकलित जानकारी के अनुसार आज 16/4 के 7 बजे तक दुनियाभर के लगभग 20 लाख लोग कोरोना के चपेट में आ चुके हैं, जिसमें से 1.34 लाख लोगों की मृत्यु हो चुकी है; वहीं लगभग 5.10 लाख लोग उपचार के बाद स्वस्थ्य हो चुके हैं। ये आंकड़े हमें गहराई से सोचने और सुरक्षित रहने को मजबूर करती है। इसलिए आपसे अनुरोध है सरकार के दिशा निर्देश का पालन करें और घर मे ही सुरक्षित रहें। यदि सरकार के दिशा निर्देश का पालन नही किया जाता है, यदि फिजिकल डिस्टेंस के सिद्धांत और सरकार द्वारा सुरक्षा मापदंड का उल्लंघन किया जाता है तो वह दिन दूर नही जब सन 1346-1353 की "प्लेग" से भी खतरनाक परिणाम भुगतने के लिए हम मजबूर होंगे; प्राप्त जानकारी के अनुसार महामारी प्लेग, मानवता को 7साल तक समाप्त करने का प्रयास करते हुए दुनियाभर से लगभग 7 से 20 करोड़ लोगों को मौत के मुह में ढकेल दी थी। दूसरी सबसे बड़ी महामारी थी "स्पेनिश फ्लू" जो लगभग 1918-1920 में आई थी, जो 3साल में अपने साथ 5करोड़ लोगों को मार डाली थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बहुत जल्द ही कोरोना का टीका खोज लिया जाएगा, तो भी टेस्टिंग, निर्माण और टीकाकरण करने में साल भर से कम नहीं लगेगा।

आज जरूरत है तो केवल:-
1- शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाए रखने की।
2- लक्षण दिखाई देने पर तत्काल एहतियात बरतने और उपचार के लिए कोरोना अस्पतालों जाने की।
3- न्यूनतम आवश्यक वस्तुओं का उपयोग करते हुए घर में ही रहने की।
4- प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष फिजिकल डिस्टेंस बनाने की।
4- यदि किसी अत्यावश्यक काम से बाहर निकलना पड़े तो मास्क, रुमाल या गमछे से नाक और मुह को ढकें, हाथ में सेनेटाइजर लगाएं। अधिक समय तक यदि आपको घर से बाहर रहने की जरूरत है तो सेनेटाइजर अपने जेब में रखें और समय समय में लगाते रहें।
5- पारिवारिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन पर रोक लगाएं।
6- केवल सरकार के दिशा निर्देश पर ध्यान दें। अन्य स्त्रोत से प्राप्त जानकारी अफ़वाह हो सकती है, इसलिए इससे बचें; क्योंकि अफ़वाह हमेशा घातक होता है।
7- कोरोना के संबंध में सोशल मीडिया अथवा किसी अन्य माध्यम से प्राप्त जानकारी को शेयर करने से बचें; यदि आपके पास पर्याप्त कारण हो कि यह जानकारी सरकार द्वारा दी गई है तभी अन्य व्यक्ति को शेयर करें।
8- आपसे निवेदन है कि यदि आप सक्षम हों तो सरकार के रिलीफ फण्ड में दान करें अथवा अपने आसपास के जरूरत मंदों की सहायता करें; यदि आप मकान मालिक हैं तो किराएदार को किराए के लिए परेशान न करें, यदि आप सक्षम दुकानदार हैं तो आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को पुराने उधारी चुकाने के लिए मजबूर न करें बल्कि जरूरत के आधार पर कम से कम अतिआवश्यक सामग्री उन्हें उधारी भी दें।
9- लॉक डाउन के दौरान समय का सदुपयोग करें, पूरे परिवार मिलकर चर्चा करें, अपने अनुभव शेयर करें, Books पढ़ें, Online माध्यम से कुछ सीखें, शिक्षा ग्रहण करें।
10- शिक्षकों और विशेषज्ञों से अनुरोध है कि वे यूट्यूब चैनल, फेसबुक लाइव इत्यादि के माध्यम से अपने स्टूडेंट्स के लिए काम करते रहें। छत्तीसगढ़ के शिक्षक सरकारी वेबसाइट CGSchool.in में अपना योगदान दें।
11- क्लास 1 से 12 के स्टूडेंट्स यूट्यूब में Bodhaguru चैनल के माध्यम से अपना पढ़ाई जारी रखें, छत्तीसगढ़ के स्टूडेंट्स cgschool में जाकर भी अपना पढ़ाई जारी रख सकते हैं।
12- प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए भी अनेकों यूट्यूब चैनल हैं जिसके माध्यम से आप अपना तैयारी जारी रख सकते हैं।
13- संविधान और केंद्रीय व राज्य सरकार द्वारा लागू अधिनियम और नियमों का अध्ययन करें; आप चाहें तो साहित्य भी पढ़ सकते हैं।
14- स्वस्थ और निरोगी रहने के लिए पूरे परिवार मिकलर घर अथवा आंगन में ही योग और व्यायाम करें; ऐसा न भी करें तो आंगन, छत अथवा बालकनी में जाकर शरीर को धूप जरूर दें।
15- आज इतने बड़े संकट के बावजूद जो आपके सुरक्षा में लगे हैं, अर्थात चिकित्साकर्मी, सेना, अर्धसैनिक बल, पुलिसकर्मी, किसान और वैज्ञानिक यही सही मायने में ईश्वर हैं इनका आजीवन सम्मान करने का संकल्प लें।
16- सरकार सदैव कल्याणकारी होती है इसे स्वीकार करें और हैसियत के अनुसार सरकार का सहयोग करें।
17- मूलभूत आवश्यकताओं के अलावा अतिरिक्त्त चीजों के उपयोग में कमी लाने का संकल्प लें।
18- स्वच्छ वायु, स्वच्छ जल, भोजन, साफ सुथरे कपड़े और आवास, दाल चावल सब्जी रोटी जैसे भोज्य पदार्थ, चिकित्सालय और चिकित्साकर्मी, स्कूल कॉलेज और शिक्षक, वैज्ञानिक, विद्युत और जल आपूर्ति में लगे लोग, वैज्ञानिक, सेना, अर्धसैनिक बल, पुलिस, सरकार और समाजसेवी संगठन, इत्यादि आवश्यक हैं।
19- मानवता सर्वोपरि है। यदि जाति, वर्ण, धर्म, सीमा और धार्मिक स्थल यदि मानवता के खिलाफ हो जाएं तो इसका त्याग करें।
20- घर में रहें, जिंदा रहें। 


*धर्म से जुड़ी कुछ उपयोगी बाते,प्रत्येक मनुष्य को जानना चाहिए-नवीन दर्शन पर आधारित लेख:एच.पी.जोशी*

हमें धर्म से जुडी उपयोगी बातें जानने के पहले धर्म से संबंधित कुछ परिभाषाओं का अध्ययन कर लेना चाहिए, ताकि धर्म को समझने में हमें आसानी हो।

धर्म क्या है ?
मूलतः धर्म जीवन जीने का तरीका मात्र है, धर्म एक मार्गदर्शी सिद्धांत है जो अपने अनुयायियों को अच्छे और उत्कृष्ट जीवन के लिए मार्ग प्रशस्त करता है। धर्म के माध्यम से संस्थापक का संदेश होता है कि धर्म के फलां-फलां लक्ष्य है, जीवन का फलां-फलां उद्देश्य है और अनुयायियों का इस मार्गदर्शी सिद्धांत के अनुरूप जीवन जीना उचित होगा - माता श्यामा देवी

यदि धर्म महान सिद्धांत हैं और अच्छे जीवन जीने का कला है तब दो धर्म के बीच संघर्ष के क्या कारण हैं?
निःसंदेह धर्म जीवन जीने का बेहतर तरीका है परन्तु पिछले सैकडों वर्षों से एक परम्परा बन गई है कि धार्मिक सिद्धांत, धार्मिक पुस्तकों और धर्मग्रंथ के नाम पर कोई भी अदार्शनिक व्यक्ति एक विवादित लेख, विचार अथवा पुस्तक के माध्यम से स्वयं को स्थापित कर लेता है जिसके परिणामस्वरूप धर्म का मार्ग परिवर्तित होकर अपनी मूल भावना से भटक जाती है। यही कुटिलता दो अलग-अलग धर्म के बीच खुनी संघर्ष का कारण बनता जाता है - श्री हुलेश्वर जोशी

अनेकोनेक धर्म बनने के क्या कारण हैं?
मौजूदा धर्म के सिद्धांत से अलग विचारधारा रखने वाले सम्प्रभुत्व संपन्न धार्मिक अथवा दार्शनिक नेताओं द्वारा मौजूदा धर्म से श्रेष्ठ और अच्छे जीवन दर्शन की कल्पना करना ही धर्म के उत्पत्ति का कारण है।

तो क्या मौजूदा धर्म के बाद स्थापित धर्म उससे अधिक अच्छी जीवन दर्शन प्रस्तुत करती होगी?
निःसंदेह, होना तो यही चाहिए। परन्तु यह उनके अनुयायियों के उपर भी निर्भर करता है कि वे कब तक अपने धार्मिक सिद्धांत के अनुरूप चल सकते हैं? कितना जल्दी वे पुरानी अनुपयोगी परम्पराओं को समाप्त कर देते हैं और कितने जल्दी नवीन वैज्ञानिक सोच को स्वीकार कर लेते हैं।

मौजूदा धर्म में सबसे श्रेष्ठ जीवन दर्शन किस धर्म में विद्यमान है?
यह अत्यंत सरल प्रश्न हैं परन्तु इसका उत्तर कहीं उससे अधिक कठीन है। मेरा ही नही वरन् अधिकांश धर्मनिरपेक्ष बुद्धजीवियों का मानना है कि कोई भी धर्म आपस में महान अथवा उंच या निम्न कोटि का नही होता है। यह उनके अनुयायियों का एक कल्पना मात्र है कि उसका धर्म महान है और दिगर धर्म उससे कम अथवा महान नही है। यदि मैं अपना स्पष्ट मत ब्यक्त करना चाहूंगा तो सायद इसका परिणाम अच्छे न आएं इसलिए आपसे अनुरोध करना चाहूंगा कि आप अपने लिए किसी एक मौजूदा धर्म को ही न अपनाएं, बल्कि मानव-मानव एक समान के सिद्धांत के अनुरूप जीवन जीयें। आपके सामने जिस किसी धर्म के अच्छे सिद्धांत आते हों उन्हें अपने आचरण में शामिल करें और अनुपयोगी या मानवता विरोधी सिद्धांत से परे ही रहें।

किसी एक धर्म को मानना या धर्म निरपेक्ष होने में अच्छा क्या होगा?
आपका यह प्रश्न बहुत अच्छा है, मै इसका सटिक जवाब भी दे सकता हूं मगर समस्या यह है कि संभवतः आप मेरे विचार से सहमत न हों, इसलिए अपके सामने कुछ तर्क प्रस्तुत करना चाहूगां-
1- कोई भी मनष्य उंच अथवा नीच नही होता सभी बराबर हैं।
2- किसी भी स्थिति में हिंसा को प्रोत्साहन देने वाले सिद्धांत अच्छे नही हो सकते।
3- वर्ग संघर्ष को बढ़ावा देने वाले विचारधारा को किसी भी स्थिति में उचित नही मानना चाहिए।
4- अनुपयोगी परम्पराओं को त्याग देना ही बुद्धिमत्ता है।
5- क्या आपके धार्मिक सिद्धांत आपको प्रश्न करने का अधिकार देता है? 


लू से बचने के लिए खूब पीएं पानी, डाइट में शामिल करें ये खास सब्जियां

 गर्मियों में अत्यधिक पसीना आने के कारण इस मौसम में वयस्कों के शरीर में पानी की जरूरत 500 मिलीलीटर बढ़ जाती है. इसका ध्यान रखते हुए खूब पानी पीना आपको हीट सट्रोक (लू) से बचाएगा.

 
लंबे समय तक गर्मी में रहने के कारण होने वाली तीन सबसे आम समस्याएं हैं, जिनमें ऐंठन, थकावट और हीट स्ट्रोक शामिल हैं. अत्यधिक पसीना निकलने से,  मूत्र और लार के रूप में तरल पदार्थ तथा इलेक्ट्रोलाइट्स का प्राकृतिक नुकसान होता रहता है, जिससे डिहाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट्स का तीव्र असंतुलन हो सकता है.

Xiaomi का नया Mi Notebook Air लॉन्च, कीमत-खूबियां

 Xiaomi ने अपने नए Mi Notebook Air को चीन में लॉन्च कर दिया है. इस नए Mi Notebook Air में 12.5-इंच की स्क्रीन दी गई है और पिछले मॉडल की तुलना में बेहतर हार्डवेयर भी दिया गया है. इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि ये काफी लाइटवेट है. नया Mi Notebook Air ऐपल MacBook Air से भी हल्का है.


Robot

 नई दिल्ली: सुमित्रानंदन पंत की आज जयंती (Sumitranandan Pant Jayant) है. हिंदी साहित्य में छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक सुमित्रानंदन पंत (Sumitranandan Pant) का जन्म 20 मई, 1900 को उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के कौसानी गांव में हुआ था. उनका नाम गोसाई दत्त था. वह गंगादत्त पंत की आठवीं संतान थे. उन्होंने अपना नाम बदलकर सुमित्रानंदन पंत रख लिया था. झरना, बर्फ, पुष्प, लता, भ्रमर-गुंजन, उषा-किरण, शीतल पवन, तारों की चुनरी ओढ़े गगन से उतरती संध्या ये सब तो सहज रूप से काव्य का उपादान बने


गोसाई दत्त यूं बने सुमित्रानंदन पंत, जानिए उनके बारे में सब कुछ

 नई दिल्ली: सुमित्रानंदन पंत की आज जयंती (Sumitranandan Pant Jayant) है. हिंदी साहित्य में छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक सुमित्रानंदन पंत (Sumitranandan Pant) का जन्म 20 मई, 1900 को उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के कौसानी गांव में हुआ था. उनका नाम गोसाई दत्त था. वह गंगादत्त पंत की आठवीं संतान थे. उन्होंने अपना नाम बदलकर सुमित्रानंदन पंत रख लिया था. झरना, बर्फ, पुष्प, लता, भ्रमर-गुंजन, उषा-किरण, शीतल पवन, तारों की चुनरी ओढ़े गगन से उतरती संध्या ये सब तो सहज रूप से काव्य का उपादान बने