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कोरोना की वैक्सीन लगवाओ या जेल जाओ- राष्ट्रपति

फिलीपींस के राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते अक्सर अपने बयानों के कारण सुर्खियों और विवादों में रहते हैं. यहां तक कि उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को गाली तक दे दी थी और इस वजह से दोनों देशों में तनाव पैदा हो गया था. अब दुर्तेते ने अपने नागरिकों से कहा है कि कोरोना की वैक्सीन लगवाओ या जेल जाओ. राष्ट्रपति दुतेर्ते ने एक और विकल्प दिया है. उन्होंने कहा कि जो वैक्सीन नहीं लगवा सकते हैं, वे देश छोड़कर भारत या अमेरिका चले जाएं. भारत और अमेरिका में ही कोरोना महामारी ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई है. शायद इसीलिए दुतेर्ते ने कटाक्ष करते हुए भारत और अमेरिका का नाम लिया है.

*G-7 देशों की नसीहत से बौखलाया चीन, ताईवान भेजा एक साथ 28 फाइटर जेट*


सीमा विवाद जैसे मुद्दों पर G-7 देशों की नसीहत का चीन पर कोई असर नहीं हुआ है, उल्टा वह बौखला गया है. इसी बौखलाहट में बीजिंग ने ताइवान की तरफ 28 लड़ाकू विमान भेजे. ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि पिछले साल से चीन के लड़ाकू विमान लगभग रोजाना ताइवान की तरफ उड़ान भरते आ रहे हैं, लेकिन कल चीन ने 28 फाइटर जेट्स भेजे, जो अब तक की सबसे ज्यादा संख्या है. बता दें कि हाल ही में G-7 देशों ने इसके लिए चीन को निशाने पर लिया था.

ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि चीनी कार्रवाई पर हमारी वायु सेना ने तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए लड़ाकू वायु दस्ते को तैनात किया और वायु रक्षा प्रणाली के जरिए द्वीप के दक्षिण-पश्चिम भाग में निगरानी बढ़ाई. मंत्रालय ने कहा कि ताइवान की तरफ आए विमानों में 14 J-16 और 6 J-11 लड़ाकू विमान शामिल रहे. गौरतलब है कि चीन ताइवान पर दबाव बनाने के लिए इस तरह की हरकतों को अंजाम देता रहता है.

G-7 समूह देशों के नेताओं ने रविवार को बयान जारी कर ताइवान जलडमरूमध्य मुद्दे को शांतिपूर्व सुलझाने का आह्वान किया था, जिससे बौखलाए चीन ने इस तरह अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया है. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने कल कहा कि G-7 समूह जानबूझकर चीन के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है. उन्होंने कहा कि चीन अपने अंदरूनी मामलों को सुलझाना जानता है और उसमें किसी की दखल की जरूरत नहीं है. 


*नई सरकार बनने के तीसरे दिन ही इजराइल ने तोड़ा सीजफायर, गाज़ा पट्टी पर किया हवाई हमले*

फिलिस्तीनी क्षेत्र से चरमपंथियों द्वारा दक्षिणी इज़रायल में आग लगाने वाले गुब्बारे भेजे जाने के बाद इजरायली वायु सेना ने आज गाज़ा पट्टी पर हवाई हमले शुरू कर दिए. पुलिस और सेना ने कहा कि गुब्बारे भेजे जाने के बाद किए गए हवाई हमले, गाज़ा और इजरायल के बीच हुए युद्ध विराम के बीच हुए हैं. बता दें कि 21 मई को दोनों पक्षों ने सीजफायर का ऐलान किया था.

फिलिस्तीनी सूत्रों के अनुसार इजरायल की वायु सेना ने गज़ा शहर के दक्षिणी हिस्से में स्थित खान यूनुस के पूर्व में एक साइट को निशाना बनाया. खान यूनुस में एएफपी के एक फोटो जर्नलिस्ट ने इन धमाकों को देखा. उधर, इजरायली डिफेंस फोर्स ने कहा कि आग वाले गुब्बारों के जवाब में लड़ाकू विमानों ने चरमपंथी संगठन हमास से संबंधित सैन्य परिसरों पर हमला किया.

बयान में कहा गया- खान यूनुस में चरमपंथियों की बैठक वाली जगहों को निशाना बनाया गया. 12 साल सत्ता में रहने के बाद प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पद से हटने के बाद रविवार रात को नई गठबंधन सरकार बनी. नई सरकार में आज गाज़ा के खिलाफ पहली स्ट्राइक हुई. आग लगाने वाले गुब्बारों के बारे में इजरायल के दमकल अधिकारियों ने कहा कि इसकी वजह से दक्षिणी इज़राइल में लगभग 20 जगह आग लग गई. 


अल जजीरा के पत्रकार की इजरायल में जबरन गिरफ्तारी, फिलिस्तीनियों पर रिपोर्टिंग कर रही थी।

 यरूशलम
इजरायल की सीमा पुलिस ने अल जजीरा सैटलाइट चैनल की एक वरिष्ठ संवाददाता को उस वक्त जबरन हिरासत में ले लिया, जब वह यरूशलम से रिपोर्टिंग कर रही थी। वह यहां फिलिस्तीनियों के एक धरने को कवर कर रही थीं। शेख जर्राह में हिरासत में लेने के कई घंटे बाद शनिवार को गिवारा बुदेरी को रिहा कर दिया गया।

अल जजीरा ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने चैनल के कैमरामैन के उपकरणों को भी तोड़ डाला। अल जजीरा के यरूशलम ब्यूरो प्रमुख वालिद ओमरी ने कहा कि बुदेरी का हाथ टूट गया है और वह यरूशलम के हदासाह अस्पताल में भर्ती हैं।

ओमरी ने कहा कि बुदेरी नियमित रूप से शेख जर्राह से रिपोर्टिंग कर रही थीं। वह शनिवार को वहां फिलिस्तीनियों के एक धरने को कवर कर रही थीं। ओमरी ने बताया कि इजरायल की सीमा पुलिस ने उनसे पहचान पत्र मांगा और उन्होंने अपने चालक को फोन कर कार से पहचान पत्र लाने के लिए कहा।

धक्का-मुक्की, फिर गिरफ्तारी
ओमरी ने बताया कि सुरक्षा बलों ने उन्हें इतना वक्त नहीं दिया और उन पर चिल्लाने लगे और उनसे धक्का-मुक्की की। अधिकारियों ने उन्हें हथकड़ी पहनाई और सीमा पुलिस की जीप में जबरन बैठा दिया। ओमरी ने कहा कि बुदेरी इजरायल सरकार के प्रेस कार्यालय से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। इजरायल की पुलिस ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की।


इजराइल में नई सरकार बनने में लगा विपक्ष, नेतन्याहू ने रोकने की कोशिश की।

यरुशलम, रायटर। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को विरोधियों को परिवर्तन की सरकार बनाने से रोकने की कोशिश की। मीडिया रिपोर्टो में कहा गया कि इजराइल के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले नेता को अपदस्थ करने का समझौता निकट हो सकता है।

इजरायल में पिछले दो वर्षो में चार चुनाव हो चुके हैं। विपक्ष के प्रमुख याइर लैपिड के लिए गठबंधन बनाने की समय सीमा बुधवार को खत्म हो रही है। इजरायली मीडिया का कहना है कि लैपिड दक्षिणपंथी, मध्यम मार्गी और वामपंथी पार्टियों के साथ समझौते के काफी करीब हैं।

लैपिड की संभावना बहुत हद तक धुर दक्षिणपंथी राजनेता नफ्ताली बेनेट के समर्थन पर टिकी है, जिनकी यामिना पार्टी को संसद में छह सीटें मिली हैं। बेनेट के बारे में अनुमान लगाया जा रहा है कि वे संभवत: रविवार तक लैपिड के साथ गठबंधन का एलान कर देंगे।

स्थानीय मीडिया में कहा जा रहा है कि बेनेट साझेदारी के लिए तैयार हो जाएंगे। लेकिन उनको पहले अपनी पार्टी के सांसदों को उस सरकार का समर्थन करने के लिए तैयार करना होगा, जिसे मध्यम मार्गी और वामपंथी दलों का भी समर्थन हासिल होगा। नेतन्याहू के विरोधी इसे परिवर्तन की सरकार कहते हैं। विभिन्न विचारधाराओं वाली पार्टियों को मिलाकर बनने वाली इस सरकार को संसद में अरब सदस्यों के समर्थन की भी दरकार होगी, जिनके विचार यामिना पार्टी से काफी अलग हैं।


*तुर्की राष्ट्रपति अर्दोआन ने किया विवादित मस्जिद का उद्धाटन*

तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप अर्दोआन के इस्तांबुल में एक विवादित मस्जिद का उद्घाटन कर दिया है. यह मस्जिद इस्तांबुल के मशहूर तक्सिम चौक पर है इसलिए इसे तक्सिम मस्जिद के नाम से जाना जाता है. इसी मस्जिद के निर्माण की योजना को लेकर साल 2013 में तुर्की में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे. शुक्रवार को इसके उद्घाटन में हज़ारों लोग शामिल हुए. मस्जिद में भीड़ होने के कारण कई लोगों को चौक पर ही नमाज़ पढ़नी पड़ी. यह मस्जिद इस्तांबुल में उस सार्वजनिक जगह के बगल में है जिसे धर्मनिरपेक्ष तुर्की का प्रतीक माना जाता है. तक्सिम मस्जिद इतनी विशाल है कि इसके सामने सार्वजनिक इमारत और तुर्की के संस्थापक मुस्तफ़ा कमाल अतातुर्क की मूर्ति छोटी नज़र आती हैं.

* सऊदी अरब ने पाकिस्तान को छोड़कर 11 देशों से यात्रा प्रतिबंध हटाया*

रियाद, 30 मई: पाकिस्तान को छोड़कर, सऊदी अरब ने 11 देशों के लोगों को मध्य पूर्वी देश की यात्रा करने की अनुमति दी है क्योंकि उसने रविवार से यात्रा प्रतिबंध हटा दिया था जो कि COVID-19 के प्रसार को रोकने के लिए लगाया गया था, गल्फ न्यूज की सूचना दी।

विकास से परिचित लोगों का हवाला देते हुए, सऊदी समाचार पत्र ने कहा कि रविवार (स्थानीय समयानुसार) सुबह 1 बजे से 11 देशों से यात्रा प्रतिबंध हटा लिया जाएगा। हालाँकि, इन देशों के यात्रियों को संस्थागत संगरोध से गुजरना होगा। संयुक्त अरब अमीरात, जर्मनी, संयुक्त राज्य अमेरिका, आयरलैंड, इटली, पुर्तगाल, यूनाइटेड किंगडम, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, फ्रांस और जापान के यात्रियों को रविवार से प्रवेश की अनुमति होगी।गल्फ न्यूज ने सऊदी गृह मंत्रालय के एक आधिकारिक सूत्र के हवाले से बताया, "महामारी विज्ञान के परिदृश्य में स्थिरता और उन देशों में प्रभावी महामारी-नियंत्रण के प्रयासों के कारण, सऊदी अरब ने 11 देशों से आने वाले यात्रियों को रविवार सुबह 1 बजे से अनुमति देने का फैसला किया है।

सऊदी अरब में आने वाले अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों को अपने स्वयं के खर्च पर सात-दिवसीय अनिवार्य संगरोध अवधि से गुजरना पड़ता है, आगमन के दिन से, राज्य की संगरोध सुविधाओं में से एक में प्रकाशन की सूचना दी। सातवें दिन, उन्हें एक पीसीआर परीक्षण करना होगा, जिसके बाद उन्हें नकारात्मक आने पर संगरोध छोड़ने की अनुमति दी जाएगी।

फरवरी में, सऊदी अरब ने कई देशों के साथ उड़ानों को अस्थायी रूप से रोक दिया, सउदी, राजनयिकों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रतिबंध से छूट दी। प्रतिबंध सूची में 20 देश अर्जेंटीना, यूएई, फ्रांस, जर्मनी, अमेरिका, इंडोनेशिया, भारत, जापान, आयरलैंड, इटली, पाकिस्तान, ब्राजील, पुर्तगाल, यूके, तुर्की, दक्षिण अफ्रीका, स्वीडन, स्विस परिसंघ थे। लेबनान, और मिस्र।

(ANI)


इस्राइल में हिंसक संघर्ष की जांच युद्ध अपराध के तौर पर होगी - यूएनएचआरसी, जानिए भारत ने क्या कहा।

संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष मानवाधिकार निकाय (यूएनएचआरसी) ने इस्राइल और कब्जे वाले फलस्तीनी इलाकों में 11 दिनों तक चले हिंसक संघर्ष की जांच युद्ध अपराध के तौर पर करना तय किया है। इसका प्रस्ताव 24/9 मतों से पारित हो गया है। इसके तहत युद्ध अपराधों व अन्य दुर्व्यवहारों के लिए जांच आयोग गठित किया जाएगा। इस्राइल ने इस फैसले को एकतरफा दिखावा बताया। यूएनएचआरसी में हुए इस फैसले को इस्राइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने शर्मनाक बताते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र की यह संस्था इस्राइल विरोधी मंशा से ग्रस्त है।

भारत इस मतदान से अपनी दूरी बनाए रखी। सात वर्षों में तीसरी बार जिनेवा में मानवाधिकार परिषद ने इस तरह का पैनल तय किया है। हालांकि यह दो अन्य से भिन्न था। इस्राइल के विरुद्ध पहली बार बहुमत से गठित होने वाले जांच पैनल को अनिश्चित काल तक जांच को आगे बढ़ा सकता है। इस प्रस्ताव में हमास या अन्य फलस्तीनी आतंकी समूहों का जिक्र नहीं होने के कारण आलोचकों ने इसमें संतुलन की कमी का हवाला भी दिया है। प्रस्ताव पर हुए मतदान में 14 देश वोटिंग प्रक्रिया से बाहर रहे, जिनमें भारत भी शामिल है।

भारत ने यूएनएचआरसी में दोहराया कि वह फलस्तीनियों के मुद्दों के साथ खड़ा है। मतदान से बाहर रहने वाले दूसरे देशों में फ्रांस, इटली, जापान, नेपाल, नीदरलैंड, पोलैंड, दक्षिण कोरिया, फिजी, बहमास, ब्राजील, डेनमार्क, टोगो और यूक्रेन शामिल हैं। फलस्तीनियों के अधिकारों को लेकर बुलाए गए इस खास सत्र में ओआईसी से जुड़े इस्लामी देश एकजुट होकर फलस्तीन नागरिकों को पक्ष में खड़े रहे।


मंगल की सतह पर दिखे मशरूम्स... नए जीवन की तरफ करती हैं इशारा

मंगल ग्रह की सतह पर उगे मशरूम. हैरानी हो रही है कि लाल ग्रह की सतह पर जहां जीवन के लायक वायुमंडल नहीं है, वहां पर मशरूम कैसे उग गए? अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मार्स एक्सप्लोरेशन रोवर ऑपरच्यूनिटी ने अपने कैमरे से इन मार्स मशरूम्स (Mars Mushrooms) की तस्वीर ली है. ये तस्वीरें आज की नहीं है. तस्वीर साल 2004 की है लेकिन हाल ही में हुई स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ है कि यह मशरूम जैसे दिखने वाले हैमेटाइट कॉनक्रिशन (Haematite Concretions) हैं. हैमेटाइट लोहे और ऑक्सीजन के मिलने से बनता है.

ये हैमेटाइट कॉनक्रिशन गोलाकार होते हैं. जिनमें हैमेटाइट मिनरल भरा होता है. इस धातु का उपयोग धरती पर भी होता है. ये गोलाकार हैमेटाइट कॉनक्रिशन काफी लंबे में समय में जमा हुए हैं. जब मंगल की सतह पर गर्मी बढ़ती है और सतह की नमी भाप बनकर उड़ती है तभी लोहे का यह अवयव उस नमी को पकड़ता है. फिर हवा के साथ गोले जैसा हो जाता है. हालांकि कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि यह किसी ज्वालामुखीय गतिविधि की वजह से भी हो सकता है.


कायदे से ये मशरूम तो हैं नहीं. जिस जगह पर साल 2004 में ऑपरच्यूनिटी रोवर ने लैंड किया वहां पर चारों तरफ ये भारी मात्रा में मौजूद थे. मंगल ग्रह की सतह खोदी गई तो उसमें से भी ये गोलाकार आकृतियां बाहर आई थीं. ऐसा नहीं है कि मंगल ग्रह पर इन गोलाकार आकृतियों को एलियन (Alien) जीवन से जोड़ा गया है. इससे पहले 7 अगस्त 1996 में अमेरिका तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन (US President Bill Clinton) ने व्हाइट हाउस में कहा था हमारे वैज्ञानिकों ने 1984 में अंटार्कटिका से उल्कापिंड जमा किया था. जिसके अंदर प्राचीन जीवाश्मीकृत कीड़े मौजूद थे.

बिल क्लिंटन ने दावा किया था ये माइक्रोऑर्गेनिज्म हैं. यानी सूक्ष्म जीव हैं. इस उल्कापिंड का नाम है ALH 84001. यह पत्थर भी मंगल ग्रह से धरती पर आया था. ये मंगल ग्रह पर ज्वालामुखी फटने की वजह से या फिर किसी एस्टेरॉयड के टकराने के बाद हुआ धमाके से उड़कर धरती की ओर आया होगा. धरती पर आने से पहले उसने अंतरिक्ष में लाखों सालों की यात्रा भी होगी. इसके बाद जाकर धरती के दक्षिणी ध्रुव पर स्थित अंटार्कटिका में आकर गिरा होगा.

जब वैज्ञानिकों ने ताकतवर माइक्रोस्कोप से इन सूक्ष्म जीवों का अध्ययन किया तो पता चला कि अब ये जीवाश्म बन चुके हैं. ये करोड़ों साल पुराने हैं. हालांकि इनकी सही उत्पत्ति की जगह और समय का पता नहीं चल पाया. आज भी कई साइंटिस्ट इन्हें लेकर विवाद करते रहते हैं. साथ ही अपनी-अपनी थ्योरी देते रहते हैं. कई वैज्ञानिकों का दावा है कि अक्सर अकार्बनिक प्रक्रियाएं ऐसी स्थिति बनाती हैं, जिससे लगता है कि आसपास कई जैविक या कार्बनिक आकृतियां बन गई हैं. इसका मतलब ये है कि अगर कोई चीज जीवित या जीवों जैसी दिखती है, तो जरूरी नहीं कि वो जीवन का संकेत हो.


राष्‍ट्रपति ने अब अपने दुश्‍मन देशो को एक जोरदार धमकी दी है

मॉस्को: अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ चल रहे तनाव के बीच रूसी राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन ने अपने दुश्‍मनों को जोरदार धमकी दी है। पुतिन ने विरोधी राष्ट्रों पर निशाना साधते हुए कहा है कि उनका देश रूसी क्षेत्र के कुछ हिस्सों को हड़पने की कोशिश करने वालों को ‘नॉक आउट’ कर उनका दांत तोड़ देगा। माना जा रहा है कि राष्‍ट्रपति पुतिन ने रूसी क्षेत्र के कुछ हिस्सों को हड़पने की कोशिश करने वाले देशों को अप्रत्यक्ष रूप से यह धमकी दी है। डीपीए ने इंटरफैक्स समाचार एजेंसी का हवाला देते हुए बताया, पुतिन ने कहा कि विदेशी दुश्मन रोजाना रूसी क्षेत्रों को छीनने की कोशिश करते हैं। पुतिन ने कहा, ‘हर कोई हमें कहीं काट लेना चाहता है या हमारे किसी हिस्से को काटना चाहता है, लेकिन उन्हें पता होना चाहिए कि जो लोग ऐसा करना चाहते हैं, हम उनके दांत तोड़ देंगे हैं, जिससे वे हमें काट न सकें।’

अमेरिका ने बनाई नई हाइपरसोनिक म‍िसाइल, रूस और चीन की खैर नही अब।

रूस, चीन के बाद अब अमेरिका ने भी हाइपरसोनिक मिसाइल बनाने में सफलता हासिल कर ली है। यह अमेरिकी मिसाइल ध्‍वनि की 17 गुना ज्‍यादा रफ्तार से दुश्‍मन देश पर तबाही मचाने में सक्षम हैं। रेडार की पकड़ में नहीं आने वाली इस नई अमेरिकी मिसाइल की मारक क्षमता 2700 किलोमीटर है। इस मिसाइल के साथ ही अमेरिका अब रूस और चीन पर दूर से ही भीषण हमला करने में सक्षम हो गया है। अ‍मेरिकी नौसेना अपनी हाइपरसोनिक मिसाइल को सभी 69 ड्रिस्‍ट्रायरों पर तैनात करेगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह मिसाइल दुश्‍मनों के लिए युद्ध के समय काल का काम करेगी। इतनी रेंज के साथ इस मिसाइल को अब प्रशांत महासागर में दक्षिण कोरिया, ताइवान, जापान या फिलीपीन्‍स कहीं भी तैनात किया जा सकता है। इसके जरिए दक्षिण चीन सागर और चीन के हैनान द्वीप समूह पर स्थित सैनिक ठिकाने या चीन की मुख्‍य भूमि पर जोरदार हमला किया जा सकता है। इस तरह अमेरिका अब अपनी मिसाइल को 3 लाख वर्ग मील के इलाके में कहीं भी छिपा सकता है।

अगर इस मिसाइल को लंदन शहर में तैनात कर दिया जाए तो इससे आसानी से रूस के पूर्वी इलाके तक को निशाना बनाया जा सकता है। रूस और चीन ने पहले हाइपरसोनिक मिसाइल बनाकर अब खुद के लिए बड़ा संकट पैदा कर लिया है। अब अमेरिका जल्‍द ही अपनी नई मिसाइलों के जरिए चीन और रूस को पीछे छोड़ देगा। रोचक बात यह है कि अमेरिका अपनी जमीन से काफी दूरी से ही इन मिसाइलों को दाग सकेगा।


चीन ने अमेरिका से कहा, इस्राएल से कहे गाजा पे हमला बंद करे।

चीन ने सोमवार को अमेरिका के सामने फिर से यह मांग रखी है कि वह गाजा में संघर्ष समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करे और यहां रक्तपात को समाप्त करने संबंधी प्रयासों को संयुक्त राष्ट्र में अवरूद्ध करना बंद करे. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने सुरक्षा परिषद के बारी-बारी से बनने वाले प्रमुख (रोटेटिंग हेड) के तौर पर संघर्ष विराम की अपील की तथा मानवीय सहायता समेत अन्य प्रस्ताव रखे. उन्होंने कहा कि एक देश के बाधा डालने की वजह से परिषद एक आवाज में अपनी बात नहीं रख पा रहा है. झाओ ने दैनिक सम्मेलन के दौरान कहा कि वह अमेरिका से उचित जिम्मेदारी उठाने और इस मुद्दे पर निष्पक्ष रुख रखने, स्थिति को शांत कराने तथा राजनीतिक समाधान हासिल होने की विश्वास बहाली में परिषद का समर्थन करे और निष्पक्ष रुख रखे. झाओ ने कहा कि चीन नागरिकों के खिलाफ हिंसा की कड़ी निंदा करता है और हवाई हमले, जमीनी हमले, रॉकेट दागने या स्थिति को और भी बुरे हालात में पहुंचाने जैसे कदमों को रोकने की माँग करता है. झाओ ने कहा कि इजराइल को संयम से काम लेते हुए संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का प्रभावी तरीक़े से पालन करना चाहिए और फलस्तीन के लोगों के घरों को ध्वस्त करना और उन्हें उनके घर से निकालना तथा अपनी बस्तियों के विस्तार देने के कार्यक्रमों को रोकना चाहिए तथा मुसलमानों के खिलाफ हिंसा और उकसावे को रोककर वह यरुशलम के एक धार्मिक स्थल के ऐतिहासिक महत्व का सम्मान करे. इजराइल और फलस्तीन के मुद्दे पर अमेरिका द्वारा प्रभावी कदम उठाने के लिए राष्ट्रपति जो बाइडन नीत अमेरिकी प्रशासन से कई तरह की माँगे उठी हैं. अब तक इजराइल के करीबी सहयोगी अमेरिका दरअसल चीन, नॉर्वे और ट्यूनिशिया द्वारा इस मुद्दे पर सुरक्षा परिषद द्वारा बयान जारी करवाने की कोशिश की राह में बाधा डाले हुए है. इस माँग में संघर्ष की समाप्ति की भी माँग शामिल है.

वीगर मुसलमान इलाक़े में मौलवियों को बेवजह कैद करता है चीन

वीगर राइट्स ग्रुप की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने शिनजियांग क्षेत्र में साल 2014 से अब तक कम से कम 630 इमाम और अन्य मुस्लिम धार्मिक हस्तियों को कैद या हिरासत में लिया है. वीगर मानवाधिकार प्रोजेक्ट (यूएचआरपी) ने ये शोध तैयार किया है और मीडिया के साथ साझा किया है. इसमें इस बात के भी प्रमाण मिले हैं कि हिरासत में या उसके कुछ ही समय बाद 18 मौलवियों की मौत हो गई थी. हिरासत में लिए गए कई मौलवियों पर “चरमपंथ का प्रचार करने”, “सामाजिक व्यवस्था को बिगाड़ने के लिए भीड़ जुटाने” जैसे गंभीर आरोप लगे थे. लेकिन, उनके रिश्तेदारों के बयानों के मुताबिक इन मौलवियों पर लगे आरोपों के पीछे असली अपराध अमूमन ये होता है कि धार्मिक उपदेश देना, प्रार्थना समूह बुलाना, या एक इमाम के तौर पर काम करना. यूएचआरपी ने 1046 मुस्लिम मौलवियों के बारे में पता लगाया. उनमें से अधिकतर वीगर मुसलमान थे. इसके लिए कोर्ट के दस्तावेजों, परिवार के बयानों और सार्वजनिक व निजी डाटाबेस से मीडिया रिपोर्ट्स का इस्तेमाल किया गया.

भारत ने इजरायल के खिलाफ हमास के रॉकेट हमले का किया विरोध

मध्य-पूर्व की स्थिति पर एक बयान में भारत ने हमास के द्वारा इजरायल के नागरिकों को नुकसान पहुंचाने के लक्ष्य से "अंधाधुंध रॉकेट फायरिंग" का विरोध किया है। साथ ही दोनों देशों के बाच बातचीत के जरिए संकट के सुलझाने की बात कही है। संयुक्त राष्ट्र के स्थायी प्रतिनिधि द्वारा 16 मई को जारी किए गए भारतीय बयान में हमास की कार्रवाई के लिए इजरायल द्वारा "जवाबी हमले" शब्द का इस्तेमाल किया गया है। शब्दों को सावधानी से डाला गया है क्योंकि भारत खुद पाकिस्तान से निकलने वाले सीमा पार आतंकवाद का शिकार रहा है। तथ्य यह है कि भारत ने केरल से अपने एक नागरिक सौम्या संतोष को खो दिया है जो अंधाधुंध रॉकेट फायरिंग में मारी गई हैं। भारतीय बयान में कहा गया, "हम हिंसा, उकसावे और विनाश के सभी कृत्यों की कड़ी निंदा करते हैं।" भारत ने हमास की कार्रवाई का विरोध किया है। साथ ही इजरायल और फिलिस्तीनी अधिकारियों के बीच सीधी बातचीत की अपनी पारंपरिक लाइन पर कायम है। बयान में कहा गया है, ''हम दोनों पक्षों से अत्यधिक संयम दिखाने, तनाव बढ़ाने वाली कार्रवाइयों से दूर रहने और पूर्वी यरुशलम और उसके पड़ोस सहित मौजूदा यथास्थिति को एकतरफा रूप से बदलने के प्रयासों से बचने का आग्रह करते हैं। बयान में भारतीय स्थिति को सावधानी से व्यक्त किया गया है क्योंकि नई दिल्ली के इजरायल और अरब दुनिया दोनों के साथ घनिष्ठ संबंध हैं और फिलिस्तीनी कारण का समर्थन करता है। गाजा से इजरायल के खिलाफ हमास की कार्रवाई ने इस मुद्दे को और जटिल कर दिया क्योंकि सुन्नी समूह के पीएलओ में कुछ समर्थक हैं, जिनके नेता महमूद अब्बास फिलिस्तीन और फिलिस्तीन राष्ट्रीय प्राधिकरण के अध्यक्ष हैं। इजराइल ने गाजा सिटी पर फिर से भीषण हवाई हमले किये इजराइली युद्धक विमानों ने सोमवार सुबह गाजा सिटी के कई स्थानों पर भीषण हवाई हमले किए। इसके कुछ ही घंटे पहले इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा पर काबिज चरमपंथी समूह हमास के खिलाफ चौथे युद्ध के जोर पकड़ने का संकेत दिया था। करीब 10 मिनट तक विस्फोटों से शहर का उत्तर से दक्षिण का इलाका थर्रा उठा। एक बड़े इलाके पर भीषण बमबारी हुई और यह 24 घंटे पहले हुए हवाई हमले से भी भीषण थी जिसमें 42 फलस्तीनियों की मौत हो गयी थी। इजराइल और हमास संगठन के बीच हिंसा की इस हालिया घटना से पहले इजराइल के हवाई हमले में तीन इमारतें ध्वस्त हो गयी थीं। स्थानीय मीडिया की खबरों में कहा गया है कि शहर के पश्चिम में मुख्य तटीय सड़क पर सुरक्षा परिसर और खुले स्थान सोमवार सुबह के हमले में निशाना बने। बिजली वितरण कंपनी ने बताया कि हवाई हमले में दक्षिणी गाजा सिटी के बड़े हिस्सों को बिजली पहुंचाने वाले एकमात्र संयंत्र से बिजली की एक लाइन क्षतिग्रस्त हो गयी। हालांकि हताहतों को लेकर तत्काल कोई सूचना नहीं है। रविवार को टेलीविजन पर प्रसारित संबोधन में नेतन्याहू ने कहा था कि इजराइल पूरे ''दम खम से हमला जारी रखे हुए है और यह कुछ समय तक जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि हमास को भारी कीमत चुकानी होगी।' इस दौरान एकजुटता दिखाने के लिए रक्षा मंत्री और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बेन्नी बेन्नी गैंट्ज भी उनके साथ थे।

बड़ी इमारत पर एक और मिसाइल हमला किया इजराइल ने, नेतन्याहू बोले जारी रहेगा ऑपरेशन

इस्राइल के हवाई हमले में गाजा स्थित 12 मंजिला इमारत ध्वस्त हो गई जिसें यूएस एसोसिएटेड प्रेस और कतर का अल जजीरा मीडिया हाउल का दफ्तर था। इस्राइली सेना ने कहा कि उसने हमास के दफ्तर को निशाना बनाया था और हमले से पहले ही इमारत के लोगों को बाहर निकल जाने की चेतावनी दे दी थी। एसोसिएटेड प्रेस और अल जजीरा दोनों ने इसकी कड़ी निंदा की है। नेतन्याहू बोले- ऑपरेशन जारी रहेगा वहीं, एक टीवी भाषण में इस्राइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने फिर दोहराया कि हम पर हमला करने वालों को करारा जवाब दिया जाएगा। हमारा ऑपरेशन अभी जारी है और जब तक जरूरी होगा ये जारी रहेगा।

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने इजरायल-फिलिस्तीनी संघर्ष पर एकीकृत सुरक्षा परिषद का आह्वान किया

न्यूयॉर्क, 15 मई: संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने शुक्रवार को इजरायल-फिलिस्तीनी संघर्ष पर एक एकीकृत सुरक्षा परिषद का आह्वान किया और बहुपक्षवाद की कमी पर खेद व्यक्त किया।

 

यह पूछे जाने पर कि इजरायल-फिलिस्तीनी तनाव पर सुरक्षा परिषद की रविवार की आपात बैठक से महासचिव क्या उम्मीद करते हैं, गुटेरेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा: "हम जो देखना चाहते हैं वह है ... डी-एस्केलेशन के लिए एक मजबूत, एकीकृत आवाज, के लिए शत्रुता की समाप्ति और इस संघर्ष का राजनीतिक समाधान खोजने के लिए पार्टियों को वापस पटरी पर लाने के लिए एक धक्का, जो कि और आगे चल रहा है। ”

 

इस तथ्य पर महासचिव की टिप्पणी के लिए कहा गया कि एक एकल सुरक्षा परिषद सदस्य ने इजरायल-फिलिस्तीनी संघर्ष पर शुक्रवार की बैठक के प्रस्ताव को अवरुद्ध कर दिया, इसके कुछ ही दिनों बाद परिषद के सभी सदस्यों ने बहुपक्षवाद के लिए समर्थन का वादा किया, दुजारिक ने कहा कि गुटेरेस राज्य के बारे में चिंतित हैं बहुपक्षवाद "जैसा कि हमने इसे महामारी के दौरान देखा है और जैसा कि हमने इसे अन्य पहलुओं में देखा है।"

 

उन्होंने कहा, "हम सदस्य राज्यों को उन आदर्शों पर अमल करते देखना चाहते हैं, जिन्हें हम सभी को इस संगठन के भीतर जीना है।" सुरक्षा परिषद के संबंध में उन्होंने कहा कि परिषद जितनी एकीकृत होगी, उसकी आवाज उतनी ही मजबूत होगी और उसका प्रभाव उतना ही मजबूत होगा।

 

सुरक्षा परिषद ने 7 मई को बहुपक्षवाद को बनाए रखने की आवश्यकता पर एक उच्च स्तरीय बहस की और परिषद के सभी सदस्य इसके समर्थन में सामने आए। फिर भी कुछ दिनों बाद, संयुक्त राज्य अमेरिका, इजरायल के एक सहयोगी ने राजनयिकों के अनुसार, शुक्रवार की सुरक्षा परिषद की बैठक के प्रस्ताव को अवरुद्ध कर दिया। सुरक्षा परिषद ने बाद में रविवार को इस तरह की बैठक पर सहमति जताई।—(एएनआई/सिन्हुआ)


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