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धर्म-अध्यात्म

आइए जानते है मार्गशीर्ष पूर्णिमा के बारे में

मार्गशीर्ष पूर्णिमा का स्नान-दान आज
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मार्गशीर्ष पूर्णिमा का महत्व
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पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पृथ्वी पर मौजूद हर तत्वों को पूर्ण रूप से प्रभावित करता है। यही कारण है कि इस दिन को दैवीयता का दिन भी माना गया है। इसके अलावा इसे हिंदू कैलेंडर के सबसे पवित्र माह का आखिरी दिन कहा जाता है। शास्त्रों में बताया गया है कि इस दिन दान करना अत्यंत लाभकारी होता है। इस दिन ध्यान और गंगास्नान को भी विशेष लाभकारी बताया गया है। मार्गशीर्ष पूर्णिमा के इस शुभ अवसर पर श्रीहरि विष्णु और भगवान भोलेनाथ की उपासना करनी चाहिए, और उनकी पूजा करके आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इसी दिन चंद्रमा को अमृत से सिंचित किया था। इसलिए मार्गशीर्ष पूर्णिमा के अवसर पर चंद्रमा की उपासना भी करना चाहिए।

मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन ऐसे करें स्नान-ध्यान
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मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठना चाहिए, और स्नान करने से पहले संकल्प लेना चाहिए। फिर नहाने के पानी में तुलसी के पत्ते डालें। इसके बाद पानी को सिर पर लगाकर प्रणाम करें, इसके बाद ही स्नान करें। अगर आप किसी पवित्र नदीं में स्नान करने में सक्षम है, तो यह अति उत्तम होगा। स्नान के बाद सूर्य देवता को अर्घ्य दें। इसके बाद साफ और स्वच्छ वस्त्र पहनकर, मंत्रों का जाप करें। मंत्र के जाप करने के बाद किसी जरूरतमंद को सफेद वस्तुओं का दान करना अत्यंत लाभकारी होगा। इसके बाद रात के समय चंद्रमा को भी अर्घ्य देना न भूंले। मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन आप उपवास भी रख सकते हैं, इससे चंद्र देवता प्रसन्न होंगे, जिससे आपको मन की शांति मिलेगी।

मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण की कथा का महत्व
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सत्यनारायण की कथा का भी विशेष महत्व माना गया है। इस दिन चंद्र देव और भगवान शंकर की आराधना की जाती है। साथ ही भगवान सत्यानारायण की कथा का भी प्रावधान है। सत्यनारायण की कथा कराने से व्यक्ति को हर तरह से सुख, समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है। इस दिन अगर कोई व्यक्ति पूरे विश्वास, श्रद्धा और आस्था के साथ उपवास रखता है, तो उसे इसी जन्म में मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है।

पूर्णिमा के दिन चंद्रमा प्रभावशाली
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ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि इस दिन चंद्रमा काफी प्रभावशाली होता है, क्योंकि इस तिथि को सूर्य और चंद्रमा ठीक आमने-सामने होते हैं। चंद्रमा को मन का कारक माना गया है। अगर व्यक्ति चंद्र ग्रह की शांति के लिए कोई उपाय करते है, तो उसे जीवन में शांति प्राप्त होती है। अगर आप चंद्र ग्रह की शांति के लिए पूजा कराना चाहते हैं, तो आप हमारे वैदिक पंडितों से पूजा करवा सकते हैं।

 


*धर्म आध्यात्म-किन लोगों का चरण स्पर्श वर्जित माना गया है*

मालिनी सिंह जी की कलम से....

हमारी संस्कृति के मूल में बसे हैं संस्कार। बड़ों को प्रणाम करना, नमस्ते करना या उनके पैर छूकर उनका आशीर्वाद लेना। ऐसा करना हमारे घरों में बचपन से सिखाया जाता है। लेकिन कुछ स्थितियां ऐसी होती हैं, जिनमें हमें प्रणाम करने और चरण स्पर्श करने से बचना चाहिए।

चरण स्पर्श करने का भी विधान है। ऐसे व्यक्ति के चरण स्पर्श नहीं करने चाहिए, जो सो रहा हो। ऐसा करना वर्जित माना गया है। क्योंकि हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, लेटे हुए व्यक्ति के पैर केवल एक ही स्थिति में स्पर्श किए जा सकते हैं, जब उसकी मृत्यु हो चुकी हो। विवाहित पुरुष को अपनें सास ससुर के पैर नहीं छुने चाहिए,एक पिता को चाहिए की वो अपने पुत्री के पैर छुए लेकिन बेटी को पिता का चरण स्पर्श नहीं करना चाहिए,मामा मामी के चरण स्पर्श नहीं करना चाहिए, भतीजे को चाची के चरण स्पर्श नहीं करना चाहिए।
शास्त्र सम्मत यह है कि मामा मामी,को भांजा और भांजी के चरण स्पर्श करने चाहिए,चाची को भतीजी और भतीजा का चरण स्पर्श करना चाहिए।साथ ही सास और ससुर को अपनें पुत्री और दामाद के दंडवत होकर चरण स्पर्श करने चाहिए।

श्मशान से लौटते हुए व्यक्ति को
श्मशान से लौटते हुए व्यक्ति को प्रणाम करना वर्जित माना गया है। इसका कारण मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक है। श्मशान से लौटते समय व्यक्ति की मनोदशा सामान्य से अलग होती है। उस स्थिति में वह हृदय और मन से व्यथित और अस्थिर भी होता है। काफी हद तक उसका सांसारिक मोह से उस समय भंग हो चुका होता है। ऐसे में वह खुश होकर आशीर्वाद नहीं दे पाता है।

जब इस अवस्था में हो व्यक्ति
जब कोई व्यक्ति ध्यान कर रहा हो तो उसे प्रणाम नहीं करना चाहिए। पूजा करते हुए व्यक्ति को भी प्रणाम नहीं करना चाहिए। ऐसा करने के पीछे कारण यह है कि आपके प्रणाम करने से उसका ध्यान भंग होगा और आपको आशीर्वाद मिलने की जगह दोष लगेगा।

ऐसे कभी प्रणाम न करें
प्रणाम हमेशा दोनों हाथों को जोड़कर करना चाहिए। एक हाथ से प्रणाम करना उचित नहीं होता है। जब हम दोनों हाथों को मिलाकर प्रणाम करते हैं तो हमारी हथेलियों में बने एक्यूप्रेशर पॉइंट्स में रगड़ होती है और दबाव पड़ता है। इससे हमारे अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसलिए हाथ जोड़कर प्रणाम करने में हमारे शरीर को भी लाभ मिलता है।

पैर छूने का यह है सही तरीका
आज-कल एक चलन देखने को मिलता है। लोग अपने से बड़ों के पैर केवल एक हाथ से स्पर्श करते हैं…ऐसा करने पर आपको पूरा लाभ नहीं मिलता। यहां दुआओं की बात नहीं हो रही है बल्कि बात हो रही है, उस ऊर्जा चक्र की जो एक हाथ से चरण स्पर्श करने पर पूरा नहीं हो पाता। दरअसल, पैरों को शरीर की ऊर्जा का संग्रह माना जाता है। जब हम दोनों हाथों से बड़ों के पैर छूते हैं तो उनके दोनों पैर और हमारे हाथों को मिलाकर एक ऊर्जा चक्र पूरा होता है।

शास्त्रों में लिखा है कि-

अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविन:।
चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशो बलम्।।

इस श्लोक का अर्थ यह है कि जो व्यक्ति रोज बड़े-बुजुर्गों के सम्मान में प्रणाम और चरण स्पर्श करता है। उसकी उम्र, विद्या, यश और शक्ति बढ़ती जाती है।

पैर छूना या प्रणाम करना, केवल एक परंपरा नहीं है, यह एक वैज्ञानिक क्रिया है जो हमारे शारीरिक, मानसिक और वैचारिक विकास से जुड़ी है। पैर छूने से केवल बड़ों का आशीर्वाद ही नहीं मिलता, बल्कि बड़ों के स्वभाव की अच्छी बातें भी हमारे अंदर उतर जाती है। पैर छूने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे शारीरिक कसरत होती है। आमतौर पर तीन तरीकों से पैर छुए जाते हैं। पहला तरीका- झुककर पैर छूना। दूसरा तरीका- घुटने के बल बैठकर पैर छूना। तीसरा तरीका- साष्टांग प्रणाम करना।

झुककर पैर छूना– झुककर पैर छूने से हमारी कमर और रीढ़ की हड्डी को आराम मिलता है।

घुटने के बल बैठकर पैर छूना- इस विधि से पैर छूने पर हमारे शरीर के जोड़ों पर बल पड़ता है, जिससे जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है।

साष्टांग प्रणाम– इस विधि में शरीर के सारे जोड़ थोड़ी देर के लिए सीधे तन जाते हैं, जिससे शरीर का स्ट्रेस दूर होता है। इसके अलावा, झुकने से सिर का रक्त प्रवाह व्यवस्थित होता है जो हमारी आंखों के साथ ही पूरे शरीर के लिए लाभदायक है।

पैर छूने के तीसरे तरीके का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे हमारा अहंकार खत्म होता है। किसी के पैर छूने का मतलब है उसके प्रति समर्पण भाव जगाना। जब मन में समर्पण का भाव आता है तो अहंकार खत्म हो जाता है। 


*शरद पूर्णिमा आज, आइये जानते है इसकी पूजा विधि*

शरद पूर्णिमा आज
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शरद पूर्णिमा आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाता है। शरद पूर्णिमा को कोजागर पूर्णिमा और आश्विन पूर्णिमा नाम से भी जाना जाता है। शरद पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी और चंद्रमा की पूजा करने, साथ ही चांदनी रात में खीर बनाकर रखने की परंपरा है।

शरद पूर्णिमा तिथि
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पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 09 अक्टूबर दिन रविवार को तड़के 03 बजकर 41 मिनट पर हो रहा है। इस तिथि का समापन अगले दिन 10 अक्टूबर सोमवार को तड़के 02 बजकर 24 मिनट पर होगा। ऐसे में उदयातिथि के आधार पर इस साल शरद पूर्णिमा 09 अक्टूबर को है।

शरद पूर्णिमा का चंद्रोदय समय
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इस साल शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा का उदय शाम 05 बजकर 51 मिनट पर होगा। जिन लोगों को व्रत रखना है वे 09 अक्टूबर को ही शरद पूर्णिमा का व्रत रखेंगे और शाम के समय में चंद्रमा की पूजा करेंगे।

शरद पूर्णिमा की पूजा विधि
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-सुबह स्नान के बाद घर के मंदिर की सफाई करें। ध्यान पूर्वक माता लक्ष्मी और श्रीहरि की पूजा करें। फिर गाय के दूध में चावल की खीर बनाकर रख लें।

-लक्ष्मी माता और भगवान विष्णु की पूजा करने के लिए लाल कपड़ा या पीला कपड़ा चौकी पर बिछाकर माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की प्रतिमा इस पर स्थापित करें। तांबे अथवा मिट्टी के कलश पर वस्त्र से ढंकी हुई लक्ष्मी जी की स्वर्णमयी मूर्ति की स्थापना कर सकते हैं।

-भगवान की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं, धूप करें। इसके बाद गंगाजल से स्नान कराकर अक्षत और रोली से तिलक लगाएं।

-तिलक करने के बाद मीठे ( सफेद या पीली मिठाई ) से भोग लगाएं। लाल या पीले पुष्प अर्पित करें। माता लक्ष्मी को गुलाब का फूल अर्पित करना विशेष फलदाई होता है।

– शाम के समय चंद्रमा निकलने पर मिट्टी के 100 दीये या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दीये गाय के शुद्ध घी से जलाएं।

-इसके बाद खीर को कई छोटे बर्तनों में भरकर छलनी से ढककर चंद्रमा की रोशनी में रख दें। फिर पूरी रात (तड़के 3 बजे तक, इसके बाद ब्रह्म मुहूर्त शुरू हो जाता है) जागते हुए विष्णु सहस्त्रनाम का जप, श्रीसूक्त का पाठ, भगवान श्रीकृष्ण की महिमा, श्रीकृष्ण मधुराष्टकम् का पाठ और कनकधारा स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। पूजा की शुरुआत में भगवान गणपति की आरती अवश्य करें।

-अगली सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके उस खीर को मां लक्ष्मी को अर्पित करें और प्रसाद रूप में वह खीर घर-परिवार के सदस्यों में बांट दें।

-इस प्रकार जगतपालक और ऐश्वर्य प्रदायिनी की पूजा करने से सभी मनवांछित कार्य पूरे होते हैं। साथ ही हर तरह के कर्ज से मुक्ति मिलती है।

शरद पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। इस रात चंद्रमा की किरणों में औषधीय गुण होता है। इस वजह से रात के समय में खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे रखते हैं, ताकि चंद्रमा की किरणें उसमें पड़ें। इससे वह खीर औषधीय गुणों वाला हो जाता है। उस खीर का सेवन करने से सेहत अच्छी होती है। ऐसी धार्मिक मान्यता है।

कोजागर पूर्णिमा
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शरद पूर्णिमा को कोजागर पूर्णिमा इसलिए कहते हैं कि इस रात में माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और उन लोगों के घरों में जाती हैं, जिनका घर साफ सुथरा होता है और वे उनके स्वागत के लिए तैयार रहते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता लक्ष्मी जानना चाहती हैं कि उनके स्वागत के लिए इस समय कौन जाग रहा है, इस वजह से शरद पूर्णिमा का एक नाम कोजागर पूर्णिमा है।

शरद पूर्णिमा की कथा
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पूर्णिमा के व्रत का सनातन धर्म में बहुत महत्व है। हर महीने में पड़ने वाली पूर्णिमा तिथि पर व्रत करने से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। मां लक्ष्मी और श्रीहरि की इसी कृपा को प्राप्त करने के लिए एक साहूकार की दोनों बेटियां हर पूर्णिमा को व्रत किया करती थीं। इन दोनों बेटियों में बड़ी बेटी पूर्णिमा का व्रत पूरे विधि-विधान से और पूरा व्रत करती थी। वहीं छोटी बेटी व्रत तो करती थी लेकिन नियमों को आडंबर मानकर उनकी अनदेखा करती थी।

विवाह योग्य होने पर साहूकार ने अपनी दोनों बेटियों का विवाह कर दिया। बड़ी बेटी के घर समय पर स्वस्थ संतान का जन्म हुआ। संतान का जन्म छोटी बेटी के घर भी हुआ लेकिन उसकी संतान पैदा होते ही दम तोड़ देती थी। दो-तीन बार ऐसा होने पर उसने एक ब्राह्मण को बुलाकर अपनी व्यथा कही और धार्मिक उपाय पूछा। उसकी सारी बात सुनकर और कुछ प्रश्न पूछने के बाद ब्राह्मण ने उससे कहा कि तुम पूर्णिमा का अधूरा व्रत करती हो, इस कारण तुम्हारा व्रत फलित नहीं होता और तुम्हे अधूरे व्रत का दोष लगता है। ब्राह्मण की बात सुनकर छोटी बेटी ने पूर्णिमा व्रत पूरे विधि-विधान से करने का निर्णय लिया।

लेकिन पूर्णिमा आने से पहले ही उसने एक बेटे को जन्म दिया। जन्म लेते ही बेटे की मृत्यु हो गई। इस पर उसने अपने बेटे शव को एक पीढ़े पर रख दिया और ऊपर से एक कपड़ा इस तरह ढक दिया कि किसी को पता न चले। फिर उसने अपनी बड़ी बहन को बुलाया और बैठने के लिए वही पीढ़ा दे दिया। जैसे ही बड़ी बहन उस पीढ़े पर बैठने लगी, उसके लहंगे की किनारी बच्चे को छू गई और वह जीवित होकर तुरंत रोने लगा। इस पर बड़ी बहन पहले तो डर गई और फिर छोटी बहन पर क्रोधित होकर उसे डांटने लगी कि क्या तुम मुझ पर बच्चे की हत्या का दोष और कलंक लगाना चाहती हो! मेरे बैठने से यह बच्चा मर जाता तो?

इस पर छोटी बहन ने उत्तर दिया, यह बच्चा मरा हुआ तो पहले से ही था। दीदी, तुम्हारे तप और स्पर्श के कारण तो यह जीवित हो गया है। पूर्णिमा के दिन जो तुम व्रत और तप करती हो, उसके कारण तुम दिव्य तेज से परिपूर्ण और पवित्र हो गई हो। अब मैं भी तुम्हारी ही तरह व्रत और पूजन करूंगी। इसके बाद उसने पूर्णिमा व्रत विधि पूर्वक किया और इस व्रत के महत्व और फल का पूरे नगर में प्रचार किया। जिस प्रकार मां लक्ष्मी और श्रीहरि ने साहूकार की बड़ी बेटी की कामना पूर्ण कर सौभाग्य प्रदान किया, वैसे ही हम पर भी कृपा करें।

 


*शुक्र प्रदोष व्रत देता है सुख - समृद्धि और सौभाग्य का वरदान, आइये जानते इसके बारे में*

शुक्र प्रदोष व्रत आज
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शुक्र प्रदोष व्रत देता है सुख - समृद्धि और सौभाग्य का वरदान
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हर माह आने वाला प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा पाने का सबसे बड़ा दिन होता है। शुक्रवार को पड़ने वाले व्रत को शुक्र प्रदोष व्रत कहते हैं। इस दिन किए जाने वाले प्रदोष व्रत से सुख-समृद्धि और सौभाग्य का वरदान मिलता है। प्रदोष व्रत की पूजा शाम के समय प्रदोषकाल में की जाती है। यह प्रदोष सूर्यास्त से लगभग 1 घंटा पहले का समय होता है, जो प्रदोषकाल कहलाता है।

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार प्रदोष व्रत करने से भगवान शिवशंकर की पूर्ण कृपा प्राप्त की जा सकती है। इससे जीवन में किसी प्रकार का अभाव नहीं रह जाता है। इतना ही नहीं, समस्त आर्थिक संकटों का समाधान करने के लिए प्रदोष व्रत अवश्य करना चाहिए। इस व्रत के प्रभाव से हर तरह के रोग दूर होकर बीमारियों पर होने वाले खर्च में कमी आती है। भगवान शिव को ज्ञान और मोक्ष का दाता माना जाता है। अत: अध्यात्म की राह पर चलने वालों को प्रदोष व्रत अवश्य करना चाहिए।

शुक्र प्रदोष व्रत की कथा-
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एक नगर में 3 मित्र रहते थे- राजकुमार, ब्राह्मण कुमार और तीसरा धनिक पुत्र। राजकुमार और ब्राह्मण कुमार विवाहित थे। धनिक पुत्र का भी विवाह हो गया था, लेकिन गौना शेष था। एक दिन तीनों मित्र स्त्रियों की चर्चा कर रहे थे।

ब्राह्मण कुमार ने स्त्रियों की प्रशंसा करते हुए कहा- 'नारीहीन घर भूतों का डेरा होता है।' धनिक पुत्र ने यह सुना तो तुरंत ही उसने अपनी पत्‍नी को लाने का निश्‍चय कर लिया। तब धनिक पुत्र के माता-पिता ने समझाया कि अभी शुक्र देवता डूबे हुए हैं। ऐसे में बहू-बेटियों को उनके घर से विदा करवा लाना शुभ नहीं माना जाता लेकिन धनिक पुत्र ने एक नहीं सुनी और ससुराल पहुंच गया।

ससुराल में भी उसे मनाने की कोशिश की गई लेकिन वो जिद पर अड़ा रहा और कन्या के माता-पिता को उनकी विदाई करनी पड़ी। विदाई के बाद पति-पत्‍नी शहर से निकले ही थे कि बैलगाड़ी का पहिया निकल गया और बैल की टांग टूट गई। दोनों को चोट लगी लेकिन फिर भी वो चलते रहे। कुछ दूर जाने पर उनका पाला डाकुओं से पड़ा। जो उनका धन लूटकर ले गए। दोनों घर पहूंचे। वहां धनिक पुत्र को सांप ने डंस लिया। उसके पिता ने वैद्य को बुलाया तो वैद्य ने बताया कि वो 3 दिन में मर जाएगा।

जब ब्राह्मण कुमार को यह खबर मिली तो वो धनिक पुत्र के घर पहुंचा और उसके माता-पिता को शुक्र प्रदोष व्रत करने की सलाह दी और कहा कि इसे पत्‍नी सहित वापस ससुराल भेज दें। धनिक ने ब्राह्मण कुमार की बात मानी और ससुराल पहुंच गया, जहां उसकी हालत ठीक होती गई यानी शुक्र प्रदोष के माहात्म्य से सभी घोर कष्ट दूर हो गए।

इस दिन कथा सुनें अथवा सुनाएं तथा कथा समाप्ति के बाद हवन सामग्री मिलाकर 11 या 21 या 108 बार 'ॐ ह्रीं क्लीं नम: शिवाय स्वाहा' मंत्र से आहुति दें। उसके बाद शिवजी की आरती तथा प्रसाद वितरित करें, उसके बाद भोजन करें। कहा जाता है कि शुक्रवार को प्रदोष व्रत सौभाग्य और दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि भर देता है। यही कारण है कि आज के प्रदोष व्रत का काफी खास माना जा रहा है। शुक्रवार के दिन पड़ने वाले इस प्रदोष व्रत से सुख-समृद्धि मिलती है।

 


नवरात्र के तीसरे दिन की जाती है मां चंद्रघंटा की आराधना, जानिए पूजा विधि, कथा, मंत्र और आरती*


आज शारदीय नवरात्रि का तीसरा दिन है। नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की विधि-विधान से पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनसार, मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना करने से भक्त निर्भय और सौम्य बनता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मां चंद्रघंटा की पूजा करने से चंद्रमा की स्थिति सुधरती है। ऐसे में जिन जातकों का चंद्रमा कमजोर होता है। उन्हें मां चंद्रघंटा की पूजा अवश्य करनी चाहिए।हिंदू मान्यताओं के अनुसार, देवी चंद्रघंटा को देवी दुर्गा का तीसरा अवतार माना जाता है, जिनकी नवरात्रि के तीसरे दिन भक्तों द्वारा पूजा की जाती है। पूर्ण समर्पित भाव से पूजा करने से जीवन में शांति, समृद्धि और खुशियां आती हैं। माना जाता है कि देवी के पास एक आधा चाँद उनके माथे पर घंटी के आकार में सुशोभित है। माना जाता है कि वह एक सुनहरे चमकीले रंग से बहुत ही आकर्षित होती हैं और शेर की सवारी करती है। उनके दस हाथों को भी दर्शाया गया है। अपनी बाईं चार भुजाओं में वह त्रिशूल, गदा, तलवार और कमंडल धारण करती है और पांचवीं बाईं भुजा वरद मुद्रा में होती है। अपनी चार दाहिनी भुजाओं में वह कमल का फूल, तीर, धनुष और जप माला धारण करती है। पाँचवाँ दाहिना हाथ अभय मुद्रा में होता है।
मान्यताएं
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार माना जाता है कि, देवी चंद्रघंटा अपने भक्तों को शक्ति, वीरता और साहस का सर्वोत्तम आशीर्वाद देती हैं। उनका आशीर्वाद सभी पापों, शारीरिक कष्टों, मानसिक कष्टों और बाधाओं को समाप्त कर सकता है। देवी चंद्रघंटा की कथा
हिंदू पौराणिक कथाओं और शिव महा पुराण के अनुसार, देवी चंद्रघंटा देवी पार्वती का विवाहित रूप है। भगवान शिव और देवी पार्वती के विवाह के बाद, भगवान महादेव ने देवी को एक चंद्रमा से सजाया था जोकि चंदन के साथ बनाया गया था और इसलिए, वह चंद्रघंटा के रूप में लोकप्रिय हो गईं। देवी पार्वती की पूजा देवी चंद्रघंटा के रूप में की जाती है जो क्षमा और शांति की देवी हैं।
मां चंद्रघंटा का स्वरूप
माता का तीसरा रूप मां चंद्रघंटा शेर पर सवार हैं। दस हाथों में कमल और कमडंल के अलावा अस्त-शस्त्र हैं। माथे पर बना आधा चांद इनकी पहचान है। इस अर्ध चांद की वजह के इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है।
*मां चंद्रघंटा का भोग*-
मां को केसर की खीर और दूध से बनी मिठाई का भोग लगाना चाहिए। पंचामृत, चीनी व मिश्री भी मां को अर्पित करनी चाहिए।
*मां चंद्रघंटा पूजा विधि*
सूर्योदय से पहले स्नान आदि कर साफ और सुंदर वस्त्र धारण करें।
-चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर मां चंद्रघंटा की प्रतिमा स्थापित करें और इस स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।
-इसके बाद व्रत का संकल्प लेकर वैदिक तथा सप्तशति मंत्रों द्वारा मां चंद्रघंटा सहित सभी देवी देवताओं की षोडशोपचार पूजा करें।
-मां को पंचामृत यानी दूध, दही, घी और शहद से स्नान कराने के बाद माता का श्रंगार करें।
-माता को वस्त्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, नारियल, गुड़हल का फूल, फल और मिठाई अर्पित करें।
-मां चंद्रघंटा के मंत्रों का 108 बार जाप करें। बता दें मां चंद्रघंटा के मंत्रों का जप करने से भक्तों के सभी समस्याओं का निवारण होता है।
- माता को गाय के दूध से बने व्यंजन, फल और गुड़ का भोग लगाएं। कहा जाता है कि माता को गुड़ अत्यंत प्रिय है।
*अब माता की पौराणिक कथा का पाठ कर आरती करें*
मां चंद्रघंटा के मंत्र
पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं नुते मह्मं चंद्रघण्टेति विश्रुता।
*मां चंद्रघंटा की आरती*
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा का ध्यान।मस्तर पर है अर्ध चंद्र, मंद मंद मुस्कान।।
दस हाथों में अस्त्र शस्त्र रखे खडग संग बांद।
धंटे के शब्द से हरती दुष्ट के प्रांण।
सिंह वाहिनी दुर्गा का चमके स्वर्ण शरीर।
करती विपदा शांति हरे भक्त की पीर।
मधुर वांणी को बोल कर सबको देती ज्ञान।
भव सागर में फंसा हूं मैं, करो मेरा कल्याण।।
नवरात्रि की मां, कृपा कर दो मां।
जय मां चंद्रघंटा, जय मां चंद्रघंटा।। 


*श्रावण मास के प्रथम सोमवार में हो रहा अद्भुत संयोग,शिव आराधना से मनोकामनाएं होते हैं पूर्ण- आचार्य रजनीकांत*

श्रावण मास धर्म-अध्यात्म के साथ सौभाग्य का सूचक माना जाता है। शिव आराधना से मनोरथ पूर्ण होते हैं, अनुष्ठान, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, शिव पुराण का विशेष महत्व है।देश के ज्योतिर्लिंगों के साथ शिवालयों में नित्य धार्मिक गतिविधियों को सम्पन्न किया जा रहा है।श्रावण में शिव भक्तों के लिए सोमवार का विशेष महत्व रहा है। इस बार चार शुभ संयोग बन रहे हैं।सावन महीने का पहला सोमवार 18 जुलाई को है। इस दिन शोभन, प्रीति व सर्वार्थ सिद्धि योग में भगवान भोलेनाथ का अभिषेक किया जाएगा।साथ ही साथ ज्योतिष गणना के अनुसार सावन के पहले सोमवार पर चंद्रमा और गुरू की युति से गजकेसरी योग बन रहा है। गजकेसरी योग ज्योतिष में बहुत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। ये योग भगवान शिव का पूजन करने या कोई भी शुभ कार्य करने के लिए बहुत ही उत्तम है।

*शिवपुराण अनुसार श्रावण का महत्व*

शिवपुराण की विश्वेश्वर संहिता के अध्याय 16 में शिव जी कहते हैं कि मासों में श्रावण (सावन) मुझे बहुत प्रिय है। इस महीने में श्रवण नक्षत्र वाली पूर्णिमा रहती है। इस वजह से भी माह को श्रावण कहते हैं। सावन महीने में सूर्य अधिकतर समय कर्क राशि में रहता है। जब सूर्य कर्क राशि में होता है, उस समय में की गई शिव पूजा जल्दी सफल होती है।

*शिवपुराण के अनुसार जानिए कौन सा द्रव्य भगवानको चढ़ाने से क्या फल मिलता है*

*भगवान शिव को चावल चढ़ाने से धन की प्राप्ति होती है*।

*तिल चढ़ाने से पापों का नाश हो जाता है।*

*जौ अर्पित करने से सुख में वृद्धि होती है*

गेहूं चढ़ाने से संतान वृद्धि होती है।*

*यह सभी अन्न भगवान को अर्पण करना चाहिए।*

*ज्वर बुखार होने पर भगवान शिव को जलधारा चढ़ाने से शीघ्र लाभ मिलता है।*

*सुख व संतान की वृद्धि के लिए भी जलधारा द्वारा शिव की पूजा उत्तम बताई गई है।*

*नपुंसक व्यक्ति अगर शुद्ध घी से भगवान शिव का अभिषेक करे, ब्राह्मणों को भोजन कराए तथा सावन सोमवार का व्रत करे तो उसकी समस्या का निदान संभव है।**

सुगंधित तेल इत्र से भगवान शिव का अभिषेक करने पर समृद्धि में वृद्धि होती है।*

*शिवलिंग पर ईख, गन्ना का रस चढ़ाया जाए तो सभी आनंदों की प्राप्ति होती है।*

*शिव को गंगाजल चढ़ाने से भोग व मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है।*

*चमेली के फूल से पूजन करने पर वाहन सुख मिलता है।*

*अलसी के फूलों से शिव का पूजन करने से मनुष्य भगवान विष्णु को प्रिय होता है*।

*शमी पत्रों पत्तों से पूजन करने पर मोक्ष प्राप्त होता है।*

*बेला के फूल से पूजन करने पर सुंदर व सुशील पत्नी मिलती है*।

*जूही के फूल से शिव का पूजन करें तो घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती।*

*कनेर के फूलों से शिव पूजन करने से नए वस्त्र मिलते हैं।*

*हरसिंगार के फूलों से पूजन करने पर सुख-संपत्ति में वृद्धि होती है।*

*धतूरे के फूल से पूजन करने पर भगवान शंकर सुयोग्य पुत्र प्रदान करते हैं। जो कुल का नाम रोशन करता है।*

*दूर्वा से पूजन करने पर आयु बढ़ती है।*

*शिवलिंग पर ठंडे जल की धारा से अभिषेक*

शिवजी पर ठंडे जल की धारा की परंपरा के पीछे समुद्र मंथन की कथा है। जब देवताओं और दानवों ने समुद्र को मथा तो सबसे पहले हलाहल विष निकला, जिसे शिव जी ने पी लिया था। इस विष को भगवान ने गले में धारण किया, जिससे उनका कंठ नीला हो गया। विष की वजह शिव जी के शरीर में गर्मी बहुत बढ़ गई थी। इस गर्मी को शांत करने के लिए शिवलिंग पर ठंडे जल की धारा चढ़ाने की परंपरा है।भगवान शंकर की पूजा मूर्तिमान विग्रह एवं शिवलिंग दोनों अत्यंत फलदाई है। इसलिए सावन में विशेष तरीको से पूजा-अर्चना करने से भगवान शिव का आर्शिवाद मिलेगा और मनोकामना पूरी होगी। शिवलिंग, नर्मदेश्वर, पारदेश्वर, स्फटकेश्वर, पार्थिवेश्वर किसी भी शिवलिंग की पूजा श्रावण में अत्यंत फलदाई है।

*सद्योजातं प्रपद्यामि सद्योजाताय वै नमो नमः*।
*भवे भवे नातिभवे भवस्व मां भवोद्भवाय नमः 


*चातुर्मास पर विशेष-आचार्य रजनीकांत शर्मा*

वर्ष 2022 में चातुर्मास (चौमासा )का शुभारंभ 10 जुलाई से हो रहा है तथा 4 नवंबर 2022 को इसकी समाप्ति होगी। चातुर्मास का समय भगवान के पूजन-आराधना और साधना का समय माना जाता है, इस समायवधि में अधिक से अधिक ध्यान धर्म-कर्म में देने की बात शास्त्रों में कही गई है।

जैन संत-मुनि चातुर्मास के दौरान 4 महीने तक एक ही स्थान पर रहते हैं, क्योंकि चातुर्मास के ये 4 माह वर्षा ऋतु का समय होता है और इन दिनों बारिश के कारण अधिक जीव-जंतु मिट्‍टी से निकल कर बाहर आ जाते हैं। ऐसे समय में इनकी जान जाने की संभावना अधिक होती है। इन दिनों तपस्वी, संत एक ही स्थान पर रहकर जप-तप करते है।

हिन्दू धर्म में चातुर्मास भगवान श्रीहरि विष्णु जी का शयनकाल होता है, अत: इस समय श्रावण मास में भगवान शिव जी, पितरों को प्रसन्न करने का खास पर्व श्राद्ध, नवरात्रि में माता दुर्गा सहित कई देवी-देवताओं का पूजन करके विशेष लाभ की प्राप्ति होती है। साथ ही धनतेरस, दीपावली जैसे बड़े पर्व भी इन्हीं दिनों आते हैं।


चातुर्मास के अंतर्गत सावन, भाद्रप्रद, आश्विन व कार्तिक मास आते हैं। ऐसा कहा जाता है कि, इस समय भगवान विष्णु विश्राम करते है,, और शिव जी संसार की व्यवस्था संभालते हैं, तथा दीपावली के बाद देवउठनी एकादशी पर अपनी निद्रा से जागकर सृष्टि का संचालन करते हैं।


हमारे धर्म ग्रंथों में चातुर्मास के दौरान कई नियमों का पालन करना जरूरी बताया गया है।

चातुर्मास के विशेष नियम -:

- चातुर्मास अर्थात् चार महीने तक विवाह व शुभ कार्यों पर रोक होने से आगामी 4 महीने तक मांगलिक कार्य नहीं होंगे।

- इन चार महीने में दूर की यात्राओं से बचना चाहिए ,,


- आषाढ़ शुक्ल एकादशी अर्थात् देवशयनी एकादशी से चातुर्मास प्रारंभ होकर कार्तिक शुक्ल एकादशी अर्थात् देवउठनी एकादशी तक चलता है। अत: चातुर्मास में मांगलिक कार्य नहीं होते हैं और धार्मिक कार्यों पर अधिक ध्यान दिया जाता है।
शास्त्रीय मान्यतानुसार इसके मध्य घर से बाहर तभी निकलना चाहिए जब जरूरी हो, क्योंकि वर्षा ऋतु के कारण कुछ ऐसे जीव-जंतु सक्रिय हो जाते हैं जो आपको हानि पहुंचा सकते हैं।


चातुर्मास की 7 महत्वपूर्ण बातें-

- इस समयावधि में दूध, शक्कर, दही, तेल, बैंगन, पत्तेदार सब्जियां, नमकीन, अधिक मसालेदार भोजन, मिठाई, सुपारी, मांस और मदिरा का सेवन नहीं करने की सलाह हमारे शास्त्रों में दी गई है।

*प्रथम मास* - चार्तुमास के पहले महीने यानी श्रावण (सावन) में हरी सब्जी, पत्तेदार सब्जियां या पालक का सेवन नहीं करना चाहिए।


*द्वितीय मास*- भाद्रपद या भादौ में दही का त्याग करने की सलाह शास्त्रों में दी गई है।

*तृतीय मास* - आश्विन में दूध का सेवन स्वास्थ्य की दृष्टि से हानिकारक बताया गया है।

*चतुर्थ मास* - कार्तिक में प्याज, लहसुन, दाल न खाने की सलाह दी जाती है। विशेष कर इस महीने उड़द की दाल का सेवन करने की मनाही है।

चातुर्मास अर्थात् इन 4 महीनों में शुभ विवाह संस्कार, गृह प्रवेश आदि सभी मंगल कार्य निषेध कहे गए हैं।

- वर्षा ऋतु में शरीर स्‍वस्‍थ रखने के लिए सनातन धर्म में चातुर्मास के मध्य केवल एक समय ही भोजन करने की बात कही गई है, यदि आवश्यक हो तो एक बार फलाहार लिया जा सकता हैं।


आचार्य रजनीकांत शर्मा
प्रदेश धर्माचार्य
(हिंदू शक्ति सेवा संगठन छत्तीसगढ़ प्रान्त)
9685865386
8839922778 


*मघा नक्षत्र से उद्धत है माघ मास,शास्त्रों में बताया विशेष महत्व-आचार्य रजनीकांत शर्मा*

माघ मास की विशेषता*

इस माह से सभी मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाते हैं। इस माह में पवित्र नदियों के तट पर मेला लगता है। इस माह से सूर्य जब उत्तरायण होने लगता है तो धीरे-धीरे ठंड भी कम होने लगती है। इस माह में हेमंत ऋतु के बाद शिशिर ऋतु का प्रारंभ होता है। माघ महीने की शुक्ल पंचमी से वसंत ऋतु का आगमन होता है। मघा नक्षत्र के कारण इस माह का नाम माघ मास पड़ा।
*माघ मास के महत्त्वपूर्ण व्रत षटतिला एकादशी, तिल चतुर्थी, रथसप्तमी, भीष्माष्टमी, मौनी अमास्या, जया एकादशी, संकष्टी चतुर्थी आदि*।

माघ माह का महत्व* 

माघ मास में 'कल्पवास' का विशेष महत्त्व है। 'माघ काल' में प्रयागराज संगम तथा अन्य तीन नदियों के पवित्र संगम तट पर निवास को 'कल्पवास' कहते हैं। माघ माह में जहां कहीं भी जल हो तो ऐसा माना जाता है कि, वह गंगाजल के समान पवित्र हो जाता है। जो भी माघ माह में गंगा स्नान करता हैं लक्ष्मीपति भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करता है। माघ माह में स्नान करने से सुख सौभाग्य, धन-संतान और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस मास में शीतल जल के भीतर डुबकी लगाने वाले मनुष्य पापमुक्त हो जाते हैं।

इस पुनीत मास की मान्यता है कि, माघ माह में देवता धरती पर आकर मनुष्य रूप धारण करते हैं और प्रयाग में स्नान करने के साथ ही दान और जप करते हैं। इसीलिए प्रयाग में स्नान का अत्यधिक महत्व है। जहां स्नान करने से सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है। माघ पूर्णिमा के दिन पुष्य नक्षत्र हो तो इस तिथि का महत्व और बढ़ जाता है।

माघे निमग्नाः सलिले सुशीते विमुक्तपापास्त्रिदिवं प्रयान्ति।

पद्मपुराण में माघ मास पर वर्णन आया है कि, नित्य पूजा करने से भी भगवान श्रीहरि को उतनी प्रसन्नता नहीं होती, जितनी कि माघ महीने में स्नान मात्र से होती है। इसलिए सभी पापों से मुक्ति और भगवान वासुदेव की प्रीति प्राप्त करने के लिए प्रत्येक मनुष्य को माघ स्नान करना चाहिए।

*'प्रीतये वासुदेवस्य सर्वपापानुत्तये। माघ स्नानं प्रकुर्वीत स्वर्गलाभाय मानवः॥*'
माघ मास में पूर्णिमा को जो व्यक्ति ब्रह्मवैवर्त पुराण का दान करता है, उसे ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है। माघ में ब्रह्मवैवर्तपुराण की कथा सुननी चाहिए,, और यदि यह संभव न हो सके तो माघ महात्म्य अवश्य सुनना चाहिए।

अतः इस मास में स्नान, दान, उपवास और भगवान माधव की पूजा अत्यंत फलदायी होती है। महाभारत में आया है कि, माघ मास में जो तपस्वियों को तिल दान करता है, वह नरक का दर्शन नहीं करता। माघ मास की द्वादशी तिथि को दिन-रात उपवास करके भगवान माधव की पूजा करने से उपासक को राजसूय यज्ञ का फल प्राप्त होता है। अतः इस प्रकार माघ स्नान की अपूर्व महिमा है।

माघ माह के नियम :

1. माघ माह में दरवाजे पर आए हुए किसी भी व्यक्ति को खाली हाथ नहीं लौटाया जाता है। दान पुण्य किया जाता है।

2. इस माह में किसी भी तरह का व्यसन नहीं करना चाहिए।

3. इस माह में तामसिक भोजन नहीं करना चाहिए।

4. यह माह पुण्य कमाने और साधना करने का माह होता है। अत: इस माह में झूठ बोलना, कटुवचन, ईर्ष्या, मोह, लोभ, कुसंगत आदि का त्याग कर देना चाहिए।

6. इस माह में अच्छे से स्नान करना चाहिए और खुद को शुद्ध एवं पवित्र बनाए रखना चाहिए। इस माह सुबह जल्दी उठकर स्नान करना लाभकारी होता है।

7. माघ माह में तिल गुड़ का सेवन करना लाभकारी होता है।

8. इस माह में यदि एक समय भोजन किया जाए तो आरोग्य तथा एकाग्रता की प्राप्ति होती है।

9. इस माह श्रीहरि के साथ ही श्रीकृष्ण की पूजा करना चाहिए। ऐसा करने से सभी मनोकामना पूर्ण होती है।

10. इस माह में कल्पवास के नियमों का पालन करना चाहिए।

कल्पवासी के मुख्य कार्य है:- 1.तप, 2.होम और 3.दान।
तीनों से ही आत्म विकास होता है।


*आचार्य रजनीकांत शर्मा,प्रदेश धर्माचार्य छत्तीसगढ़ प्रान्त
*हिंदू शक्ति सेवा संगठन* 


*शनिदेव जी की संतुष्टि,भक्तों का करेगी मार्ग प्रशस्त -आचार्य रजनीकांत शर्मा*

शनि, भगवान सूर्य तथा छाया के पुत्र हैं। इनकी दृष्टि में जो क्रूरता व्याप्त है, वह इनकी पत्नी के शाप के कारण है। ब्रह्मपुराण के अनुसार, बचपन से ही शनिदेव भगवान श्रीकृष्ण के भक्त थे। बड़े होने पर इनका विवाह चित्ररथ की कन्या से किया गया। इनकी पत्नि सती-साध्वी और परम तेजस्विनी थीं। एक बार पुत्र-प्राप्ति की इच्छा से वे इनके पास पहुचीं पर ये श्रीकृष्ण के ध्यान में मग्न थे। इन्हें बाह्य जगत की कोई सुधि ही नहीं थी। पत्नि प्रतिक्षा कर थक गयीं तब क्रोधित हो उसने इन्हें शाप दे दिया कि आज से तुम जिसे देखोगे वह नष्ट हो जाएगा। ध्यान टूटने पर जब शनिदेव ने उसे मनाया और समझाया तो पत्नि को अपनी भूल पर पश्चाताप हुआ, किन्तु शाप के प्रतिकार की शक्ति उसमें नहीं थी। तभी से शनिदेव अपना सिर नीचा करके रहने लगे। क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि उनके द्वारा किसीका अनिष्ट हो।

शनि के अधिदेवता प्रजापति ब्रह्मा और प्रत्यधिदेवता यम हैं। इनका वर्ण इन्द्रनीलमणी के समान है। वाहन गीध तथा रथ लोहे का बना हुआ है। ये अपने हाथों में धनुष, बाण, त्रिशूल तथा वरमुद्रा धारण करते हैं। यह एक-एक राशि में तीस-तीस महीने रहते हैं। यह मकर व कुम्भ राशि के स्वामी हैं तथा इनकी महादशा 19 वर्ष की होती है। इनका सामान्य मंत्र है - *ऊँ शं शनैश्चराय नम:*इसका श्रद्धानुसार रोज एक निश्चित संख्या में जाप अवश्य करना चाहिए।श

शनिवार का व्रत - 

इस व्रत को आप वर्ष के किसी भी शनिवार के दिन शुरू कर सकते हैं, परंतु श्रावण मास में शनिवार का व्रत प्रारम्भ करना अति मंगलकारी है । इस व्रत का पालन करने वाले को शनिवार के दिन प्रात: ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके शनिदेव की प्रतिमा की विधि सहित पूजन करनी चाहिए। शनि भक्तों को इस दिन शनि मंदिर में जाकर शनि देव को नीले लाजवन्ती का फूल, तिल, तेल, गुड़ अर्पण करना चाहिए। शनि देव के नाम से दीपोत्सर्ग करना चाहिए।शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा के पश्चात उनसे अपने अपराधों एवं जाने अनजाने जो भी आपसे पाप कर्म हुआ हो उसके लिए क्षमा याचना करनी चाहिए। शनि महाराज की पूजा के पश्चात राहु और केतु की पूजा भी करनी चाहिए। इस दिन शनि भक्तों को पीपल में जल देना चाहिए,, और पीपल में सूत्र बांधकर सात बार परिक्रमा करनी चाहिए।

 

{*आचार्य रजनीकांत शर्मा*}
प्रदेश धर्माचार्य छत्तीसगढ़ प्रान्त
हिंदू शक्ति सेवा संगठन
9685865386
8839922778 


*बाबा महाकालेश्वरज्योतिर्लिंग बुधवार भस्मआरती प्रातःकाल सिंगार,कीजिए दर्शन*

उज्जैन।जय श्री महाकाल बाबा आज 12-01-2022 बुधवार के भस्म आरती श्रृंगार दर्शन 12 ज्योतिर्लिंग में से तृतीय दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग बाबा महाकाल जी के महाकालेश्वर उज्जैन मध्यप्रदेश से ।

 


*मंगलवार विशेष: संकट काटते है पंचमुखी बजरंगबली- आचार्य रजनीकांत*

हनुमान जी अपने भक्तों पर आने वाले किसी भी प्रकार के संकट को क्षण भर में दूर कर देते हैं , इसी कारण हनुमान जी को संकटमोचन के नाम से भी जाना जाता है। वैसे तो हनुमान जी स्वयं भगवान श्री राम जी के अनन्य भक्त हैं, और सदैव उनके नाम का स्मरण करते रहते हैं, लेकिन एक बार भगवान श्री राम जी के भी संकट में पड़ जाने पर , हनुमान जी ने पंचमुखी अवतार लेकर उन्हे भी संकट से उबारा था।

हनुमान जी जब लिए पंचमुखी अवतार..

रामायण के प्रसंगानुसार, लंका युद्ध के समय जब रावण के भाई अहिरावण ने अपनी मायवी शक्ति से स्वयं भगवान श्री राम और लक्ष्मण को मूर्क्षित कर पाताल लोक लेकर चला गया था। जहां अहिरावण ने पांच दिशाओं में पांच दिए जला रखे थे। उसे वरदान था कि जब तक कोई इन पांचों दीपक को एक साथ नहीं बुझाएगा तब तक अहिरावण का वध नहीं हो सकेगा ... अहिरावण की इसी माया को समाप्त करने के लिए हनुमान जी ने पांच दिशाओं में पांच मुख करके पंचमुखी हनुमान जी का अवतार धारण किया, और पांचों दीपक को एक साथ बुझाकर अहिरावण का वध किया। इसके फलस्वरूप भगवान श्री राम और लक्ष्मण जी उसके बंधन से मुक्त हुए।

*पंचमुखी हनुमान के पांचों मुख का महत्व*

पंचमुखी हनुमान जी के पांचों मुख पांच अलग-अलग दिशाओं में हैं एवं इनके अलग-अलग महत्व हैं--

*(१) वानर मुख*:-

यह मुख पूर्व दिशा में है तथा दुश्मनों पर विजय प्रदान करता है।


*(२) गरुड़ मुख*: -

यह मुख पश्चिम दिशा में है तथा जीवन की रुकावटों और परेशानियों का नाशक है।

*(३ )वराह मुख:*

यह मुख उत्तर दिशा में है तथा लंबी उम्र, प्रसिद्धि और शक्ति दायक है।


*(४) नृसिंह मुख*:

यह दक्षिण दिशा में है, यह डर, तनाव व मुश्किलें दूर करता है।

*(५ )अश्व मुख*:-

यह मुख आकाश की दिशा में है एवं मनोकामनाएं पूरी करता है।

*पंचमुखी हनुमान की पूजा विधि*-

पंचमुखी हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र को सदैव दक्षिण दिशा में लगाना चाहिए। मंगलवार हनुमान जी की पूजा का विशेष दिन होता है, इस दिन लाल रंग के फूल, सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करने का विशेष महत्व है। इसके साथ गुड़ व चने का भोग लगाना चाहिए एवं सुंदरकाण्ड या हनुमान चालीसा पढ़ने से विशेष लाभ होता है। इसके अतिरिक्त घर के दक्षिण-पश्चिम कोने में पंचमुखी हनुमान का चित्र लगाने से सभी तरह के वास्तुदोष मिट जाते हैं।


{*आचार्य रजनीकांत शर्मा*}
प्रदेश धर्माचार्य छत्तीसगढ़ प्रान्त
हिंदू शक्ति सेवा संगठन
*९६८५८६५३८६,८८३९९२२७७८...


*10 जनवरी सोमवार,जानिए आज का राशिफल आचार्य रजनीकांत शर्मा से*

आज का राशिफल

 *राशि फलादेश मेष :-*
*(चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ)*
धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन हो सकता है। पूजा-पाठ में मन लगेगा। यात्रा मनोनुकूल लाभ देगी। राजभय रहेगा। जल्दबाजी व विवाद करने से बचें। थकान महसूस होगी। कोर्ट व कचहरी के काम अनुकूल रहेंगे। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। प्रसन्नता रहेगी। किसी के व्यवहार से स्वाभिमान को ठेस पहुंच सकती है।

 *राशि फलादेश वृष :-*
*(ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)*
शुभ समाचार मिल सकता है। व्यावसायिक यात्रा लाभदायक रहेगी। मित्रों का सहयोग कर पाएंगे। मान-सम्मान मिलेगा। आय में वृद्धि होगी। शारीरिक कष्ट संभव है। अज्ञात भय रहेगा। लेन-देन में सावधानी रखें। प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। चिंता रहेगी। बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे।

 *राशि फलादेश मिथुन :-*
*(का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)*
नई योजना बनेगी। आराम का समय मिलेगा। आशंका-कुशंका रहेगी। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। कारोबारी नए अनुबंध हो सकते हैं, प्रयास करें। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। रोजगार में वृद्धि होगी। आय में वृद्धि होगी। प्रमाद न करें। सामाजिक कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी।

 *राशि फलादेश कर्क :-*
*(ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)*
रोजगार प्राप्ति सहज ही होगी। व्यावसायिक यात्रा से लाभ होगा। किसी बड़ी समस्या का हल प्राप्त होगा। प्रसन्नता रहेगी। अप्रत्याशित लाभ हो सकता है। दूसरों के काम में हस्तक्षेप न करें। भाग्योन्नति के प्रयास सफल रहेंगे। निवेशादि शुभ रहेंगे। कारोबार में वृद्धि के योग हैं।

 *राशि फलादेश सिंह :-*
*(मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)*
किसी वरिष्ठ व्यक्ति का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। कारोबारी लाभ में वृद्धि होगी। धनार्जन होगा। नौकरी में शांति रहेगी। कष्ट, भय व चिंता का वातावरण बन सकता है। विवेक से कार्य करें। समस्या दूर होगी। कानूनी अड़चन दूर होकर स्थिति मनोनुकूल बनेगी। सहकर्मियों का साथ मिलेगा।

 *राशि फलादेश कन्या :-*
*(ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)*
आर्थिक उन्नति के प्रयास सफल रहेंगे। मित्रों का सहयोग कर पाएंगे। पराक्रम व प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। धनार्जन होगा। अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे। कर्ज लेना पड़ सकता है। पुराना रोग उभर सकता है। चिंता तथा तनाव बने रहेंगे। अपेक्षित कार्यों में विलंब होगा। वाणी पर नियंत्रण रखें। किसी भी अपरिचित व्यक्ति पर अंधविश्वास न करें

 *राशि फलादेश तुला :-*
*(रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)*
किसी अपने का व्यवहार प्रतिकूल रहेगा। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। शारीरिक शिथिलता रहेगी। काम में मन नहीं लगेगा। नौकरी में अपेक्षानुरूप कार्य न होने से अधिकारी की नाराजी झेलना पड़ेगी। वाहन व मशीनरी के प्रयोग में सावधानी रखें। पार्टनरों से मतभेद हो सकते हैं।

 *राशि फलादेश वृश्चिक :-*
*(तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)*
दूर से शुभ समाचार प्राप्त होंगे। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। शत्रु शांत रहेंगे। वाणी पर नियंत्रण रखें। व्यय होगा। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। आय बनी रहेगी। घर में प्रतिष्ठित अतिथियों का आगमन हो सकता है। दुष्‍टजनों से दूर रहें। चिंता तथा तनाव रहेंगे।

*राशि फलादेश धनु :-*
*(ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे)*
भूमि व भवन संबंधी बाधा दूर होगी। आय में वृद्धि होगी। परीक्षा व साक्षात्कार आदि में सफलता प्राप्त होगी। निवेश शुभ रहेगा। भाग्य का साथ रहेगा। नौकरी में अनुकूलता रहेगी। विवाद से क्लेश होगा। काम में मन नहीं लगेगा। लेन-देन में जल्दबाजी न करें। किसी व्यक्ति विशेष से अनबन हो सकती है।

 *राशि फलादेश मकर :-*
*(भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी)*
व्यापार-व्यवसाय ठीक चलेगा। शत्रु शांत रहेंगे। ऐश्वर्य पर खर्च होगा। परिवार के किसी सदस्य के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। कोई ऐसा कार्य न करें जिससे कि नीचा देखना पड़े। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। शारीरिक कष्ट संभव है।

 *राशि फलादेश कुंभ :-*
*(गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)*
शेयर मार्केट में जल्दबाजी न करें। व्यापार लाभदायक रहेगा। पारिवारिक सहयोग मिलेगा। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। लेन-देन में सावधानी रखें। चोट व रोग से कष्ट संभव है। प्रमाद न करें। डूबी हुई रकम प्राप्त हो सकती है। यात्रा मनोरंजक रहेगी। नौकरी में मातहतों का सहयोग प्राप्त होगा।

 *राशि फलादेश मीन :-*
*(दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)*
विद्यार्थी वर्ग सफलता प्राप्त करेगा। स्वादिष्ट भोजन का आनंद प्राप्त होगा। म्युचुअल फंड में सोच-समझकर हाथ डालें। जल्दबाजी न करें। समय अनुकूल है। यात्रा मनोरंजक रहेगी। किसी मांगलिक कार्यक्रम में भाग लेने का अवसर प्राप्त होगा। व्यापार-व्यवसाय में मनोनुकूल लाभ होगा।

☯ *आज का दिन सभी के लिए मंगलमय हो ।*

*शुभम भवतु......*

*आचार्य रजनीकांत शर्मा*
प्रदेश धर्माचार्य छत्तीसगढ़ प्रान्त
हिंदू शक्ति सेवा संगठन 


*बुधवार प्रातःकालीन श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भस्म आरती श्रृंगार दर्शन*

उज्जैन। *जय श्री महाकाल* *श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का आज का भस्म आरती श्रंगार दर्शन*
*29 दिसंबर 2021 ( बुधवार )*


*2022राशिफल,सभी के जीवन मे ढेर सारी उम्मीदें लेकर आने वाला है,सभी 12 राशि वालों के लिए नया साल 2022 कैसा रहेगा-देखिए mornews*

सभी के जीवन में ढेर सारी उम्मीदें लेकर आने वाला है। सभी यह सोचते हैं कि बीते साल जो हमारे काम अधूरे रह गए हैं, वे आने वाले नए साल में जरूर पूरे हों।

नया साल 2022 सभी के जीवन में ढेर सारी उम्मीदें लेकर आने वाला है। सभी यह सोचते हैं कि बीते साल जो हमारे काम अधूरे रह गए हैं, वे आने वाले नए साल में जरूर पूरे हों। नए साल पर करियर में एक नया मुकाम हासिल हो, जीवन में पैसे से संबंधित सभी तरह की बाधाएं आने वाले साल में न रहें और अपनों का प्यार नए साल में मिलता रहे ऐसी उम्मीदें रखते हैं। हम सभी लोगों के मन में आने वाले नए साल में नौकरी, बिजनेस, धन-दौलत, ऐशोआराम, शिक्षा, प्यार और सेहत कैसा रहेगा, इस बात को जानने की उत्सुकता हमेशा रहती है।


नया साल 2022 सभी के जीवन में ढेर सारी उम्मीदें लेकर आने वाला है। सभी यह सोचते हैं कि बीते साल जो हमारे काम अधूरे रह गए हैं, वे आने वाले नए साल में जरूर पूरे हों।

1 -मेष राशि

व्यवसाय में भाग्य का साथ मिलेगा और धन लाभ के योग बनेंगे। नए क्षेत्रों में निवेश करने से आपको इस वर्ष लाभ हो सकता है। व्यवसाय के संबंध में नए विचारों में आपकी रुचि हो सकती है। इस वर्ष विदेश यात्रा का भी मौका हासिल हो सकता है। नौकरी में पदोन्नति के योग की प्रबल संभावनाएं इस वर्ष बनने और कार्य में सक्रियता और महत्वपूर्ण निर्णय लेने का सबसे शुभ समय मध्य मई से अक्टूबर तक का होगा। वहीं नवंबर और दिसंबर का महीना आपकी ऊर्जा को धीमा कर सकता है।
बृहस्पति और शनि के चतुर्थ भाव पर संयुक्त दृष्टि है, इसलिए मेष जातकों के परिवार में शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण रहेगा। साल के अंत तक घर में कुछ शुभ कार्य भी हो सकते हैं जो आपको खुश रख सकते हैं। विवाहित जीवन में तनाव की स्थिति बन सकती हैं, इसलिए आपसी तालमेल बनाए रखने की आवश्यकता इस वर्ष भर बनी रहेगी।
स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से वर्ष की शुरुआत अच्छी रहेगी। आपको अपने सामान्य स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए स्वस्थ भोजन, योग, ध्यान और व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करने की सलाह दी जाती है। यदि उचित देखभाल की जाए और स्वस्थ आहार का पालन किया जाए, तो वर्ष के अंत तक बिना किसी लंबी बीमारी के सुखी और खुशहाल जीवन जीने में सफल होंगे।
अप्रैल के प्रारंभ से ही राहु आपकी राशि में होंगे या समय आपके लिए संभलकर चलने का रहेगा। कोई भी व्यापार या व्यवसाय साझेदारी में करने से पहले आपको अच्छी तरीके से विचार कर लेना चाहिए। उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को कड़ी मेहनत करने की सलाह इस वर्ष दी जाती है। साल की शुरुआत में मिले-जुले परिणाम मिलेंगे,,,

2-वृषभ राशि

यह वर्ष वृषभ राशि के जातकों के लिए एक अच्छा वर्ष होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि बृहस्पति साल के अधिकांश समय आपके दसवें भाव में रहेंगे, जिसके फलस्वरूप आप अपने कार्यस्थल में बहुत लाभ कमा सकते हैं। इसके अलावा यदि आप व्यवसाय के क्षेत्र से संबंधित हैं तो भी आप बेहतर लाभ कमाएंगे। आपकी मेहनत रंग लाएगी इस दौरान करियर में आपको कोई बड़ी उपलब्धि हासिल हो सकती है। व्यवसायिक दृष्टिकोण से या वर्ष काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। शनि भगवान इस वर्ष कार्य और व्यापार में आपके लिए काफी मददगार साबित होने वाले है।
अप्रैल के महीने में गुरु के गोचर और पंचम भाव में गुरु की दृष्टि से नवविवाहितों को शुभ समाचार प्राप्त हो सकते हैं। आपके बच्चे तरक्की करेंगे। आपको अपनी संतान की ओर से शुभ समाचार प्राप्त होगा। कुल मिलाकर पारिवारिक जीवन अच्छा रहेगा।

3- मिथुन राशि


इस साल आपको करियर के क्षेत्र में कई अवसर मिल सकते हैं। अवसरों का लाभ उठाने से पहले खुद पर ध्यान दें और अपने काम पर फोकस करें। व्यवसाय के क्षेत्र से जुड़े जातक इस वर्ष बड़े लाभ की उम्मीद कर सकते हैं। यदि मिथुन राशि के जातक किसी नई व्यावसायिक परियोजनाओं को लेने की योजना बना रहे हैं, तो आपको सलाह दी जाती है कि आप वर्ष के दूसरे भाग में इस परियोजना पर काम करें।
यह वर्ष परिवारिक जीवन के लिए बेहद अनुकूल रहेगा। घर की आवश्यकता के अनुसार आप खरीददारी करते दिखाई देंगे। जिससे घर वालों के बीच आप के मान सम्मान में वृद्धि होगी। इस वर्ष आपको अपनी सेहत को लेकर विशेष सावधान रहना होगा। अप्रैल के महीने तक आपको बेहद सतर्क रहने की सलाह दी जाती है क्योंकि इस दौरान आप को गंभीर चोट लगने की संभावना है।
आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। यह वर्ष मिथुन राशि के जातकों को मनचाहा फल देगा। आपको अपेक्षा से अधिक लाभ भी होगा और अप्रैल, जुलाई, अक्टूबर और नवंबर में ग्रहों की स्थिति से भी आपको निश्चित रूप से सकारात्मक परिणाम मिलेगा। इस अवधि में आपके पास निश्चित रूप से अच्छा धन होगा और इस वर्ष आपको धन की कोई कमी नहीं होने वाली है।
इस वर्ष छात्रों को परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त होंगे उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्रों के लिए भी अप्रैल के बाद का समय विशेष अच्छा रहेगा आपको इस दौरान हर विषय को समझने में मदद मिलेगी। उच्च शिक्षा के इच्छुक छात्रों को प्रतिष्ठित कॉलेजों और संस्थानों में नौकरी मिलने की संभावना है। साथ ही इस राशि के प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को अप्रैल के दूसरे सप्ताह के बाद सफलता मिल सकती है।

4--कर्क राशिफल 

करियर के हिसाब से यह वर्ष मिश्रित परिणाम लेकर आ रहा है। इस दौरान आपको कार्यक्षेत्र में उन्नति व प्रगति प्राप्त होगी आप अपने प्रयासों से उन्नति प्राप्त करेंगे। आपकी नौकरी में पदोन्नति की संभावना है। व्यवसाय की दृष्टि से वर्ष की शुरुआत इतनी अनुकूल नहीं होगी और सफलता हासिल करने के लिए आपको कड़ी मेहनत और ध्यान एकाग्र करना पड़ सकता है। आपको परिवार के सुख में कमी महसूस होगी साथ ही परिवार का सहयोग प्राप्त करने में आपको परेशानी होगी जिससे आपका निजी जीवन तनावग्रस्त रहेगा वही कार्य की अधिकता के कारण भी आपको परिवार से दूर रहना पड़ सकता है। इस वर्ष नवविवाहितों को कोई शुभ समाचार मिल सकता है।
स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव हो सकते हैं इस दौरान आपको विशेष सावधानी बरतनी होगी। योग व्यायाम नियमित रूप से करते रहें और खानपान में बहुत संयम बरतने की आवश्यकता पूरे वर्ष आपको रहेगी । वर्ष के उत्तरार्ध में स्वास्थ्य अच्छा और स्थिर रहेगा और लग्न पर ग्रह के लाभकारी पहलुओं के कारण आपके मन में सकारात्मक दृष्टिकोण और विचार होंगे।
खर्चों पर नियंत्रण रखना आपके लिए आपकी आर्थिक स्थिति को सुधारने में मददगार साबित होगा। प्रॉपर्टी खरीदने के लिए अगर लोन के लिए अप्लाई करना चाहते हैं तो यहां भी आपको सफलता मिल सकती है, लेकिन सलाह दी जाती है कि निवेश को लेकर सतर्क रहें क्योंकि इस साल आपके खर्चे काफी ज्यादा होने वाले हैं।
कर्क राशि के छात्रों के लिए वर्ष की शुरुआत कुछ उतार-चढ़ाव से भरा रहेगा। उच्च शिक्षा की इच्छा रखने वाले कर्क राशि के जातकों को अप्रैल के बाद जब मीन राशि में बृहस्पति गोचर करेगा, तभी छात्रों को बिना किसी व्याकुलता के ध्यान केंद्रित करने में सफलता मिल सकती है।

5- सिंह राशि

वर्ष की शुरुआत बहुत अच्छी रहेगी। इस दौरान आप अपने कार्य के प्रति अधिक ध्यान केंद्रित करेंगे। मई के पश्चात आप कार्य क्षेत्र से संबंधित किसी यात्रा पर जा सकते हैं। आपको वांछित लाभ प्राप्त होगा और आप अपने व्यवसाय से संतुष्ट रहने वाले हैं। जो लोग नौकरी के क्षेत्र में हैं उन्हें कार्यस्थल पर अधिक मान सम्मान मिलेगा। इस साल सिंह जातकों को अपने माता-पिता के स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखना होगा। विवाहित सिंह राशि के जातकों को दूसरे संतान की खुशी मिल सकती है। इसके अलावा विवाह के लिहाज से भी सिंह राशि के जातकों के लिए यह वर्ष बहुत अच्छा रहने वाला है। इस वर्ष अपने स्वास्थ्य को लेकर सजग रहें। चुनौतीपूर्ण समय होने की प्रबल संभावना है, इस दौरान आपको हाथ पेट और गुर्दे से संबंधित बीमारियां परेशानी दे सकती हैं। नियमित रूप से योग व्यायाम करते रहें चिकित्सीय परामर्श लेते रहे यह आपके लिए लाभदायक होगा।

6- सिंह राशि

यह साल आर्थिक मामले में मिश्रित प्रभाव देने वाला रहेगा लेकिन इस साल आप से खर्चे अधिक रहने से आपकी आर्थिक स्थिति पर इसका सीधा असर पड़ेगा। अप्रैल के बाद की समयावधि बेहद ही शुभ रहने वाली है और यह इंगित करता है कि आप इस अवधि के दौरान पेशेवर रूप से या दोस्तों, जीवनसाथी या पेशेवर भागीदारों के माध्यम से धन अर्जित करने में भी कामयाब रहने वाले हैं। यदि आप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं तो आपके लिए अप्रैल के पश्चात का समय विशेष रूप से अनुकूल रहेगा। उच्च शिक्षा के इच्छुक छात्रों को वांछित संस्थानों में दाखिला मिल सकता है। जो लोग विदेश में उच्च शिक्षा के लिए जाना चाहते हैं, उन्हें साल के आखिरी भाग में यानी सितंबर से दिसंबर तक इस सन्दर्भ में शुभ समाचार हासिल हो सकता है।
करियर के लिहाज से कन्या राशि वालों के लिए जनवरी मार्च और जून के महीने काफी बेहतर रहेंगे और मई के शुरुआत में कुछ लोगों को मनचाहा स्थानांतरण भी मिल सकता है। नौकरीपेशा जातक पदोन्नति की उम्मीद कर सकते हैं। वहीं जो जातक उद्योग के काम को बदलने की योजना बना रहे थे वो इसे बेहतर करने में सक्षम हो सकते हैं। जो लोग वर्तमान में बेरोजगार हैं उन्हें इस वर्ष नौकरी मिल सकती है। पारिवारिक जीवन के मोर्चे पर साल का मध्य भाग औसत रहेगा और साल का अंतिम भाग आपके लिए बेहतरीन परिणाम लेकर आएगा। हालांकि साल के मध्य में आपको अप्रैल से सितंबर के बीच कुछ पारिवारिक विवादों का सामना करना पड़ सकता है।
स्वास्थ्य के लिए यह वर्ष अच्छा रहेगा। कोई बीमारी पहले से चली आ रही तो इस दौरान आपको उससे पूरी तरीके से मुक्ति मिल सकती है।आर्थिक जीवन में आपको इस वर्ष बहुत सी उठापटक से गुजरना पड़ सकता है। साल की शुरुआत आर्थिक तौर पर कमजोर रहेगी लेकिन धीरे-धीरे भाग्य का साथ मिलता दिखाई देगा जिससे स्थितियों में भी सुधार देखा जाएगा। यदि आप उच्च शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं तो आपको सफलता के कई मौके मिल सकते हैं। इस दौरान आप कब मेहनत के बाद भी अच्छे परिणाम हासिल कर सकेंगे। जो छात्र विदेश जाने को लेकर गंभीर हैं या शिक्षा के लिए घर से दूर जाना चाहते हैं, उनके लिए यह समय अनुकूल रहने वाला है।

*7- तुला राशि

वर्ष की शुरुआत में कार्य क्षेत्र में आपको भाग्य का साथ मिलेगा जो लोग नौकरीपेशा है उन्हें प्रमोशन के साथ-साथ कोई अतिरिक्त जिम्मेदारी भी मिल सकती है। आप साल के पहले कुछ महीनों के दौरान पदोन्नति की उम्मीद कर सकते हैं। जो लोग नौकरी या काम बदलने का विचार हैं, उन्हें अपनी वर्तमान नौकरी छोड़ने से पहले और नई नौकरी में शामिल होने से पहले उचित विश्लेषण और शोध कर लेने की सलाह दी जाती है। व्यापारिक रूप से या वर्ष पिछले वर्ष की अपेक्षा काफी बेहतर रहेगा और आप व्यापार में भी आपको अच्छे परिणाम मिलेंगे। साल का प्रारंभ पारिवारिक जीवन के लिए ज्यादा अनुकूल नहीं रहने वाला है। इस दौरान आपको किसी कारण अपने घर से दूर जाना पड़ेगा इसके साथ ही काम की अधिकता के चलते परिवारिक पूरी या परिवार में सामंजस्य की कुछ कमी के योग बनेंगे, जिससे परिवार में मनमुटाव संभव है।
इस वर्ष आपको विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होगी अन्यथा कोई रोग आपको परेशान कर सकता है ऐसे में आपके लिए बेहतर होगा कि अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए ही हर प्रकार की छोटी-मोटी समस्याओं से अपने शरीर का बचाव करें मौसम के बदलाव से पैदा होने वाली बीमारियों के प्रति सतर्क रहें। वर्ष के शुरुआत आपके आर्थिक जीवन के लिए अच्छा रहेगा। अप्रैल से सितंबर तक का समय आपको धन लाभ की प्राप्ति के लिए बहुत उत्तम कहा जाएगा। यदि आप कुछ शिक्षा ग्रहण करने का सोच रहे हैं तो उसके लिए यह वर्ष अच्छा रहेगा। आपको अच्छे परिणाम मिलेंगे परंतु प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को इस समय भी अपनी मेहनत जारी रखने होगी।

*8- वृश्चिक राशि


वृश्चिक जातकों को कुछ चुनौतियों से इस वर्ष परिवारिक जीवन में गुजारना पड़ सकता है क्योंकि ग्रहों की दृष्टि आपके परिवारिक जीवन को सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाली है। आप अपनी एकाग्रता, प्रयास और कड़ी मेहनत के दम पर इस वर्ष अपने करियर में सफल हो सकते हैं। अप्रैल के बाद जब बृहस्पति पांचवें भाव में गोचर करेगा, तब आपकी स्थिति में कुछ सुधार देखने को मिल सकता है और साथ ही आपको आपके शत्रुओं के कारण काम में कुछ समस्याएं भी हो सकती हैं, इसलिए आपको कड़ी मेहनत करना जारी रखने की आवश्यकता पड़ेगी और साथ ही सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। माता पिता को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी आपको तनाव देगी विशेष रूप से जनवरी के मध्य से लेकर फरवरी के मध्य तक पिता की सेहत में गिरावट आ सकती है।
मार्च तक राहु आपकी राशि में उपस्थिति होने का प्रभाव आपकी परीक्षा लेते हुए आपको बीच-बीच में शारीरिक कष्ट प्रदान करता रहेगा। ऐसे में अपने खान-पान पर अधिक सावधानी बरतें। आमतौर पर यह साल आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छा रहेगा। वे लोग जो किसी बिजनेस में है या उनका अपना खुद का व्यवसाय है उनके लिए उतार-चढ़ाव से भरा रहेगा। अप्रैल से सितंबर के बीच प्रॉपर्टी खरीदने में आपको सफलता मिल सकती है। आपके लिए आय के नए स्रोत खुल सकते हैं और इस वर्ष संपत्ति खरीदने की संभावना भी कम है। शिक्षा के क्षेत्र में इस वर्ष छात्रों को पूर्व से अधिक मेहनत करने की आवश्यकता होगी।प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को परीक्षा में सफलता मिलेगी उस दौरान आपका परिवार भी आप को प्रोत्साहित करता दिखाई देगा।

*9- धनु राशि


इस वर्ष आपको कार्य क्षेत्र में भरपूर सफलता मिलेगी। अप्रैल महीने के बाद स्थिति में परिवर्तन आना शुरू हो सकता है। यदि आप साझेदारी में व्यवसाय करते हैं तो आपके लिए सितंबर के बाद का महीना सकारात्मक रहने की उम्मीद है। इसके अलावा नवंबर माह में आपको कार्य क्षेत्र से संबंधित किसी विदेश यात्रा पर जाने का अवसर मिल सकता है। धनु राशि वालों को परिवारिक जीवन इस वर्ष अच्छा रहेगा। परिवार में हंसी खुशी का माहौल बना रहेगा। परिवार के सदस्य एक दूसरे को प्यार करेंगे परिवार के सदस्यों के साथ आपके संबंध अच्छे रहेंगे। आपका स्वास्थ पिछले वर्ष के अनुसार इस वर्ष काफी बेहतर रहेगा हालांकि शनिदेव बीच-बीच में आपकी परीक्षा लेते हुए आपको कुछ कष्ट देते रहेंगे लेकिन आपको कोई बड़ा रोग इस वर्ष नहीं होगा। नियमित रूप से योग व्यायाम करते रहे या आपके लिए काफी लाभकारी सिद्ध हो सकता है।
साल 2022 में आपको भाग्य का साथ मिलेगा। साथ ही आपकी आमदनी में भी लगातार वृद्धि दर्ज की जाएगी। इस दौरान आपकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी और आपको मानसिक तनाव से मुक्ति मिलेगी। किसी भी जगह निवेश करने से पहले अच्छे से जांच-पड़ताल कर लें। साथ ही किसी जोखिम भरे व्यवसाय में पैसा लगाने से भी बचें।शिक्षा के क्षेत्र में धनु राशि के जातकों को भरपूर सफलता मिलेगी। यदि आप उच्च शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हैं तो आपके लिए अप्रैल से जून के मध्य और फिर सितंबर का महीना बेहद शुभ रहने वाला है।

*10- मकर राशि

साल 2022 में मकर राशि वाले जातकों कार्यक्षेत्र में विशेष मेहनत करने की जरूरत होगी। इस दौरान आपको मेहनत के अनुसार अच्छे और बुरे परिणाम प्राप्त होंगे। अगर आप नौकरी, कार्यक्षेत्र या फिर कंपनी बदलने के इच्छुक हैं तो इस कार्य को साल के पहली या अंतिम तिमाही में करना आपके लिए बेहतर साबित हो सकता है। आप अपने सहयोगियों और वरिष्ठों से इस वर्ष अच्छे संबंध बना कर रखें। साल की शुरुआत में परिवारिक जीवन में परेशानियां देखने को मिल सकती है। इस दौरान आपकी माता को स्वास्थ्य कष्ट संभव है। ऐसे में आपको भी मानसिक चिंताएं परेशान करेंगी। विदेश जाकर पढ़ाई करने का सपना देख रहे छात्रों के लिए अगस्त और दिसंबर का महीना शुभ रहेगा। इस दौरान उन्हें शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है जो छात्र उच्च शिक्षा की तैयारी कर रहे हैं उन्हें वर्ष की शुरुआत में अच्छे परिणाम मिलेंगे।
मकर राशि के जातकों को अपने आर्थिक जीवन में कम अनुकूल फल प्राप्त होंगे साल की शुरुआत आपके लिए अच्छी नहीं होगी। क्योंकि इस दौरान आपके खर्चों में वृद्धि होगी ऐसे में जितना संभव हो सही रणनीति और योजना के अनुसार ही अपना धन खर्च करें। स्वास्थ्य अनुकूल रहेगा आप अच्छे स्वास्थ्य के साथ अपना जीवन व्यतीत करते दिखाई देंगे। इस वर्ष आपकी सेहत पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा इस दौरान आप अपने किसी पुराने रोग से मुक्ति पा सकेंगे। हालांकि वर्ष की शुरुआत में कुछ परेशानी हो सकती है साल की शुरुआत में राहु आपके पंचम भाव में स्थित रहेगा और शनि आपके प्रथम भाव में जिसकी वजह से आपको मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

*11- कुंभ राशि

इस वर्ष कुंभ राशि वाले जातकों के लिए नौकरी या व्यापार में परिवर्तन के लिए अप्रैल और मई का महीना सबसे ज्यादा उत्तम रहने वाला है। साल के उत्तरार्ध में आपको कुछ समस्या हो सकती है। साढ़ेसाती होने की वजह से कोई भी कार्य शुरू करने से पहले किसी अनुभवी व्यक्ति की सलाह जरूर लें, इससे आपके व्यवसाय में तरक्की होने की संभावना में वृद्धि होगी। साल की अंतिम तिमाही कुंभ राशि के जातकों के पारिवारिक जीवन के दृष्टिकोण से बेहतर रहने की संभावना है। इस अवधि में आपको आपके परिवार का पूर्ण समर्थन प्राप्त हो सकता है,
साल 2022 में कुंभ राशि के जातकों को सेहत से जुड़ी कुछ परेशानी हो सकती है क्योंकि आपके राशि स्वामी शनि वर्ष के पूर्वार्ध में आपके बारहवें में भाव में रहेंगे जिससे आपको स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ तकलीफ परेशान कर सकती हैं संभावना है कि आपको सिरदर्द, एसिडिटी जोड़ों में दर्द, सर्दी जुखाम जैसी समस्याएं परेशान करती रहें। इस वर्ष आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा। वर्ष के मध्य में अर्थात अप्रैल से सितंबर के बीच आपको व्यापार में अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे और लाभ की स्थितियां बनेंगी अप्रैल से सितंबर के दौरान आपको विशेष लाभ होने के योग बनेंगे इस वर्ष आपको कई ऐसे मौके प्राप्त हो सकते हैं जहां आपको आपके परिश्रम का उचित फल प्राप्त हो सकता है।प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को सफलता पाने के लिए कड़ी मेहनत करना पड़ेगा।

*12- मीन राशि

आप इस समय अपने कार्य क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करेंगे जिससे आप इस वर्ष एक बेहतर करियर का निर्माण कर सकते हैं। यदि आप इस वर्ष कोई नया व्यवसाय शुरू करने की योजना बना रहे हैं तो आपको सलाह दी जाती है कि अप्रैल महीने में इसकी शुरुआत करें क्योंकि इस अवधि में आपको सफलता मिलने की संभावना अधिक है। इस वर्ष प्रेम भाव बढ़ेगा अगर आप शादीशुदा हैं और आपकी संतान है तो आपको सलाह दी जाती है कि इस वर्ष आप समय निकाल कर अपने बच्चों को बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित करें। इस कार्य से आपके बच्चों को शैक्षणिक गतिविधियों में बेहतर परिणाम हासिल करने में मदद मिल सकती है। मीन राशि के छात्रों के लिए साल बहुत बेहतरीन रहेगा।आपकी मेहनत सफल होगी और परीक्षा में आपको अच्छे परिणाम मिलेंगे यदि आप किसी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो उसमें आपको सकारात्मक परिणाम मिलेगा
इस वर्ष आपके खर्चों में बढ़ोतरी होने की संभावना है जबकि ,आमदनी की बात करें तो इसमें बढ़ोतरी की स्थिति रहेगी।आपको कार्य विस्तार से अधिक मुनाफा होने की प्रबल संभावना है साल का प्रारंभ आपको आर्थिक रूप से मजबूत करेगा इस समय आपके पास धन का आगमन होगा और आमदनी के स्रोत भी बढ़ेंगे हालांकि आपको अपने खर्चों पर भी लगाम लगाना होगा तभी आपका आर्थिक पक्ष मजबूत स्थिति में आ पाएगा। किसी बड़ी स्वास्थ्य समस्या के आसार इस वर्ष बेहद कम हैं लेकिन खराब पाचन तंत्र, लीवर, संक्रामक रोग इत्यादि जैसी छोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्या आपको परेशान कर सकती है। इस वर्ष आप अपने खानपान का ध्यान रखते हुए व्यायाम और योग जैसी अच्छी चीजों को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।

आचार्य रजनीकांत शर्मा 


*ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग सायंकालीन श्रृंगार दर्शन*

जय ओंकार जी
द्वादश में चतुर्थ ज्योतिर्लिंग श्री ओंकारेश्वर में श्री ओंकार महाराज के सायंकालीन श्रृंगार दर्शन नर्मदा तट खण्डवा मध्य प्रदेश से रविवार दिनांक 26-12-2021 


*आज का भगवद चिन्तन*

राधे- राधे -


आज का भगवद चिन्तन

◆सुखी जीवन जीने का सिर्फ एक ही रास्ता है वह है अभाव की तरफ दृष्टि ना डालना। आज हमारी स्थिति यह है जो हमे प्राप्त है उसका आनंद तो लेते नहीं, वरन जो प्राप्त नहीं है उसका चिन्तन करके जीवन को शोकमय कर लेते हैं।

◆दुःख का मूल कारण हमारी आवश्कताएं नहीं हमारी इच्छाएं हैं। हमारी आवश्यकताएं तो कभी पूर्ण भी हो सकती हैं मगर इच्छाएं नहीं। इच्छाएं कभी पूरी नहीं हो सकतीं और ना ही किसी की हुईं आज तक। एक इच्छा पूरी होती है तभी दूसरी खड़ी हो जाती है।

इसलिए शास्त्रकारों ने लिख दिया
"" आशा हि परमं दुखं नैराश्यं परमं सुखं ""
दुःख का मूल हमारी आशा ही हैं। हमे संसार में कोई दुखी नहीं कर सकता, हमारी अपेक्षाएं ही हमे रुलाती हैं। यह भी सत्य है कि बिना इच्छायें ना होंगी तो कर्म कैसे होंगे ? इच्छा रहित जीवन में नैराश्य आ जाता है। लेकिन अति इच्छा रखने वाले और असंतोषी हमेशा दुखी ही रहते हैं। 


*नवरात्र का नौंवा दिन: माता सिद्धिदात्री की पूजा करें, यश की प्राप्ति होगी*

शारदीय नवरात्रि के नवें दिन माता सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इसके अलावा इस दिन कन्या पूजन भी किया जाता है। ज्योतिषों के अनुसार माता सिद्धिदात्री को मोक्ष की देवी भी कहा जाता है। माता के इस स्वरूप की पूजा करने यश और धन की प्राप्ति होती है।
मान्यता है कि सच्चे मन से इनकी पूजा से भक्त को सारी सिद्धियां मिलती हैं और कोई भी काम उसके लिए मुश्किल नहीं रह जाता है। माता सिद्धिदात्री कमल पर विराजमान हैं। मां सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं। ये हाथों में कमल, शंख, गदा और सुदर्शन चक्र धारण किए हुए हैं। इनका वाहन सिंह है। सिद्धिदात्री को देवी सरस्वती का भी रूप माना जाता है, जो श्वेत कपड़े और गहने धारण करती हैं। ये अपनी विद्या और बुद्धि से भक्तों को भी बुद्धि का वरदान देती हैं। मां सिद्धिदात्री कमल पुष्प पर विराजमान हैं और इनका वाहन सिंह है। देवी के दाहिनी तरफ के नीचे वाले हाथ में चक्र है। उनके दाहिनी तरफ के ऊपर वाले हाथ में गदा है। बायीं तरफ के नीचे वाले हाथ में शंख धारण किए हुए है और ऊपर वाले हाथ में कमल का फूल है।


ऐसे करें पूजन
नवमी के दिन मां का पूजन करके उन्हें विदाई दी जाती है। सबसे पहले शुद्ध होकर स्‍वच्‍छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद एक चौकी पर मां की प्रतिमा स्थापित करें। मां को फूल, माला, फल, नैवेध आदि चढ़ाएं। मंत्र का जाप करें और मां की आरती उतारें। इस दिन छोटी- छोटी नौ कन्याओं को घर बुलाकर उनका भी पूजन करें और उन्हें उपहार अवश्य दें।

ये है मंत्र
सिद्धगन्‍धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि, सेव्यमाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी.
या देवी सर्वभूतेषु सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

आंवले से बने पकवान का लगाएं भोग
माता सिद्धिदात्री को आंवले का भोग बहुत पसंद है। इसलिए इस माता सिद्धिदात्री का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आंवले से बने पकवान का भोग जरूर लगाएं। 


*मंगलवार:आज भगवान बजरंगबली का वॉर है,सफलता और मनोकामना के लिए करे हनुमान जी की पूजा देखिए mornews*

 आज मंगलवार है और मंगलवार महावीर याने भगवान बजरंग बली का दिन होता है ,आज के दिन भगवान श्री हनुमान की पूजा करने से व्यक्ति जो मांगता है उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है।मंगलवार के दिन शुभह जल्दी उठकर सच्चे मन से भगवान बजरंग बली की पूजा आराधना करने से हनुमान निश्चित फल देते है,कहा जाता है हनुमान जी महाराज अपने भक्तों को कभी निराश नई करते,जो भक्त उनसे सच्चे आस्था रखता है हनुमान जी उसकी सारी मनोकामना अवश्य पूर्ण करते है।

पूजा के नियम बनते है बिगड़े काम

मंगलवार के दिन शुभह जल्दी उठकर नित्य कार्य के बाद,सबसे पहले हनुमान जी मंदिर जाए या घर मे पूजा स्थल पर भगवान की फोटो या मूर्ति रखकर पूजा करे बंदन का चोला चढ़ाए,धूप दीप कपूर से पूजा करे,फल मिठाई का भोग और भगवान को चना बहुत प्रिय है तो चने का लड्डू का अवश्य भोग लगाए,।

हनुमान चालीस बजरंग बाण हानुमाष्टक का पाठ करे

मंगलवार के दिन पूजा पाठ के बाद हनुमान चालीसा,बजरंग बाण, हनुमास्टक का अवश्य पाठ करे इससे सारे कष्ट दूर होते है रोग दोष का नाश होता है और निश्चित रूप से फल की प्राप्ती होती है।